खुद को बदलना नहीं...

चयनिका निगम

11th October 2020

परिवार के लिए खुद को बदल लेने का काम अक्सर ही महिलाएं करती हैं। रिश्ते को बचाने के लिए बदलाव कीजिए लेकिन कुछ चीजों को बदलने के बारे में सोचिए भी न।

खुद को बदलना नहीं...
‘शादी हो गई है? अब तो बस घर-बार की चिंता करो।' लड़कियों से अक्सर यही कहा जाता है। वो इस बात को मान भी लेती हैं, वो अक्सर अपना आत्मविश्वास, करियर, सोच और पहनावा तक बदल लेती हैं। लेकिन महिलाओं को बदलते समय के साथ समझना होगा कि रिश्ते निभाने के लिए उन्हें बदलने की जरूरत बिलकुल नहीं है। बल्कि उन्हें अपनी खासियतों को उभारने की कोशिश करनी चाहिए। खुद को बदलने की बजाय खुद को बेहतर करने की कोशिश सिर्फ आपके लिए नहीं बल्कि रिश्ते के लिए भी फायदेमंद होगी। इसलिए किसी भी रिश्ते में खुद को बदलने से बचें। बदलना भी है तो अपनी कमियों को बदलें। लेकिन हां, कुछ ऐसे पॉइंट भी हैं, जिन्हें बदलने की सोचिएगा भी नहीं। क्योंकि इनको बदलने का मतलब है, खुद को पूरी तरह खो देना। इसलिए कुछ चीजों को बदलने की सोचिएगा भी नहीं-
शौक के रंग-
किसी न किसी के पास कोई न कोई शौक जरूर होता है। आपके पास भी होगा लेकिन क्या आपने इन शौक को बाय-बाय कह दिया है। तो इस शौक को हैलो बोलिए और इसे कभी भूलिए न। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच इसे पूरा करने कोशिश पूरी कीजिए। 
आत्मविश्वास का पारा हो हाई-
कई बार महिलाएं ऐसे रिश्ते में फंस जाती हैं, जहां लोग उनका आत्मविश्वास बढ़ने ही नहीं देते हैं। ऐसे लोग आपको अयोग्य महसूस कराते हैं। ऐसे महसूस कराते हैं कि आपकी कोई वेल्यू नहीं है लेकिन आपको ऐसे लोगों से दूरी बनानी होगी। दूरी नहीं बना सकती हैं तो इन बातों को इगनोर करना सीख लीजिए। लेकिन अपना आत्मविश्वास बिलकुल कम न होने दें। किसी भी दूसरे घरेलू काम के लिए या परिवार में एडजस्ट करने के लिए अपने आत्मविश्वास को कभी कम न होने दीजिए। 
आपके सपने-
आपने कभी न कभी कुछ न कुछ सपने जरूर देखे होंगे। इन सपनों को धूमिल बिलकुल न होने दें। इन सपनों को फिर से ऊर्जा भर दें। जान लीजिए कि सपनों के बिना जिंदगी में कोई रस नहीं होता है। कई बार तो मकसद भी नहीं होता है। इसलिए सपनों को भूलने से बेहतर है कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन इन्हें पूरा करने की कोशिश जरूर की जाए। 
आर्थिक आजादी-
अक्सर लड़कियां अपने नए परिवार में निभाने के लिए नौकरी छोड़ देती हैं। फिर उनकी आर्थिक आजादी पर पाबंदी लग जाती है। क्योंकि वो खुद कमा नहीं रही होती हैं इसलिए उनको खर्च करने से पहले कई दफा सोचना पड़ता है। जबकि किसी भी इंसान के लिए आर्थिक आजादी जरूरी होती है। क्योंकि अक्सर पैसा न कमाने की वजह से महिलाओं के लिए ये रिश्ता जरूरत मान लिया जाता है। लोगों को लगता है कि पति के साथ है ही इसलिए कि वो कमाता है। वो नहीं देगा तो ये कैसे जीवन काटेगी। जबकि रिश्ता प्यार से बनता है, न कि पैसों से। इसलिए अपनी कमाई का साधन या सेविंग को कभी बन न करें। 

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