भाभी एक, ननदें कई...रिश्ते में रहेगी मिठास, अगर याद रखेंगी कुछ बातें खास

चयनिका निगम

1st November 2020

कई बार एक भाभी को कई सारी ननदों का साथ मिलता है। अक्सर इस रिश्ते को थोड़ा पेचीदा माना जाता है लेकिन असल में थोड़ी समझदारी के साथ सारी ननदों के साथ भाभी का रिश्ता अच्छा रह सकता है।

भाभी एक, ननदें कई...रिश्ते में रहेगी मिठास, अगर याद रखेंगी कुछ बातें खास
श्वेता की शादी अगले महीने है। पूरा घर किसी न किसी तैयारी में लगा है। कोई वेन्यू देख रहा तो कोई खाने का मामला सेट कर रहा। किसी को कपड़ों का काम दिया गया है तो कोई दुल्हन के मेकअप को लेकर बेस्ट वाला पार्लर चुनने में बिजी है। लेकिन इतनी सारी तैयारियों के बीच भी मन में एक तनाव है। तनाव इस बात का कि प्यारे से पति के साथ 5 ननदों का रिश्ता भी मिलेगा। इस रिश्ते को लेकर इतनी बातें सुनी हैं श्वेता ने कि शादी करने से ही उन्हें डर लग रहा है। उन्होंने कई लोगों से सुना है कि सेंसिटिव से इस रिश्ते को वैसे भी निभाना कठिन होता है। फिर यहां तो सेंसिटिविटी 5 गुना है। कैसे संभालेंगी वो 5 ननदों वाला ये रिश्ते? बस यही सोचते हुए उनका दिल घबराने लगता है। उनको समझ नहीं आता कि भाभी ननद के बीच अक्सर सुनाई देने वाले तनाव को कैसे हैंडल किया जाएगा? कैसे वो समझ पाएंगी कि ननद नाराज है या खुश। या किस बात पर कौन सी ननद नाराज हो गई, ये सारी बातें, उन्हें कहीं न कहीं परेशान किए हुए है। परिवार उनकी दिक्कत समझ रहा है। लेकिन श्वेता अकेली नहीं हैं ऐसी कई लड़कियां होती हैं, जो कई सारी ननदों की अकेली भाभी होती हैं। लेकिन ये जरूरी नहीं कि इस रिश्ते में सिर्फ परेशानी ही आए। थोड़ी सी समझदारी से इस रिश्ते के अच्छे साइड को भी देखा और महसूस किया जा सकता है। अकेली भाभी और कई ननदों वाली स्थिति को कैसे करें हैंडल, आइए जानें-
बन जाएं सहेली-
दोस्त बनकर रहना हर किसी रिश्ते के लिए अच्छा होता है। फिर चाहे माता-पिता के साथ वाला रिश्ता हो या पति-पत्नी का। दोस्ती हर रिश्ते की खूबसूरती बनाए रखती है। रिश्तों को उलझने नहीं देती है और गलतियों को माफ करने का साहस भी देती है। अब हो सकता है कि आप दोस्ती करना चाहें लेकिन सामने ननद बिलकुल सख्त व्यवहार करती हों। ऐसे में थोड़ी दिक्कत होगी लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। दरअसल सामने से दोस्ती वाला व्यवहार कोई भी करे, एक न एक दिन आप भी उससे वैसे ही व्यवहार किए बिना रह नहीं पाएंगे। ठीक ऐसा ही ही आपकी ननद के साथ भी हो सकता है। वो एक न एक दिन आपके व्यवहार के आगे अपना दिल हार ही जाएंगी। इसलिए वो इस रिश्ते को कैसे लेती हैं? ये न सोचिए, सोचिए ये कि आप रिश्ते में क्या बेहतर दे सकती हैं? इस बेहतरी के लिए ही आने व्यवहार में दोस्ती का रंग घोल लीजिए। बिगड़ता हुआ रिश्ता भी बन जाएगा। 
दुख-सुख में शामिल-
ननद और भाभी के बीच एक अनकही सी रेखा बना दी गई है। जो उन्हें कभी मिलकर रहने ही नहीं देती। जबकि व्यवहार में थोड़े से बदलाव आप दोनों को एक दूसरे के सुख दुख का साथी बना देती हैं। इसलिए किसी भी ननद के दुख को जरूर साझा कीजिए, किसी के भी दिल के करीब आने का ये सबसे बेहतरीन तरीका होता है। इसके लिए जरूरी होगा कि आप कुछ-कुछ दिन में सारी ननदों से बात जरूर करें। इस तरह से आपको उनके बारे में सबकुछ पता रहेगा। फिर आप उनके दुख दर्द में हमेशा शामिल रहेंगी। देखिएगा कि वो आपको खुद अपनी दिक्कतें और खुशियां बता दिया करेंगी। और आपका रिश्ता जरूर मजबूत होगा। 
ग्रुपिंग न करें-
हो सकता है कि आपकी सारी ननदों में कुछ के साथ आपके रिश्ते बहुत अच्छे हों और कुछ के साथ खराब हों। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उन कुछ के साथ बाकियों के खिलाफ आप ग्रुपिंग करने लगें। आप बाकी ननदों को अलग-थलग महसूस कराने लगें। इसको ऐसे समझिए कि आप अकेली भाभी हैं तो सारी ननदें आप से बनाकर रखना चाहेंगी। लेकिन आप कुछ के साथ ही रिश्ते बनाएंगी तो ये बात बाकी ननदों को गुस्सा तो दिलाएंगी ही, उन्हें ये बात दुखी भी कर सकती हैं। किसी को दुख पहुंचाकर आपको अच्छा तो नहीं लगेगा न। इसलिए अकेली भाभी हैं तो ग्रुपिंग से बचें। सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करें फिर चाहे सामने से आपको ऐसा व्यवहार मिले या नहीं। इसलिए ध्यान करके सबसे बराबरी का व्यवहार करने की कोशिश करें। 
पसंद जानिए-
किसी को भी ये बात अच्छी लगती है कि आप उसकी पसंद नापसंद का ख्याल रखें। ये बात आपकी ननदों को भी बहुत अच्छी लगेंगी। किसी खास मौके पर जैसे ननदों के जन्मदिन, उनके बच्चों के जन्मदिन या एनिवर्सरी जैसे मौकों पर ननदों को उनके और उनके परिवार की पसंद के सामान गिफ्ट में देंगी तो उन्हें ये बात बहुत अच्छी लगेगी। उनको निश्चित ही आप पर बहुत प्यार आएगा क्योंकि उन्हें लगेगा कि आप उनके बारे में खूब सोचती हैं। उन लोगों को आपका ये तरीका बेहद अच्छा लगेगा। कभी वो घर आएं तो भी उनकी इस पसंद नपसंद का ख्याल रखेंगी तो भी आपके रिश्ते को मजबूती मिलेगी ही। 
पति को रखें दूर-
भले ही सारी ननदें से आपका रिश्ता आपको पति की बदौलत मिला है। लेकिन कभी ननदों से दिक्कत हैं तो इस बात को पति तक ले जाने से बचें। उनको ननदों और अपने बीच न लाएं। ऐसा करने से पति और उनकी बहनों के बीच का रिश्ता खराब हो सकता है। उनसे आप राय ले सकती हैं। मगर इस हिदायत के साथ कि वो बीच में बिलकुल न बोलें। उनका बोलना वैसे भी आपकी बहनों को बुरा लग सकता है। जबकि वही बात सलीके से आप समझाएंगी तो उन्हें जरूर समझ आ जाएगा। यकीन मानिए आप और आपकी सारी ननदों के बीच रिश्ता भी अच्छा होगा। 

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