साझा कदमों से निभेगी परवरिश की जिम्मेदारी

मोनिका अग्रवाल

27th October 2020

परवरिश में भी अपने पार्टनर के साथ बेहतरीन तालमेल बिढ़ाना होगा।

साझा कदमों से निभेगी परवरिश की जिम्मेदारी

वो कहते हैं न बच्चों को पालना बच्चों का खेल नहीं। इस जिम्मेदारी को पूरा करने लिए जरूरत होती है बेहतरीन नियोजन और बेजोड़ समन्वय की ताकि बच्चों को पालना खेल सा लगे किसी बोझ सा नहीं। जैसे किसी काम या जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए साझा प्रयास उसकी सफलता की गारंटी होते हैं वैसे ही यह फार्मूला पेरेटिंग पर भी लागू होता है। लिहाजा, आपको अपने लाडले की परवरिश में भी अपने पार्टनर के साथ बेहतरीन तालमेल बिढ़ाना होगा। खासतौर, पर तब जब दोनों ही वर्किंग हों। आपके इस ओर सकारात्मक प्रयास न सिर्फ बच्चे को एक अच्छी परवरिश देंगे बल्कि आपको भी संतोषभाव से भर देंगे।  

दिन करें विभाजित 

जब माता-पिता दोनों ही वर्किंग होते हैं तो सम्भव है कि वह दोनों ही एक साथ व्यस्त हों। बच्चों के मामले में कई बार ऐसी स्थितियां बन जाती हैं जब बच्चे को अभिभावक की आवश्यकता हो। ऐसी स्थिति में दोनों का या व्यक्ति विशेष का काम से समय निकाल पाना कठिन हो सकता है। ऐसी परिस्थिति आपके सामने चुनौती बनकर न खड़ी हो पाए इसके लिए बेहतर होगा कि आप हफ्ते में अपनी-अपनी सुविधानुसार दिन तय कर लें और दिन विशेष पर आपात स्थिति आने पर वह व्यक्ति स्थिति को नियंत्रित करे।   

घर के कामों को भी लें बांट 

घर में बच्चे की आमद के बाद काम में बढ़ोत्तरी होना लाजमी है। जिसके चलते घर, ऑफिस और बच्चे को व्यक्ति विशेष द्वारा  सम्भालना थोड़ा मुश्किल सा नजर आने लग जाता है। काम के भार को कम करने के लिए अपनी-अपनी कार्यक्षमता और दक्षता को ध्यान में रखते हुए काम का बंटवारा बेहतर विकल्प है। 

करें वरीयता तय 

नन्हें कदमों के घर पर आने के बाद माता-पिता की पूरी जिंदगी बदल जाती है। ऐसे में दोनों के लिए जरूरी हो जाता है कि वह एक बार फिर से बच्चे को ध्यान में रखते हुए अपनी वरीयताओं को तय करें। ताकि समय और अर्थ दोनों का प्रबंधन हो सके। आपका ऐसा करना न सिर्फ आने वाली जिंदगी को आसान बनाता है बल्कि बच्चे की अच्छी परवरिश में भी सहयोगी होता है।   

पिता पर करें भरोसा 

भारत में अक्सर घर और बच्चे की जिम्मेदारी मां के कंधों पर ही होती है। नतीजा, पिता पर जिम्मेदारी आने या दिए जाने पर मां उस पर भरोसा नहीं कर पाती। उन्हें हर वक्त लगता है कि उनका पार्टनर बच्चे की जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पाएगा। ऐसे में जरूरी है कि पार्टनर एक दूसरे के विश्वास की कसौटी पर खरे उतरने का प्रयास करें और एक दूसरे पर भरोसा करें।

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