मां दुर्गा के अस्त्र-शस्त्र

गृहलक्ष्मी टीम

19th October 2020

दुर्गा विभिन्न देवी-देवताओं के शक्ति समर्थन से महान बनी हैं। इस आद्याशक्ति को शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक, वरुण ने शंख, अग्नि ने शक्ति, वायु ने धजुष बाण, इन्द्र जे वज्र और यमराज ने गदा देकर अजेय बनाया। दूसरे देवताओं ने मां दुर्गा को उपहार स्वरूप हर चूडामणि, कूंडल, कंगन, नुपूर, कण्ठहार आदि तमाम आभूषण दिए।

मां दुर्गा के अस्त्र-शस्त्र

जिस काम को और कोई संपन्न नहीं करता, उसे सर्वशक्ति संपन्न देवी दुर्गा कर सकती है। शक्ति की अधिष्ठात्री देवी की संरचना तमाम देवी-देवताओं की संचित शक्ति के द्वारा हुई है। जिस तरह तमाम  नदियों के संचित जल से समुद्र बनता है, उसी तरह भगवती दुर्गा विभिन्न देवी-देवताओं के शक्ति समर्थन से महान बनी हैं। इस आ्याशक्ति को शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, वरुण ने शंख, अग्नि ने शक्ति, वायु ने धनुष बाण, इन्द्र ने वज़ और यमराज ने गदा देकर अजेय बनाया। दूसरे देवताओं ने मां दुर्गा को उपहार स्वरूप हार चूड़ामणि, कुंडल, कंगन, नुपूर, कण्ठहार आदि तमाम आभूषण दिए। हिमालय ने विभिन्न रत्र और वाहन के रूप में सिंह भेंट किया।

1. शंख- दुर्गा मां के हाथ में शंख प्रणव का या रहस्यवादी शब्द 'ओम' का प्रतीक है जो स्वयं भगवान को उनके हाथों में ध्वनि के रूप में होने का संकेत करता है।

2. धनुष-बाण- धनुष बाण ऊर्जा का प्रतिनिधित्त्व करते हैं दुर्गा मां के एक ही हाथ में इन दोनों का होना इस बात का संकेत है कि मां ने ऊर्जा के सभी पहलुओं एवं गतिज क्षमता पर नियंत्रण प्रात किया हुआ है।

3. बिजली और वज्र- ये दोनों दृढ़ता के प्रतीक हैं। और दुर्गा मां के भक्तों को भी वज्ज की भांति दृढ़ होना चाहिए जैसे बिजली और वज्र जिस भी वस्तु को छुती है उसे ही नष्ट एवं ध्वस्त कर देती है अपने को बिना क्षति पहुंचाए। इसी तरह माता के भक्तों को भी अपने पर विश्वास करके किसी भी कार्य, कठिन से कठिन कार्य पर खुद को क्षति पहुंचाए बिना करना चाहिए।

4. कमल के फूल- माता के हाथ में जो कमल का फूल है वह पूर्ण रूप से खिला हुआ नहीं है इससे तात्पर्य है कि कमल सफलता का प्रतीक तो है परन्तु सफलता निश्चित नहीं है। कमल को संस्कृत में 'पंकजÓ कहा जाता है। अर्थात्‌ कीचड़ से या में पैदा होने वाला। इस प्रकार लोभ, वासना और लालच के इस संसार में कीचड़ के बीच भक्तों की आध्यात्मिक गुणवत्ता के सतत्‌ विकास के लिए खड़ा है कमल।

5. सुदर्शन चक्र- सुदर्शन चक्र जो दुर्गा मां की तर्जनी के चारों ओर घूम रहा है। बिना उनकी अंगुली को छुए हुए यह प्रतीक है इस बात का कि पूरा संसार मां दुर्गा की इच्छा के अधीन है और उन्हीं के आदेश पर चल रहा है। माता इस तरह के अमोघ अस्त्र- शस्त्र इसलिए प्रयोग करती हैं ताकि दुनिया से अधर्म, बुराई और दुष्ज्जें का नाश हो सके और सभी समान रूप से खुशहाली से जी सके।

6. तलवार- तलवार जो दुर्गा मां ने अपने हाथों में पकड़ी हुई है वह ज्ञान की प्रतीक है वह ज्ञान जो तलवार की धार की तरह तेज एवं पूर्ण हो। वह ज्ञान जो सभी शंकाओं से मुक्त हो तलवार की चमक का प्रतीक माना जाता है।

7. त्रिशूल- मां दुर्गा का त्रिशुल अपने आप में तीन गुण समाए हुए हैं। यह सत्व, रजस एवं तमस गुणों का प्रतीक है। और वह अपने त्रिशुल से तीनों दुखों का निवारण करती हैं चाहे वह शारीरिक हो, चाहे मानसिक हो या फिर चाहे आध्यात्मिक हो।

देवी मां दुर्गा शेर पर एक निडर मुद्रा में बैठी हैं जिसे अभयमुद्रा कहा जाता है जो संकेत है डर से स्वतंत्रता का। जगत की मां दुर्गा अपने सभी भक्तों को बस इतना ही कहती हैं, अपने सभी अच्छे-बुरे कार्यों एवं कर्त्तव्यों को मुझ पर छोड़ दो और मुक्त हो जाओ अपने डर से अपने भय से।

दुर्गा के 108 नाम

वेद पुराणों के अनुसार, दुर्गा माता की शक्ति के असंख्य स्वरूप हैं क्योंकि यह ब्रह्म व पकृति स्वरूप हैं। जिस प्रकार ब्रह्म, विष्णु, महेश, रजो, सतो, तमो गुण प्रधान है। उसी प्रकार माता शक्ति में तीनों गुण प्रधान है, महाकाली रौद्र, महालक्ष्मी सतो और महासरस्वती रजो गुण प्रधान है। महाकाली दुष्टों का संहार करती हैं, महालक्ष्मी संसार का पालन-पोषण और महासरस्वती जगत की उत्त्पत्ति व ज्ञान का संचार करती हैं। भारत वर्ष में तकरीबन शत प्रतिशत लोग मां दुर्गा पर अटूट विश्वास रखते हैं और मां को उनके 108 नामावली में से किसी एक नाम से चुनकर उसका विधिपूर्वक पूजन करते हैं।

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

जानिए मां दु...

जानिए मां दुर्गा को यह दिव्यास्त्र कहां से...

दुर्गा शब्द ...

दुर्गा शब्द का अर्थ

दुर्गा के नौ...

दुर्गा के नौ रूप है नवरात्र

शक्ति एवं आस...

शक्ति एवं आस्था की प्रतीक लक्ष्मी

पोल

आपको कैसी लिपस्टिक पसंद है

वोट करने क लिए धन्यवाद

मैट

जैल

गृहलक्ष्मी गपशप

समृद्धिदायक ...

समृद्धिदायक लक्ष्मी...

यू तो लक्ष्मी साधना के हजारों स्वरूपों की व्याख्या...

कैसे करें लक...

कैसे करें लक्ष्मी...

चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें...

संपादक की पसंद

कैसे दें घर ...

कैसे दें घर को फेस्टिव...

कैसे दें घर को फेस्टिव लुक

घर पर भी सबक...

घर पर भी सबकुछ और...

‘जब से शादी हुई है सिर्फ लाइफ मैनेज करने में ही सारी...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription