कोरोना संक्रमण से बचाव

Neeraj Gupta

19th October 2020

अपने बाल्यकाल में जब हम अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों के सानिध्य में बैठते थे, तब कई बार उन्हें एक महामारी के विषय में बात करते सुना था कि जब वह फैलती थी तो गाँव-कस्बों में शवों के ढेर लग जाते थे और शेष जीवित बचे लोग उस स्थान को छोड़कर जल्द से जल्द दूसरे स्थान पर चले जाते थे I फिर यदि वहां भी इसका प्रकोप शुरू हो जाता तो वहां से कहीं और भागने की तैयारी करनी पड़ती थी I किसी प्रकार जब इस महामारी पर नियंत्रण पाया गया, तब जाकर लोगों ने चैन की सांस ली I परन्तु उस पीढ़ी के लोगों के मन में इसका खौफ कितने गहरे तक बैठा हुआ था, यह इस बात से पता चलता है कि इतना समय बीत जाने पर भी वे अपने मुहँ से उसका नाम तक लेने से डरते थे और हमारे बहुत आग्रह करने पर बड़ी मुश्किल से हमें बताया गया कि यह महामारी ‘प्लेग' थी I

यह सुनकर उस समय हमें लगता था कि यह तो गुज़रे ज़माने की बात है, अब तो विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली है कि कोई बीमारी अब मानव-जाति को इस प्रकार लाचार नहीं कर सकती I तब हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि आने वाले समय में हमें इससे भी अधिक भयावह स्थिति का सामना करना पड़ेगा, जब एक महामारी न केवल किसी एक गाँव-शहर या देश बल्कि सम्पूर्ण विश्व को एक साथ अपने चंगुल में जकड़ लेगी और इससे बचकर भागने के लिए भी कोई स्थान उपलब्ध नहीं रहेगा I

कोविड-19 अथवा कोरोना संक्रमण ऐसी ही महामारी है, जिसका हमने एक वर्ष पहले तक संभवतया नाम भी नहीं सुना होगा I यद्यपि इसके विषय में पिछले लगभग 6-7 महीनों में इतनी चर्चा हो चुकी है कि लगता है जो कुछ भी और कहा जाएगा, वह पिछले कहे-सुने या लिखे-पढ़े की पुनरावृत्ति ही होगा, परन्तु समस्या इतनी गंभीर है कि यदि बार-बार कहने से कुछ लोगों को भी इसकी विभीषिका से बचाया जा सके तो ऐसा प्रयत्न व्यर्थ नहीं कहलायेगा I इसी परिपेक्ष्य में लेखक द्वारा इसके विषय में अभी तक सामने आयी जानकारी के आधार पर कुछ मुख्य बातों को संकलित कर संक्षेप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है I 

इस महामारी के विषय में सटीक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं  

आज विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली है कि कैंसर जैसी कुछ बीमारियों को छोड़ दें (वह भी बढ़ी हुयी स्थिति में पहुँच जाने पर), तो अधिकतर बीमारियों का इलाज संभव है I यदि किसी बीमारी का पूर्ण निदान संभव न भी हो तो कम से कम मरीज के जीवन की अवधि को बढ़ाया तो जा ही सकता है I परन्तु इस कोरोना नामक बीमारी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये बिलकुल नयी होने के कारण न तो इसके उद्गम व प्रकृति और न ही इसके निदान के विषय में कोई सटीक जानकारी अभी तक उपलब्ध हो पायी है I इसका विषाणु सभी आयु-वर्ग, प्रजाति, आर्थिक-स्थिति, शारीरिक-सौष्ठव, राष्ट्रीयता, लिंग आदि के लोगों को अपना शिकार बना रहा है I बहुत से संस्थानों में इसपर गहन शोध कार्य चल रहा है I रोज़ समाचार मिलता है कि अमुक देश के अमुक संस्थान ने इसकी वैक्सीन विकसित कर ली है, परन्तु फिर मामला ठंडा पड़ जाता है I अलग-अलग अस्पत्तालों के डॉक्टर अपनी-अपनी व्यक्तिगत राय के अनुसार भी अलग-अलग तरह की दवाइयां देकर मरीजों को ठीक करने का प्रयास कर रहें हैं I कहने का तात्पर्य यह है कि अभीतक इसकी रोकथाम के लिए कोई कारगर औषधि खोजी नहीं जा सकी है I अतः इससे सावधानी पूर्वक बचाव ही फिलहाल एकमात्र उपाय है I

वायरस की प्रकृति के विषय में अभीतक उपलब्ध जानकारी का लाभ उठायें

  • वस्तुतः कीटाणु (बैक्टीरिया) सजीव होते हैं इसलिये उनको कीटाणुनाशक दवाओं (एंटीबायोटिक) से ख़त्म किया जा सकता है, लेकिन विषाणु (वायरस) जीवित प्राणी न होकर निर्जीव कण होते हैं, इसलिए इनपर एंटीबायोटिक दवाओं का कोई असर नहीं होता ।
  • कोरोना चूँकि एक वायरस है, अतः अन्य वायरस की भांति एक निर्जीव कण है, जिस पर चर्बी की सुरक्षा-परत चढ़ी हुई होती है । इसे कीटाणुनाशक दवाओं या अन्य किसी ऐसे उपाय के द्वारा ख़त्म नहीं किया जा सकता, बल्कि यह स्वयं ही कण-कण होकर समाप्त होता है । 
  • इसके विघटन की अवधि, इसके आसपास उपस्थित परिस्थितियों, जैसे गर्मी व नमी आदि पर निर्भर करती है । चूँकि यह वायरस बहुत निर्बल होता है, अतः 20 सेकंड या उससे अधिक देर तक साबुन/डिटर्जेंट लगाकर हाथों को रगड़ने से इसकी चर्बी-युक्त सुरक्षा-परत फट जाती है और ये नष्ट हो जाता है । इसलिये अपने शरीर के खुले अंगों को बार-बार साबुन व पानी से धोना चाहिये, ख़ास तौर से उस वक़्त जब आप बाहर से घर में आए हों ।
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  • गर्मी चर्बी को जल्दी पिघला देती है, इसलिये कम से कम 250 तापमान तक गर्म (गुनगुने से थोड़ा तेज़) पानी से शरीर के अंगों और कपड़ों को धोना चाहिये । छींकते या खाँसते समय प्रयोग किये जाने वाले रुमाल को 250 या इससे अधिक गर्म पानी से धोना चाहिये । सब्ज़ियों को पकाने से पहले भी ऐसे ही पानी में डालकर धोना चाहिये।
  • 65% से ज़्यादा एल्कोहल की मात्रा वाला सैनीटाइजर इसपर चढ़ी सुरक्षा-परत को पिघला सकता है I अतः इस प्रकार के सैनीटाइजर का प्रयोग कर हाथ आदि साफ़ करने की सलाह दी जा रही है I
  • इसी प्रकार 20% ब्लीचिंग केमिकल युक्त पानी से भी इसकी सुरक्षा-परत तोड़ी जा सकती है, अतः इसका स्प्रे उन सभी जगहों पर करना चाहिये जहाँ-जहाँ हमारे हाथ लगते हैं I टीवी के रिमोट, लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन को भी ब्लीचिंग-युक्त पानी में भिगोकर निचोड़े  गये कपड़े से साफ़ करना चाहिये ।
  • एक अनुमान के अनुसार कोरोना वायरस हवा में व कपड़ों पर 3 घण्टे, तांबे पर 4 घण्टे, कार्डबोर्ड पर 24 घण्टे, अन्य धातुओं पर 42 घण्टे तथा प्लास्टिक पर 72 घण्टे तक शेष रहता है और उसके बाद ख़ुद-ब-ख़ुद विघटित हो जाता है । परन्तु इस दौरान यदि किसी मनुष्य ने उन संक्रमित चीज़ों को स्पर्श किया और अपने हाथों को अच्छी तरह धोये बिना नाक, आँख या मुंह को छू लिया, तो वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर एक्टिव हो जाएगा ।
  • कहते हैं कि कोरोना वायरस ठण्डक, अंधेरे और नमी (Moisture) वाली जगह पर ज़्यादा देर तक बना रहता है, जबकि सूखा, गर्म और रोशनी वाला वातावरण इसके शीघ्र नष्ट होने में सहायक होता है । इसलिये जबतक इसका प्रकोप है, AC व एयरकूलर का प्रयोग कम ही करें ।
  • सूरज की धूप में उपस्थित अल्ट्रावायलेट किरणें कोरोना वायरस को तेज़ी से विघटित कर देती हैं । इसीलिये चेहरे पर लगाए जाने वाले मास्क या रुमाल को अच्छे डिटर्जेंट से धोने और तेज़ धूप में सुखाने के बाद ही दोबारा प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है ।
  • जहांतक हमारी त्वचा से कोरोना वायरस शरीर में पहुँच सकने का प्रश्न है, तो स्वस्थ त्वचा से ऐसी सम्भावना सामने नहीं आयी है । परन्तु यदि त्वचा पर कहीं कट या घाव है, तो संक्रमण की संभावना हो सकती है ।
  • यह बीमारी विशेष रूप से उन लोगों को अधिक प्रभावित करती है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, जैसे वरिष्ठ नागरिक, मधुमेह, ह्रदय, दमा, गुर्दे आदि से ग्रस्त रोगी आदि I अतः इन लोगों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है I 

बचाव के लिए क्या करें

  • जहां तक हो सके, घर में रहें, बहुत आवश्यक होने पर ही बाहर निकलें I
  • सुबह की चाय में एक लौंग डाल कर पिएं
  • गले को गीला रखने के लिए गरम पानी, चाय-काफी आदि पीते रहें , जिससे कोरोना प्रवेश कर भी जाये तो श्वसन-तंत्र तक न पहुँच पाये ।
  • रोज एक घंटे की धूप लें I
  • सरसों का तेल नाक में लगाएं ।
  • घर में कपूर व गूगल जलाएं और लौंग डालकर धूनी दें ।
  • रात को हल्दी डाल कर एक कप दूध पिएं  ।
  • शाकाहारी व सात्विक भोजन ही करें I
  • फलों में संतरा ज्यादा से ज्यादा खाएं I
  • एक चम्मच चवनप्राश रोज़ खाएं  ।
  • आंवला किसी भी रूप में, चाहे अचार, मुरब्बा, चूर्ण इत्यादि खाएं ।
  • रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए तुलसी, गिलोय आदि आयुर्वैदिक औषधियों का सेवन नियमित रूप से करते रहेंI
  • नमक मिले गरम पानी से गरारे करें I
  • सोशल डिसटेनसिंग का पालन करें I

क्या न करें

  • खाली पेट न रहें, उपवास न करें I
  • रात को दही ना खायें I
  • बाहरी खाद्य सामग्री मशीनों द्वारा निर्मित व पैक होने पर ही प्रयोग करें I
  • अनावश्यक यात्राएं न करें I
  • विदेश यात्रा स्थगित रखें I
  • ब्यूटी-पार्लर व नाई की दूकान आदि पर न जाएँ I
  • बिना कारण किसी से मिलें-जुलें नहीं I
  • पार्क, सिनेमाहाल, मॉल, व्यस्त बाज़ारों व अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर न जाएँ I
  • जबतक अति आवश्यक न हो, शादी-विवाह व अन्य समारोहों में जाने से बचें I
  • मास्क लगाए बिना घर से बाहर न निकलें I
  • दरवाज़े का लॉक, घंटी का बटन, जूता-चप्पल, गाड़ी का हेंडल, चाबी, सब्ज़ी-फल, नोट व सिक्के आदि बाहरी वस्तुओं के संपर्क में आने के बाद आंख, कान, नाक, मुंह व जननांगों को ना छुएं । ऐसी वस्तुओं पर सैनीटाइजर का स्प्रे करके ही हाथ लगायें I
  • जिस व्यक्ति को खांसी-जुकाम या बुखार हो, उससे दूरी बना कर रखें I

बीमारी के लक्षण दिखने पर

यदि परिवार के किसी सदस्य में बुखार, नजला, खांसी, गले में खराश आदि लक्षण दिखाई दें तो सबसे पहले उसे घर में एक बिलकुल अलग स्थान पर शिफ्ट (क्वारंटाइन) कर दें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर उसका इलाज शुरू करायें I साथ ही स्टीमर में सादा पानी डाल कर दिन में कई बार सांस व मुहँ के माध्यम से भाप खींच कर नाक व गले की अंदर से अच्छी तरह से सिकाई करें I यदि बुखार ठीक न हो तो कोरोना टेस्ट करायें I चूँकि कोरोना के लक्षण वायरल बुखार से काफी मिलते हैं, अतः हो सकता है कि यह वायरल ही हो I अतः सावधानी अवश्य बरतें परन्तु अनावश्यक रूप से घबराहट का माहौल न बनाएं क्योंकि कई बार सांप के काट लेने पर उसके विष की बजाय भय से ही मौत हो जाती है I

दैवीय उपासना

नवरात्रों का पवित्र अवसर प्रारंभ हो चूका है, परन्तु इसबार यह पहले से भिन्न है I पहले हम दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए एक कथा के रूप में पढ़ते थे कि रक्तबीज नामक एक राक्षस था, जिसे मारने से उसके रक्त की हर बूंद से एक नया राक्षस पैदा हो जाता था I जब सारी सृष्टि उसके अत्याचारों से त्राहि-त्राहि कर उठी, तब माता भगवती ने महाकाली का रूप धारण कर उसका संहार किया और उसके आतंक से संसार को मुक्ति दिलाई I आज हम प्रकट रूप में देख रहे हैं कि कोरोना नामक विषाणु (जो रक्त-बीज का आधुनिक रूप ही है), इस सृष्टि को लील जाने को आतुर है I अतः जहां हम पूरी सावधानी बरत कर इस राक्षस को और अधिक शक्तिशाली होने से रोकें, वहीं देवी-दुर्गा से प्रार्थना करें कि वो इस राक्षस से न केवल हमारी, हमारे बंधू बांधवों व हमारे देशवासियों की, वरन सम्पूर्ण मानव-जाति की भी रक्षा करें I इसके लिए अपनी नियमित पूजा के अतिरिक्त निम्न मन्त्रों का पाठ करें -                                                                                                          ॐ           

देवी प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोअखिलस्य I प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवी चराचरस्य II

सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके I शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते II

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे I सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोस्तु ते II

सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते I भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते II

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान सकलानभीष्टान I

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणाम त्वामाश्रिता हाश्रयताम प्रयान्ति II

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि I एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम II

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