डेरी उत्पाद भी नुकसानदायक हो सकते हैं-एग्जिमा में

मोनिका अग्रवाल

19th October 2020

त्वचा को कई संक्रमणों का सामना करना पड़ता है और उसी में से एक है एक्ज़िमा.

डेरी उत्पाद भी नुकसानदायक हो सकते हैं-एग्जिमा में

त्वचा संक्रमण-एक्ज़िमा

त्वचा को कई संक्रमणों का सामना करना पड़ता है और उसी में से एक है एग्जिमा.इस शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है"उबल जाना".यह एक ऐसा विकार है जो पूरे विश्व में लगभग सभी को प्रभावित करता है.

बरसों पहले मैं भी इस रोग से ग्रस्त हुई थी. उन दिनो मै मुम्बई में कालेज कर रही थी.नया शहर नए लोग.सब कुछ दिल्ली से अलग था.मन लगाना मुश्किल था.फिर भी पूरी कोशिश कर रही थी. एक दिन सुबह कालेज के लिए तैयार हो रही थी कि मैंने अपने पूरे शरीर पर लाल चकत्ते देखे.अपनी रूममेट से बात की तो उसने दिलासा दिया,"शायद किसी चीज़ की एलर्जी है".

त्वचा संक्रमण-एक्ज़िमा

धीरे धीरे खुजली बढ़ती गयीं.जितना खुजाती उतना ही लाल चकत्ते और फुंसियाँ बढ़ती जातीं,कभी कभार सफ़ेद प्लाक सा बन जाता.ज़्यादा खुजाने से ख़ून भी निकल आता था.कुछ ने मुझे न खुजाने की सलाह दी कुछ ने तौलिया रख कर खुजलाने के लिए कहा.एक तो परिवार  से इतना दूर दूसरे ये परेशानी. जो कोई जैसी सलाह देता,मैं मान लेती थी.मुझे लगता मै डिप्रेशन की शिकार होती जा रही हूँ.मन हर समय परेशान रहता.मैंने कारण पता लगाने की कोशिश की लेकिन कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.

बेहद तकलीफ़देह स्तिथि थी.कुछ लोगों ने नारियल के तेल में कपूर मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाने की सलाह दी,किसी ने शहद लगाकर त्वचा को आधे घंटे के लिए खुला रखने के लिए कहा.साथ ही यह भी बताया कि शहद में एंटी-इंफ़्लेमेटोरी गुण होते हैं.मैंने त्वचा पर ताज़े एलोवेरा के पत्तों का पेस्ट लगाकर भी दो तीन घंटों के लिए छोड़ दिया.अलसी के बीज पीस कर उसमें नीबू का रस मिलाकर पूरे शरीर पर लगाया,हल्दी का पेस्ट भी लगाया,नीम के पानी से स्नान किया.लेकिन किसी भी उपाय इस त्वचा रोग से छुटकारा तो दूर राहत तक महसूस नहीं हुई.

समय के साथ साथ गला ख़राब होने और छाती में कनज़ेशन की समस्या भी शुरू हो गयी. मैं,एक शब्द बोल नही पाती थी. आख़िर एक दिन मैं,अपनी इसी रूममेट के साथ ,एक त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलने गई.सारे टेस्ट हुए.रिपोर्ट देखते ही डॉक्टर ने मुझे बताया कि मैं "एग्जिमा" से ग्रस्त हूँ.और फिर शुरू हुआ इलाज का लम्बा सिलसिला .खानपान में रोक,कुछ खाने की दवाईयां,कुछ लगाने की दवाईयां, जिनमे कोरटीज़ोन भी शामिल थीं. एंटीहिस्टमीन के इंजेक्शन लगे पर हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ.

इत्तफ़ाक़न,उन्हीं दिनो, दो महीने की ट्रेनिंग पर बैंगलोर जाना पड़ा.मेरी ख़ुशक़िस्मती से , गेस्ट हाउस में मुझे एक सज्जन डाक्टर मिले.कुछ ही दिनों में उनसे ख़ासी दोस्ती भी हो गयी.मैंने उनसे अपनी समस्या का ख़ुलासा किया तो उन्होने मुझे सबसे पहले दूध और दूध से बने उत्पादों से परहेज़ करने की सलाह दी. दूसरी वीगन डायट,यानी पूर्ण रूप से शाकाहार,गन्ना का जूस न पीने की,और साबुत अनाज खाने की सलाह दी,मुझे हैरानी हुई कि,धीरे धीरे मेरी एग्जिमा के परेशानी में सुधार होता चला गया,और मैं पूरी तरह से ठीक हो गयी. अब हँसी आती है,जब लोग मुझे कहते हैं कि "मेरी त्वचा कितनी ख़ूबसूरत है".

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स्वयं की ओर ध्यान देना जरूरी है

 

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