क्या प्रिय है लक्ष्मी जी को?

गृहलक्ष्मी टीम

3rd November 2020

क्या प्रिय है लक्ष्मी जी को

क्या प्रिय है लक्ष्मी जी को?
उल्लू 
जिस तरह पशुओं में गधे को मूर्खता का प्रतीक माना जाता है उसी तरह उल्लू को भी बुद्धिहीनता या बेवकूफी का पर्याय मान लिया गया है। वस्तुत: उल्लू का मूर्खता से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक शांत, एकांतप्रिय पक्षी है। इसकी खास विशेषता यह है कि इसके शरीर का तापमान वातावरण के साथ घटताबढ ़ता नहीं है। अत: शांत स्वभाव वाली महारानी लक्ष्मी जी ने इस समतापी पक्षी को वाहन कबूल किया। उनका यह कहना वास्तव में पक्षी उल्लू का प्रतीक नहीं बल्कि योगी का प्रतीक है। एक सच्चा आराधक-उपासक रात्रि में दो तीन बजे उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होने के बाद पूजा-आराधना प्रारंभ कर देता है, जिससे भगवान भास्कर के उदय होने तक वह पूजन प्रक्रिया पूर्ण कर ले। श्री विष्णु भगवान की परमप्रिय लक्ष्मी जब अपने पतिदेव के साथ किसी के यहां जाती हैं तब वह विष्णु भगवान की गोद में गरुड़ पर सवार रहती हैं। परंतु यदि कोई भगवान को छोड़कर अकेली लक्ष्मी का आह्वान करता है तब उनका वाहन दिन में न देख सकने वाला विनाश का प्रतिनिधि उल्लू होता है।

आप सब जानते हैं कि गरुड़ के दर्शन को सर्व साधारण समाज समस्त मंगल का मूल समझता है और उल्लू उजाड़ घर चाहने वाला मनहूस जानवर है। अत: जिस व्यक्ति के यहां जप, पूजापाठ, ईश्वर आराधना, देव-पितृ कर्म, दान-पुण्य और अतिथि सत्कार होता है वहां समझें कि लक्ष्मी अपने पतिदेव श्रीमन्नारायण सहित पधारी हैं और जहां अनाचार, पापाचार, व्यभिचार, दुराचार, अत्याचार और प्रमाद का बोलबाला हो, देश-जाति धर्म रक्षा के आवश्यक कार्यों को सामने देखते हुए भी आंखें बंद कर लेता हो, शराब-कबाब, वेश्यागमन और मुकदमेबाजी में रुपए का अपव्यय किया जा रहा हो, वहां जान लेना चाहिए कि लक्ष्मी जी अकेले ही अपने वाहन उल्लू पर तशरीफ लाई हैं।

कौड़ियां
आज हालांकि कौड़ी का मुद्रा के रूप में प्रचलन नहीं रहा लेकिन हमारी भाषा में, मुहावरों में, लोकोक्तियों में कौड़ी शब्द का उपयोग बहुत होता है। आज भी किसी को हिकारत से धिक्कारते हुए दो कौड़ी का सम्बोधन दिया जाता है।
कौड़ी हमारे धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक जीवन से इस कदर जुड़ी है कि कौड़ी उपासना की वस्तु है तो श्रंृगार की सामग्री भी, सजावट की वस्तु है तो मनोरंजन का साधन भी। इसका प्रयोग आभूषण एवं टोटकों के लिए भी होता है। संपदा की प्रतीक कौड़ियों को लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। समुद्र से उत्पन्न जितनी भी वस्तुएं होती हैं वे किसी न किसी रूप में लक्ष्मी पूजा में अथवा लक्ष्मी के प्रतीक के रूप में उपयोग की जाती हैं। शंख समुद्र से उत्पन्न होता है अत: इसे लक्ष्मी का भाई माना गया है। शंख की पूजा का विशेष विधान है। कौड़ी भी समुद्र से उत्पन्न होती है अत: इन्हें लक्ष्मी कारक माना गया है। कौड़ी के बहुत से प्रयोग हैं।
कौड़ी का संबंध शिव से भी जोड़ा गया है। शिव की बंधी जटाओं की शक्ल कौड़ी से बहुत मिलती-जुलती है। इसी कारण शिव को कपर्दिन कहा गया होगा। शिव के वाहन नंदी को आज भी कौड़ियों से खूब सजाया जाता है। शिव के 18 श्रंृगारों में कौड़ी भी सम्मिलित है।
कहते हैं गल्ले में, पैसों की अलमारी में, लॉकर आदि में कौड़ियों को केसर या हल्दी से रंगकर, पीले कपड़े में बांधकर रखने से लक्ष्मी आकर्षित होती हैं।

यह भी पढ़ें -नवरात्र व्रत की पूजन विधि

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