वो उठाएगी आवाज, पहले आप बने आधार

चयनिका निगम

18th October 2020

बिटिया के साथ छेड़छाड़ होगी तो आप उसे घर पर बैठने को बोल देंगी या सबक सिखाने को बोलेंगी। सबक सिखाने की शिक्षा देनी है तो आपको भी अपने अंदर की सीमाओं को तोड़ना होगा।

वो उठाएगी आवाज, पहले आप बने आधार
‘बिटिया तुम न जब भी कोई लड़का परेशान करे तो पीछे मत हटना। उसे मजा जरूर चखाना।' आजकल बेटियों को मांएं कुछ इसी तरह मनचलों को सबक सिखाने की सलाह देती हैं। लेकिन असल में जब ऐसा मौका आता है तो क्या होता है। ज्यादातर मांएं मुंह बंद करके बैठने को कह देती हैं। इस मौके पर मां के तौर पर आपकी सलाह शांत हो जाने की रहती है। शुरुआत में तो कम से कम मांएं यही कहती हैं। मामला बढ़ जाए तो भले बाहर आकर कहने की हिम्मत मां जुटा ले। मतलब भाषण खूब दिया जाता है लेकिन अमल के समय पर पैर पीछे खींच लिए जाते हैं। मगर ये तरीका गलत है। आपको बेटी के सामने अपनी बात को साबित करके भी दिखाना होगा और इसके लिए बेटी को भी समझाना होगा। इस काम के लिए आपको पहले खुद की सीमाओं को तोड़ना होगा। खुद के डर खत्म करने होंगे। तब कहीं जाकर आप बेटी को समझा पाएंगी कि गलत के खिलाफ खड़े होना बहुत जरूरी है। कह सकते हैं उसको ताकतवर बनाने के लिए आपको खुद ताकतवर बनना होगा। इसके लिए क्या करना होगा आपको, आइए जानें-
औरत होने पर गर्व-
जो माता-पिता बेटी को छेड़छाड़ के खिलाफ बोलने से पहले पहल रोकते हैं, उनमें ज्यादातर लोग औरतों होने को कमजोरी की तरह देखते हैं। मगत बेटी को अगर हर बुरे समय के लिए तैयार करना है तो आपको खुद उसके सामने ऐसा उदाहरण बनना होगा, जो दिखाए कि औरत होना कोई खराबी नहीं है। बल्कि ये गर्व का विषय है। औरतों के लिए सामाजिक तौर पर कमजोरी माने वाली बातों का बेटी के सामने कभी समर्थन न करें। बल्कि औरतों की समाज में अहमियत पर बात करें। उन्हें बताएं कि महिलाओं की समाज में बहुत अहमियत है और औरतें कमजोरी कभी नहीं होती हैं, वो सिर्फ ताकत होती हैं। बेटी के सामने कभी ये बात बिलकुल न रखें कि तुम तो लड़की हो। उसे लड़की का मतलब दोयम दर्जा नहीं समझ आना चाहिए। उसे हमेशा इस बात पर गर्व होना चाहिए। उसे जीवन की कठिनाइयां आम इंसान की तरह देखनी आणि चाहिए। वो एक औरत होने के नाते ‘लड़की हूं इसलिए ऐसा हो रहा' न सोचे। 
जो करना चाहें-
आपके समय में शायद ऐसा हो कि औरतों और आदमियों के काम अलग-अलग हों। लेकिन अब ऐसा बिलकुल नहीं है और न ही औरतों के आगे बढ़ने की कोई सीमा ही है। इसलिए बेटी जब किसी क्षेत्र में कुछ करना चाहे तो उसे रोकें न। उड़ने दें। बल्कि आप खुद भी उसे नए-नए से क्षेत्र में दखल रखने की सलाह दे सकती हैं। उसे बताएं कि उसका जेंडर उसका भविष्य नहीं तय करेगा। फिर ये बात जब उसके दिल में बैठेगी तो वो अपनी पसंद नपसंद के पैमाने पर नापने के बाद ही निर्णय लेगी। फिर जब वो अपनी मर्जी से दुनिया का अनुभव लेगी तो गलत-सही का निर्णय ले पाएगी। उसे समझ आएगा कि वो कमजोर नहीं है। वो दुनिया का हर अच्छा काम कर सकती है। ये उसमें अपने साथ गलत होते का विरोध करने का भी साहस भरेगा। वो समझेगी कि मेरी मां गलत के खिलाफ खड़े होने से कभी नहीं रोकेगी, जैसे अभी तक नहीं रोका है। फिर पंगा भी लेगी और सबक भी सिखाएगी। लड़की होने पर लोग क्या कहेंगे, लड़की को ही गलत ठराएंगे जैसी बातें उस पर कोई असर नहीं करेंगी। 
ताकत क्या है-
ज्यादातर महिलाएं मां होने के नाते बेटियों को यही बताती हैं कि उन्हें क्या नहीं करना चाहिए? किस बात पर लोग क्या कहेंगे? लेकिन अब जब आप बेटी को ताकतवर बनाने की कोशिश कर रही हैं तो आपको बेटी को ये बातें नहीं कहनी हैं बल्कि आपको उसे उसकी ताकतों से रूबरू कराना है। उसे बताइए कि ये उसकी ताकत है, जिसे निखारना है और ये कमजोरी है, जिसे खत्म करना है। इस प्रक्रिया का उल्टा बिलकुल नहीं होना चाहिए। क्योंकि ऐसा हुआ तो बेटी का मॉरल हमेशा के लिए कमजोर हो जाएगा। वो सिर्फ सामाजिक ताने-बाने में फिट होने की कोशिश ही करती रहेगी। जबकि किसी को भी हमेशा खुश और सफल होने के लिए आगे बढ़ना चाहिए ना कि समाज को खुश करने के लिए। 
लीडरशिप भी हो बिटिया की खासियत-
लीडरशिप की क्वालिटी सबमें नहीं होती है। लेकिन इसके फायदे बहुत हैं। जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर खुद में लीडर को बाहर लाना जरूरी भी होता है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि लीडरशिप को विकसित जरूर किया जाए। आपकी बेटी खुद ये बात नहीं समझ पाएगी। अगर आप चाहती हैं कि अपने साथ बुरा होने पर वो पलट कर सबक जरूर सिखाए तो इसके लिए उसके अंदर के लीडर को जरूर बाहर निकालने की कोशिश करें। ऐसा करने के लिए आप छोटी-छोटी चीजों से शुरुआत कीजिए। जैसे घर के लिए सामान लेने जाएं तो ब्रांड या क्वालिटी उससे चुनने के लिए बोलें। फिर अगर क्वालिटी सही न मिले तो उसे ये गलती भी बताएं। ऐसा करने से वो खुद सही निर्णय लेने की पूरी कोशिश करेगी। वो चाहेगी जो निर्णय वो ले वो बिलकुल सही हो और ऐसा करने के लिए वो हर संभव प्रयास करेगी। ये तो बस शुरुआत होगी। आगे भी आप स्थिति के हिसाब से बेटी को लीडर बनने का मौका दे सकती हैं। यकीन मानिए ये उसके भविष्य में बहुत काम आएगा। 
पढ़ाई में रुचि-
जीवन में सही रस्तों पर चलने के लिए जरूरी है कि कोई भी शख्स जरूरत भर की पढ़ाई कर चुका हो। शिक्षा जीवन में सिर्फ डिग्री के लिए नहीं बल्कि कई सारे बड़े निर्णय लेने के लिए भी काम आती है। इसलिए जरूरी है कि आपकी बेटी शिक्षित हो और शिक्षा का महत्व समझे। जरूरी है कि आप समय-समय पर उसे पढ़ाई की अहमियत समझाती रहें। 

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

आप हैं कंजूस...

आप हैं कंजूस या मितव्ययी?

आपके करियर क...

आपके करियर को दे बढ़ावा, कैसे ढूंढे ऐसा पति...

कंजूस बनिए, ...

कंजूस बनिए, भविष्य सुरक्षित कीजिए

सास करती हैं...

सास करती हैं आपकी बुराई....आप दिखाएं अपनी...

पोल

आपको कैसी लिपस्टिक पसंद है

वोट करने क लिए धन्यवाद

मैट

जैल

गृहलक्ष्मी गपशप

समृद्धिदायक ...

समृद्धिदायक लक्ष्मी...

यू तो लक्ष्मी साधना के हजारों स्वरूपों की व्याख्या...

कैसे करें लक...

कैसे करें लक्ष्मी...

चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें...

संपादक की पसंद

कैसे दें घर ...

कैसे दें घर को फेस्टिव...

कैसे दें घर को फेस्टिव लुक

घर पर भी सबक...

घर पर भी सबकुछ और...

‘जब से शादी हुई है सिर्फ लाइफ मैनेज करने में ही सारी...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription