यूं भरिए बेटी में आत्मविश्वास

मोनिका अग्रवाल

23rd October 2020

समाजिक कुरीतियों और असमाजिक तत्वों का डर आपका , लेकिन इससे बेटी का पूरा जीवन प्रभावित होता है। उसे अहसास कराइए कि आप उसके साथ हैं।

यूं भरिए बेटी में आत्मविश्वास

यूं भरिए बेटी में आत्मविश्वास

महिला शसक्तीकरण कोई नया विषय नहीं है। तमाम समाज सेवियों ने महिलाओं की दैनीय स्थिति को सुधारने की कई कोशिशें भी करी। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की जड़ें बहुत गहरी हैं, इन्हें हिलाना आसान नहीं है। समाज भी तभी आवाज उठाता है जब बात हद से आगे हो चुकी हो और उसने समाज के रोंगटे खड़े कर दिए हों। लेकिन छोटी छोटी बातों को नजरअंदाज करते हुए बात यहां तक पहुंचने का इंतजार भी यही समाज करता है। महिलाओं के विश्वास को तोड़ने वाली परिस्थितियां कदम दर कदम बनती जाती हैं। इससे उबरने के लिए आप कितने समाज सेवियों का मुंह ताकेंगे? छोटे छोटे प्रयास भी एक महिला को सशक्त बना सकते हंै। सिर्फ अपनी बेटी की जिम्मेदारी उठाने भर से भी ये संभव है। जरूरत है तो बस उसमे आत्मविश्वास का संचार करने की। 

खुद से प्रेम करना सिखाएं

लड़कियों को आइने से बहुत प्यार होता है। उनके इस प्रेम के आड़े मत आइए। इस सहारे वो अपने शरीर से प्यार करने लगती हैं। ऐसे में वो जैसी हैं खुद को वैसा ही स्वीकारना सीखती हैं। बॉडी शेमिंग महिलाओं के आत्मविश्वास को तोड़ देती है। खुद से प्रेम करना सीखेंगी तो बॉडी शेमिंग का भाव नहीं आ पाएगा। साथ ही आप भी ध्यान रखें कि बेटी के सामने उसके रंग और रूप कि चिंता न जताएं।

दें बाहर निकलने की आजादी

कितना बोलती हो? कहां जाना है? छज्जे में क्यों खड़ी होती हो? देर तक बाहर क्यों? बड़े परिचित से सवाल हैं जो अक्सर सिर्फ महिलाओं से ही किए जाते हैं। ये करके आप उन्हें सिर्फ डरना सिखाते हैं। बाहर निकलना, लोगों से बात करने की कला उन्हें शुरू से सिखाने की जरूरत है। माना कि बाहरी कारणों से आपको अपनी बेटी की सबसे ज्यादा चिंता होती है, ऐसे में आप उनपर दूसरे तरीके से नजर रख सकते हैं।

जिम्मेदारी डालें

बाहर के कामों के लिए ज्यादातर बेटों को आगे किया जाता है। बेटियों से ऐसे काम मजबूरी पड़ने पर ही लिए जाते हैं। लेकिन आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आपको ये फर्क करना बंद करना होगा। बैंक जाना, बिल जमा करना, घर के सदस्य को क्लीनिक ले जाना जैसे काम आपको शुरू से ही बेटी से भी करवाने चाहिए।

आत्मरक्षा सिखाएं

बेटी होते ही माता पिता में एक डर घर कर जाता है। वो डर है समाजिक कुरीतियों और असमाजिक तत्वों का। डर है आपका लेकिन इससे बेटी का पूरा जीवन प्रभावित होता है। उसे अहसास कराइए कि आप उसके साथ हैं। असमाजिक तत्वों से निपटने के लिए तैयारी की जरूरत है। बेटी को आत्मरक्षा के गुर देने की जरूरत है। तभी एक सशक्त महिला तैयार हो सकती है।

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