क्या आपकी बच्ची स्पेशल चाइल्ड है, बच्ची की महावारी, आपकी जिम्मेदारी

मोनिका अग्रवाल

30th October 2020

क्या आपकी बच्ची स्पेशल चाइल्ड है, बच्ची की महावारी, आपकी जिम्मेदारी

आपकी लाडली की बढ़ती उम्र उसे तमाम बदलावों से रूबरू कराती है। उन्हीं बदलावों में से एक है महावारी। यूं तो हर मां की खास जिम्मेदारी बनती है कि इस उम्र में वो अपनी बच्ची का सहारा बने और उसकी जिज्ञासाओं को शांत करें। लेकिन ये बात उन माताओं पर और भी बड़ी जिम्मेदारी के साथ लागू होती हैं जिनकी बच्ची आॅटिज्म से गुजर रही हो और अभी मानिसक रूप से इन परिस्थितियों के लिए तैयार न हो। ऐसी माताओं के भीतर भी एक अजीब सी कशमकश चल रही होती है। ऐसे में माताएं समझ नहीं पातीं कि इस परिस्थिति को किस तरह संभाला जाए। अगर आप ऐसी ही मां हैं तो ध्यान रखिए ये परिस्थिति आपके साथ ही बिटिया के लिए चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में आपको उसकी राहें आसान करने के लिए कुछ तरीकों को अपनाने की जरूरत पड़ेगी। 

पहले से रहें तैयार

आपकी बेटी भले ही मानसिक रूप से अभी बड़ी नहीं हुई हो लेकिन इसका ये बिलकुल मतलब नहीं है कि शरीर भी बड़ा नहीं होगा। उसका शरीर अपने समय के साथ वो सभी परिवर्तन करेगा जो एक सामान्य स्त्री में होते हैं। आपकी बेटी के किशोरावस्था के दस्तक देते ही आपको उसका और भी ध्यान रखने की जरूरत पड़ेगी इसलिए उसके 12 वर्ष के होते ही उसकी महावारी के लिए आप तैयार रहें। सामान्य तौर पर लड़कियों में शारीरिक बदलाव 7 से 14 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होते हैं। बदलाव शुरू होने के एक दो सालों में ही उसको महावारी हो सकती है। आम तौर पर 12 से 14 वर्ष की आयु में इसकी शुरुआत होती है लेकिन कुछ लड़कियों में 9 वर्ष की आयु में भी महावारी शुरू हो जाती है। उसके शारीरिक बदलावों में स्तनों का विकास, योनि से स्त्राव, गप्तांग और बगल में बाल आना शामिल है। 

तैयार करें किट 

आपको डर बना रह सकता है कि कहीं आपकी बच्ची को पहला पीरियड तब न हो जाए जब वह घर से दूर हो। आप डर को दूर भगाने के लिए एक पीरियड किट बना सकती हैं। जिसमें सन्ट्रीनैपकीन, एक साफ अंडर वियर, पेपर नैपकीन हो। और उस किट को बच्ची को हर दम अपने साथ रखने को कहें ताकि अचानक से जरूरत पडऩे पर वह उसका इस्तेमाल कर सके। साथ ही अपनी बच्ची के स्कूल में इसकी जानकारी भी दें जिससे ऐसी परिस्थिति आने पर उसकी मदद की जा सके। 

लें दवाइयों का सहारा

आपकी बच्ची सामान्य नहीं है जिसे समझाने भर से सभी समस्याएं समझ आ जाएंगी। लेकिन बच्ची को दर्द और मूड स्विंग जैसी समस्याएं सामान्य बच्ची की तरह ही होगी। ऐसे में आप उसे दर्द की दवा दे सकती हैं। साथ ही उसकी पीएमएस की परिस्थिति के लिए चिकित्सकीय परामर्श भी ले सकती हैं।

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