कैसे करें लक्ष्मी पूजन की तैयारी?

गृहलक्ष्मी टीम

2nd November 2020

धन की देवी मां लक्ष्मी के अनेक रूप संसार में प्रचलित हैं। इनका प्रत्येक स्वरूप भक्तों के लिए कल्याणकारी है। इनकी साधना व पूजा से भक्त को कई प्रकार की समृद्धि प्राह्रश्वत होती है। लक्ष्मी के किस स्वरूप की किस प्रकार से साधना की जाए कि आपका भाग्य ही बदल जाए? लेख से जानें-

कैसे करें लक्ष्मी पूजन की तैयारी?

चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मी जी गणेश जी की दाहिनी ओर रहें। पूजनकर्त्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें। कलश को लक्ष्मी जी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई दे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है। अब दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दायीं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अतिरिक्त एक दीपक गणेश जी के पास रखें।

मूर्तियों वाली चौकी के सामने एक छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां तीन लाइनों में बनायें। इसे आप चित्र (1) के चिह्न से देख सकते हैं। गणेश जी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। यह सोलह ढेरियां मातृका (2) की प्रतीक हैं। इन्हें आप चित्र में (2) के चिह्न से देख सकते हैं। नवग्रह व सोलह मातृका के बीच में स्वास्तिक (3) का चिह्न बनायें। इसके बीच में सुपारी (4) रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। सबसे ऊपर बीचोंबीच लिखें।

 

छोटी चौकी की व्यवस्था

लक्ष्मी जी की ओर श्री का चिह्न (5) बनाएं। गणेश जी की ओर त्रिशूल (6) बनायें व चावल की ढेरी (7) लगायें जो कि ब्रह्मïा जी का प्रतीक है। सबसे नीचे चावल की नौ ढेरियां बनायें (8) जो मातृका की प्रतीक है। इन सबके अतिरिक्त बही-खाता, कलम-दवात व सिक्कों की थैली भी रखें। उपरोक्त व्यवस्था को आसानी से समझने के लिए छोटी चौकी की व्यवस्था चित्र देखें।

पूजन की थालियों की व्यवस्था

छोटी चौकी के सामने तीन थाली व पानी का कलश रखें। थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें। पहली थाली में ग्यारह दीपक जलायें। दूसरी थाली में 1. खील, 2. बताशे, 3. मिठाई, 4. वस्त्र, 5. आभूषण, 6. चन्दन का लेप, 7. सिन्दूर कुमकुम, 8. सुपारी, 9. पान। अब तीसरी थाली में 1. फूल, 2. दूर्वा, 3. चावल, 4. लौंग, इलायची, केसर-कपूर, 5. हल्दी-चूने का लेप, 6. सुगंधित पदार्थ, 7. धूप, अगरबत्ती, 8. एक दीपक। उपरोक्त छोटी चौकी में तीनों थालियों की व्यवस्था को समझने के लिए थालियों की व्यवस्था चित्र पर ध्यान दें। 

चौकी (1) और चौकी (2)

1. लक्ष्मी, 2. गणेश, 3-4. मिट्टी के दो बड़े दीपक 5. कलश, जिस पर नारियल रखें, 6. नवग्रह, 7. षोड्शमातृकाएं, 8. कोई प्रतीक, 9. बही-खाता, 10.

कलम और दवात, 11. नकदी की संदूक, 12. थालियां (तीनों), 13. जल का पात्र, छोटी मटकी, 14. यजमान, 15. पुजारी, 16.  परिवार के सदस्य, 17. आगन्तुक। उपरोक्त दोनों चौकियों की व्यवस्था को आसानी से समझने के लिए सम्पूर्ण व्यवस्था चित्र को ध्यान से देखिए। इन थालियों के सामने यजमान बैठें। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाइंर् ओर बैठें। कोई आगन्तुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे। उपरोक्त छोटी-छोटी लेकिन काम की बातों पर आप पाठकों को अवश्य ही ध्यान देना चाहिए। दीपावली की रात्रि में समस्त सामग्री एकत्र कर लेनी चाहिए और उपरोक्त विधि अनुसार उनको स्थापित कर पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

दीपावली पूजन सामग्री

श्री फल-2 नग, गोला-1 नग, रोली-2 रु., सिंदूर-50 ग्राम, मौली-50 ग्राम, पान-5 नग, 1 पान लगा हुआ, सुपारी-11 नग, लौंग-2 रु., इलायची-5 रु., कपूर-2 रु., यज्ञोपवीत-2 नग, पीली सरसों-1 रु., गुलाब जल-10 मि.ली., गंगाजल-100 मि.ली., कपड़ा लाल-1 मीटर, स्त्री बेस श्रृंगार सहित, गेहूं-1

किग्राम., चावल-1 किग्राम., अष्टगंध-1 पुड़िया, सर्वोषधी1 रु., दूध-200 बूरा-250 ग्राम., रुई-2 रु., इत्र-1 शीशी, पंचमेवा-5 नग, सेब-2 नग, गन्ना-1 जोड़ा, गुलाब पुष्प-250 ग्राम, पुष्प माला-2 नग, दूर्वा, बिल्वपत्र, कमल पुष्प-2 नग, दीपक (मिट्टी के)-5 नग, माचिस-1 खुल्ले रुपए। ।।श्री गणेशाय नम:।। महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि। हरिप्रिये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं दयानिधे।। पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे। सर्वभूत हितार्थाय वसुसृधष्ट सदाकुरु।।

।।पूजनारंभ।।

कार्तिक मास की अमावस्या को शुभ मुहूर्त में घर अथवा कमरे के उत्तर पूर्व (ईशान) कोण में स्वच्छ व शुद्ध स्थान पर एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान श्री गणेश व मां महालक्ष्मी की मूर्तियां, चित्र व द्रव्यलक्ष्मी (सिक्के) की स्थापना करें। शुद्ध होकर

उत्तराभिमुख होकर आचमन, पवित्री धारण, मार्जन, प्राणायाम कर निम्न मंत्र पढ़ते हुए स्वयं व पूजा सामग्री के ऊपर जल छिड़कें- ú अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपि वा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याभ्यंतर: शुचि:।। इसके पश्चात आसन शुद्धि व स्वस्ति पाठ करते हुए गंगा जल, पुष्प, अक्षत, कुमकुम हाथ में लेकर पूजन का संकल्प लें। सर्वप्रथम वाम भाग में दीप प्रज्जवलित कर उसे पुष्प, कुमकुम, अक्षत से पूजित करें। सुपारी पर मौली लपेटकर गणेश अम्बिका स्वरूप बनाकर, हाथ में पुष्प, अक्षत, जल लेकर श्री गणेश जी का ध्यान व आह्वान निम्न मंत्र

से करें व पुष्प श्री गणेश पर छोड़ें। गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफल चारुभक्षणम। उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम।। मां भगवती के ध्यान व आह्वान हेतु हाथ में अक्षत, पुष्प व जल लेकर निम्न मंत्र सहित अर्पित करें- नमोदेव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्मृताम।। फिर कलश पूजन, नवग्रह पूजन व षोड्श मातृका पूजन हेतु कुमकुम, पुष्प व अक्षत क्रमानुसार निम्न मंत्रों द्वारा अर्पित करें-

श्री वरुण देवतायै नम:। श्री नवग्रह देवतायै नम:। श्री षोड्शमातृकाभ्यां नम:।।

तत्पश्चात् श्री गणेश व मां अंबिका का षोड्शोपचार पूजन करें-

ॐ देवस्य त्वा सवितु: प्रसवेअश्विनो: बाहुभ्यां पूषणो हस्ताभ्याम।

यजु: एतानि पाद्यार्घ्याचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि समर्पयामि।

।।श्री गणेशाम्बिकाभ्यां नम:।।

इसके पश्चात् दूध, दही, पंचामृत व जल से स्नान कराकर वस्त्र, आभूषण, चंदन, पुष्प, हल्दी, दूर्वा, माला, गंध, सिंदूर आदि क्रमानुसार अर्पित करें। धूप व दीप दर्शाते हुए नैवेद्य, लवंग, इलायची का समर्पण करें।

।।श्री महालक्ष्मी नम:।।

श्री महालक्ष्मी जी के ध्यान हेतु सर्वप्रथम हाथ में पुष्प लेकर महालक्ष्मी जी का ध्यान निम्न मंत्र से करें- या सा पद्मसनास्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी। गम्भीरावर्तनाभि स्तंनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया।। या लक्ष्मी: दिव्यरूपै: मणिगणखचितै: स्नापिता हेम कुंभै:। सा नित्यं पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमांगल्ययुक्ता।।

श्री महालक्ष्मी जी के आह्वान हेतु महालक्ष्मी जी को पुष्प चढ़ाकर उनका आह्वान करें- ú हिरण्यवर्ण्यां हरिणीं सुवर्णरजतरुाजाम। चंद्रां हिरण्यमयीं लक्ष्मी जातवेदो म आवह्।। अब एक-एक सामग्री अर्पित करते हुए मंत्र पढ़ें- अक्षत, पुष्प- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, आसनार्थे अक्षतान पुष्पान् समर्पयामि। चंदन, जल- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, पाद्यार्थे चंदनजलं समर्पयामि। गंगा जल- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, अर्घ्यार्थे अष्टगंध जलं समर्पयामि। गंगा जल- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, आचमनीयार्थे गंगा जलं समर्पयामि।

जल- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, स्नानार्थे गंगा जलं समर्पयामि। पंचामृत- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, पंचामृत स्नानं समर्पयामि। जल- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम: शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि। मौली- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, वस्त्रं समर्पयामि।

मौली- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, उपवस्त्रं समर्पयामि।

माला- ॐ श्री्री महालक्ष्म्यै नम:, आभूषणं समर्पयामि।

गंध- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, गंधं समर्पयामि।

चंदन- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, चंदनं समर्पयामि।

सिंदूर- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, सिंदूरं समर्पयामि।

कुमकुम- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, कुंकुम समर्पयामि।

अक्षत- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, अक्षतान् समर्पयामि।

पुष्प- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, पुष्पं समर्पयामि।

पुष्पमाला- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, पुष्पमाल्यं समर्पयामि।

दूर्वा- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, दूर्वादलं समर्पयामि।

इत्र- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम:, सुगंधि तैलं समर्पयामि।

तत्पश्चात् अंगपूजा हेतु हाथ में चंदन, अक्षत, पुष्प लेकर प्रत्येक मंत्र पश्चात थोड़ा-थोड़ा छोड़ते जाएं- ॐ चपलायै नम: पादौ पूजयामि, ॐ चंचलायै नम: जानुनी पूजयामि, ॐ  कमलायै नम: कटिं पूजयामि, ॐ कात्यायिन्यै नम: नाभिं पूज्यामि, ॐ जगन्मात्रै नम: जठरं पूजयामि, ॐ विश्वल्लभायै नम: वक्ष:स्थल पूजयामि, ॐ कमलवासिन्यै नम: भुजौ पूजयामि, ॐ  पद्मकमलायै नम: मुखं पूजयामि, ॐ कमल पत्रास्थै नम: नेत्रत्रयं पूजयामि, ॐ श्री यै नम: शिर: पूज्यामि। अब अष्टलक्ष्मी पूजन हेतु मंत्र पढ़ते हुए पुष्प व अक्षत प्रदान करते जाएं- ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम:। ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:। ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:। ॐ अमृतलक्ष्म्यै नम:। ॐ कामलक्ष्म्यै नम:। ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:। ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:। ॐ योगलक्ष्म्यै नम:। पुन: निम्न सामग्री अर्पित करते हुए मंत्र पढ़ें- धूप- ॐ श्री  महालक्ष्म्यै नम: धूपं आघ्रापयामि। दीप- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम: दीपं दर्शयामि। नैवेद्य- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम: नैवेद्य निवेदयामि, मध्येपानीयम् समर्पयामि। ऋतुफल- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम: ऋतुफलं समर्पयामि। ताम्बूल इत्यादि- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम: ताम्बूल वीटिकां समर्पयामि। दक्षिणा- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नम: द्रव्यदक्षिणां समर्पयामि। अंत में प्रदक्षिणा कर निम्न प्रार्थना कर लक्ष्मी जी की आरती करें- भवानीत्वं महालक्ष्मी: सर्वकामप्रदायिनी। सुपूजिता प्रसन्नास्थान्महालक्ष्म्यै नमोस्तुते।।

 

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