साईं बाबा के अवतार कैसे बने सत्या साई बाबा

चयनिका निगम

7th October 2020

साईं बाबा का अवतार कहलाने वाले सत्यसाईं की भक्तों के बीच बहुत अहमियत है। उनके जीवन पर एक नजर डालते हैं।

साईं बाबा के अवतार कैसे बने सत्या साई बाबा
आंध्र प्रदेश के एक गाँव में जब सत्यनारायण राजू का जन्म का जन्म हुआ तो किसी को नहीं पता था कि वो इतना बड़ा नाम बनेंगे कि करोड़ों की संख्या में लोग उनके अनुयायी बनेंगे। लोग उन्हें धरती के भगवान की तरह पूजेंगे। उस बच्चे को देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वो साईं बाबा के अवतार के रूप में पहचाना जाएगा और पूरी दुनिया उन्हें सम्मान देगी। लेकिन समय गुजरने के साथ ये सब हुआ और उस बच्चे को नाम मिला सत्य साईं। वही जिनके अनुयायियों में देश के कई बड़े नाम भी शामिल थे जैसे क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर। साईं बाबा के रूप माने गए सत्य साईं बचपन से ही सबको अचंभित किए हुए थे। उनमें कोई एक प्रतिभा नहीं थी बल्कि वो कई सारे कामों में पारंगत थे जैसे म्यूजिक, डांस, लिखना और गाना भी। उनको बेहद अक्लमंद भी माना जाता था। साईं बाबा के अवतार कहे जाने वाले सत्य साईं के जीवन को थोड़ा और करीब से जानते हैं-
शुरुआती दिन-
23 नवंबर 1926 को जन्में साईं पुट्टापर्थी गांव में पले बढ़े। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई यहीं पर की। फिर तीसरी तक यहां पढ़ने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो बुक्कापटनम स्कूल चले गए। यही वो दिन थे। कब उन्हें सत्य साईं नाम मिला। 
बिच्छू से बना नाम-
तब उनकी उम्र 14 साल थी। बात 8 मार्च, 1940 की है। सत्यनारायण राजू को बिच्छू ने डंक मार दिया था। वो घंटों होश में ही नहीं थे। होश में आने के कुछ दिनों बात तक उनका व्यवहार अजीब सा हो गया था। वो कभी हंसते तो कभी रोते। फिर एक दिन अचानक से उन्होंने संस्कृत में बोलना शुरू कर दिया। जबकि उन्होंने इस भाषा को कभी पढ़ा भी नहीं था। डॉक्टर तक कुछ न बता पाएं। फिर करीब 2 महीने बाद 23 मई, 1940 को लोगों को उनके अनोखे होने का एहसास हुआ। दरअसल सत्य साईं तरह-तरह के चमत्कार दिखा रहे थे। इस वक्त उनके पिता को गुस्सा आया तो उन्होंने छड़ी हाथ में लेकर पूछा कौन हो तुम तो वो 14 साल का बच्चा बोला मैं साईं बाब हूं। तभी से लोग सत्यनारायण राजू लो  सत्य साईं कहने लगे। 
8 साल पहले गुजर गए थे बाबा-
साईं बाबा सत्य साईं के पैदा होने से भी 8 साल पहले गुजर गए थे। उनके खुद को साईं का अवतार बताते ही लोगों की भीड़ लगने लगी। बाद में सत्य साईं के एक भक्त ने उनके लिए गांव के नजदीक ही मंदिर बनवा दिया। उनके प्रशाति निलयम आश्रम का निर्माण 1950 में पूरा हुआ था। 
मृत्यु का दिन-
सत्य साईं को दिल और सांस से संबंधी बीमारी हो गई थी। मार्च, 2011 में अस्पताल जाने के बाद अप्रैल,2011 में उनकी मृत्यु हो गई। 

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