देश के सबसे बड़े मंदिरों से हो लीजिए रूबरू

चयनिका निगम

4th October 2020

मंदिरों की बात आती है तो हमें विशालकाय मंदिर हमेशा ही भाते हैं। कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जो बेहद बड़ी जगह पर बने हैं। ऐसे ही कुछ मंदिरों के बारे में आइए जानें-

देश के सबसे बड़े मंदिरों से हो लीजिए रूबरू
वैसे तो मंदिर किसी भी आकार का हो श्रद्धा के साथ वहां प्रवेश करना भर ही काफी होता है। मगर आपको किसी विशालकाय मंदिर में जाने का मौका मिले तो एक अलग सी सुकून की अनुभूति होती है। इसी अनुभूति के लिए भारत देश में कई ऐसे मंदिर बनाए गए हैं, जो अपने आकार के चलते भक्तों का दिल जीत लेते हैं। इन मंदिरों का आकार इतना बड़ा है कि जहां तक आपकी नजर जाएगी, ये वहां से थोड़ा आगे ही दिखेंगे। मानो इनकी धरती पूरी ही न हो रही हो। ये वही मंदिर हैं, जहां जाने के बाद आपको लगता है कि घूमने के लिए पूरा दिन भी कम है। ये मंदिर आस्था का प्रतीक हैं तो कला का भी बेहद सुंदर नमूना हैं। देश के कुछ ऐसे ही मंदिरों को सी परिचय हम करा देते हैं, देखिएगा वहां के दर्शन किए बिना आप रह नहीं पाएंगी। 
अन्नामलाईयरमंदिर, तमिलनाडू-
10 हेक्टेयर में बना ये मंदिर बेहद सुंदर होने के साथ आस्था का प्रतीक भी माना जाता ही। यहां पर भगवान शिव की पूजा की जाती है और ये अरुणाचल की पहाड़ियों के बीच थिरुवन्नामलाई नाम के कस्बे में बना है। शिव यहां पर अन्नामलाईयर और पार्वती उन्नामलाई अम्मन के तौर पर पूजे जाते हैं। भक्तों की तादाद तो कुछ ऐसी होती है कि क्या ही कहें। इन्हें गिनना भी मुश्किल होता है। 10 हेक्टेयर की भूमि में बना ये मंदिर भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक कहलाता है। यहां पर बेहद सुंदर चार टावर हैं, जिन्हें गोपुराम्स कहते हैं। सबसे बड़ा टावर पूर्वी है और इसमें 11 मंजिल हैं। इसकी ऊंचाई 66 मीटर है। इनको देखना ही काफी अद्भुत होता है। 
अक्षरधाम की सुंदरता-
दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर तो काफी जाना पहचाना है। इसकी प्रसिद्धि बहुत है। दिल्ली आने वाला हर शख्स एक बार तो यहां आना ही चाहता है। लेकिन गिनीस वर्ल्ड रिकॉर्ड में ये मंदिर दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के तौर पर भी दर्ज है। ये मंदिर 43 मीटर या 141 फुट ऊंचा है, 96 मीटर या 316 फुट चौड़ा है और 109 मीटर या 356 फुट लंबा है। मंदिर की दीवारों पर बहुत सुंदर कारविंग की गई है। इसमें म्यूजिशियन बने हैं तो डांसर्स भी। इस मंदिर में 234 खंभे हैं। जिन पर भी काफी खूबसूरत डिजाइन बनाई गई है। ये सबकुछ राजस्थान के गुलाबी और बेहद सुंदर पत्थरों से बना है। मंदिर में भगवान की मूर्ति के साथ 20000 मूर्तियां साधुओं, भक्तों और आचार्यों की बनी हैं। शाम के समय इस मंदिर में नीलकंठ दर्शन, बोट राइड और गार्डन ऑफ इंडिया देखने के लिए काफी भक्त इकट्ठा होते हैं। एक तरह से दिल्ली आकर अगर ये मंदिर नहीं देखा तो समझिए कुछ नहीं देखा। ये मंदिर आपको जिंदगीभर का अनुभव दे जाएगा। यकीन मानिए, आप ये अनुभव भूल नहीं पाएंगे। 
श्री रंगनाथास्वामी मंदिर, तमिलनाडू-
तमिलनाडू के त्रिचूरापल्ली में बना ये मंदिर देश का सबसे बड़ा मंदिर कहलाता है और इसका कुल एरिया 155 एकड़ है। इस मंदिर में 50 श्राइन हैं और 39 मंडप हैं। इतना ही नहीं सुंदर कारविंग वाले 21 टावर हैं तो पवित्र पानी वाले 9 पूल भी। मंदिर दक्षिण गंगा कही जाने वाली कावेरी नदी से घिरा हुआ है। माना जाता है कि मंदिर में राननठस्वामी के तौर पर भगवान विष्णु रहते हैं। मंदिर इतना बड़ा है कि रोज 200 लोगों को खाना भी खिलाया जाता है, वो भी पूरी तरह से भक्तों के दान पर बनता है। ये मंदिर कई सारे भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सिर्फ उत्तर भारत ही नहीं बल्कि पूरे देश और विदेश से भी लोग इस मंदिर में आते हैं। 
रामकृष्ण मंदिर या बेलुर मठ, पश्चिम बंगाल-
बेलुर मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने की थी। रामकृष्ण मठ और मिशन का ये हेडक्वाटर जैसा है। दरअसल विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस के भक्त थे। मठ पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे बना है। इस मंदिर की इमारत कई संस्कृतियों का मिश्रण है। इसमें इस्लाम, हिन्दू, बुद्ध और क्रिश्चियन कला का संगम देखा जा सकता है। इस पूरे मंदिर को 40 एकड़ में बनाया गया है। मंदिर रामकृष्ण का है लेकिन यहां पर स्वामी विवेकानंद का मंदिर भी है। ये मंदिर ठीक वहीं बनवाया गया है, जहां विवेकानंद का क्रियाकर्म 1902 में किया गया था। इस मंदिर को विवेकानंद के आदर्शों के लिए जाना जाता है साथ में आस्था से जुड़ाव तो इसका है ही। 
दक्षिणेश्वर काली मंदिर, पश्चिम बंगाल-
हुगली के किनारे बना ये मंदिर 1855 में रानी रशमोनी ने बनवाया था। वो देवी काली की बड़ी भक्त थीं। ये मंदिर 9 साल में बन कर तैयार हुआ था। 
मिनाक्षी अम्मन मंदिर, तमिलनाडू-
देवी पार्वती के लिए बना ये मंदिर उन्हीं के रूप मिनाक्षी को समर्पित है। उनके साथ शिव जी के रूप सुंदरेश्वर को भी ये मंदिर समर्पित है। करीब 45 एकड़ में बना दक्षिण भारत का मिनाक्षी मंदिर ऐसा ही पवित्र स्थान है, जहां जाने का आकर्षण आस्था के साथ अद्भुत नजारे भी होते हैं। मिनाक्षी मंदिर भले ही शिव-पार्वती का हो लेकिन यहां भगवान विष्णु का वास भी कई तरह से देखा जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विष्णु जी को देवी मिनाक्षी का भाई माना जाता है। यहां कलाकृतियों में भी विष्णु जी के दर्शन किए जा सकते हैं। पौराणिक ग्रन्थों के हिसाब से भगवान शिव सुंदरेश्वर रूप धर कर मदुरै आए थे। उन्होंने यहां पांड्य राजा मलयध्वज की बेटी राजकुमारी मिनाक्षी से विवाह किया था। अपने निवास बैकुंठ से खुद भगवान विष्णु ने इस विवाह को संचालित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मंदिर को ‘स्वछय आईकॉनिक प्लेस' के तमगे से भी नवाजा है। स्वछय भारत अभियान के तहत ऐसा 1 अक्टूबर, 2017 को किया गया था। 

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

भव्यता और आस...

भव्यता और आस्था का संगम मिनाक्षी मंदिर

देश के 100 स...

देश के 100 साल पुराने मंदिरों से हो लीजिए...

शिरडी हो आए ...

शिरडी हो आए तो अब इन साई मंदिरों को भी देख...

देश के 4 अनो...

देश के 4 अनोखे गणेश मंदिर, आपने कितनों में...

पोल

आपको कैसी लिपस्टिक पसंद है

वोट करने क लिए धन्यवाद

मैट

जैल

गृहलक्ष्मी गपशप

टमाटर से फेस...

टमाटर से फेस पैक...

 अगर आपको भी त्वचा से संबंधी कई तरह की परेशानी है तो...

पतले और हल्क...

पतले और हल्के बालों...

 तो सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आज हम आपको कुछ ऐसा बता...

संपादक की पसंद

टीवी की आदर्...

टीवी की आदर्श सास,...

हर शादीशुदा महिला के लिए करवा चौथ का त्योहार बेहद ख़ास...

मैं एक बदमाश...

मैं एक बदमाश (नॉटी)...

आप लॉकडाउन कितना एन्जॉय कर रही है... मेरे लिए लॉकडाउन...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription