इन 10 कारणों से आहार में शामिल करें रागी या नाचनी रोटी, जानिए विधि

Sonal Sharma

6th November 2020

रागी / नाचनी एक ऐसा अनाज है जो कि पोषक तत्वों से भरपूर है। यह गेहूं से भी ज्यादा फायदेमंद है।

इन 10 कारणों से आहार में शामिल करें रागी या नाचनी रोटी, जानिए विधि

Ragi

आपने अब तक केवल गेहूं, बाजरे या ज्वार के आटे की रोटी ही खाई होगी, लेकिन रागी रोटी इनका हेल्दी वर्जन है। रागी या नाचनी कई पोषक तत्वों से भरपूर है। यह एक ऐसा अनाज है जिसे डाइट में शामिल करने पर सेहत को ढेरों फायदे होते हैं। इसे नाचनी या फिंगर मिलेट भी कहते हैं। गेहूं की तुलना में रागी का आटा ज्यादा स्वस्थ साबित होता है। रागी का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग रोटी/परांठा बनाने के लिए होता है। भारत में कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। वहां मोटी डबल रोटी, डोसा और रोटी बनती है। ये ग्‍लूटेन फ्री होने के साथ-साथ एंटीऑक्‍सीडेंट से भी भरपूर है। बड़ों ही नहीं बल्कि बच्‍चों के लिए भी यह सुपरफूड का काम करता है। प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन से भरपूर रागी की रोटी खाने में स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होती है।  यह कार्बोहाइड्रेट और फाइबर का सीधा स्त्रोत है। रागी मिलेट के रूप में या आटे के रूप में आसानी से बाजार में मिल जाता है। शरीर में ब्लडप्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों में रामबाण साबित होती है। हालांकि, रागी की अधिक खपत से बचा जाना चाहिए क्योंकि यह शरीर में ऑक्सालिक एसिड की मात्रा बढ़ा सकता है। इसलिए गुर्दे की पथरी और मूत्र पथरी वाले रोगियों के लिए यह उचित नहीं है।

कैल्शियम से भरपूर है रागी

रागी की तरह कैल्शियम की मात्रा किसी अन्य अनाज में नहीं है। हड्डियों के विकास और ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए कैल्शियम एक महत्वपूर्ण कारक है। रागी रोटी खाएं या फिर दलिया, यह कैल्शियम पिल्स को रिप्लेस कर सकता है। बढ़ते बच्चों के आहार में इसे शामिल करना एक अच्छा विचार है।

ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है

हाई पॉलीफेनोल और फाइबर कंटेंट इसमें एक और शानदार चीज़ होता है। डायबिटीज के रोगी रागी पर भरोसा कर सकते हैं और इसका नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं ताकि ग्लूकोज स्तर में संयमित निर्माण हो सके। नियमित रूप से रागी में शामिल आहारों को कम ग्लाइसेमिक रिस्पॉन्स के रूप में जाना जाता है।

एनीमिया से लड़ता है

रागी प्राकृतिक आयरन का एक उत्कृष्ट स्रोत है। एनीमिया और कम हीमोग्लोबिन के स्तर के रोगियों को एक घरेलू उपाय के रूप में रागी को अपने आहार में शामिल करना शुरू कर सकते हैं। विटामिन सी आयरन के अवशोषण में सहायता करने के लिए जाना जाता है।

वजन घटाने में मदद करता है

रागी या नाचनी में प्राकृतिक वसा की मात्रा अन्य सभी अनाजों की तुलना में कम होती है। इसके अलावा, यह वसा अपने असंतृप्त रूप में है। इस तरह,  यह वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए गेहूं और चावल का विकल्प है। इसमें ट्रिप्टोफैन नाम का एमिनो एसिड भी होता है जो भूख को कम करता है।

हाई फाइबर कंटेंट से भरपूर

फेद चावल की तुलना में, रागी या नाचनी में उच्च मात्रा में डाइटरी फाइबर होते हैं। इसके कारण, रागी पाचन में मदद करता है। यह  अधिक खाने से रोकता है और लंबे समय तक पेट को भरा हुआ महसूस कराता है। एमिनो एसिड लेसिथिम और मेथिओनिन लिवर में अतिरिक्त वसा से छुटकारा दिलाकर शरीर के कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। दूसरी ओर, थ्रेओनीन लिवर में वसा के गठन में बाधा डालता है और शरीर के कोलेस्ट्रॉल को समग्र रूप से कम करता है।

प्राकृतिक रूप से आराम दिलाता है रागी

रागी में अमीनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट की पर्याप्त मात्रा शरीर को प्राकृतिक रूप से आराम करने में मदद करती है। चिंता, अनिद्रा, सिरदर्द और अवसाद जैसी आम बीमारियों को रागी से जूझ सकते हैं। रागी के आराम का प्रभाव देने के लिए ट्रिप्टोफैन नामक अमीनो एसिड का बहुत बड़ा योगदान है।

कम करता है स्ट्रोक का जोखिम

रागी हाई ब्लड को रोकने में मदद कर सकता है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी विनियमित किया जा सकता है, जिससे प्लेक फॉर्मेशन और वाहिकाओं के रुकावट कम हो सकती है। परिणामस्वरूप हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का जोखिम काफी कम हो जाता है।

ग्लूटन फ्री

सीलिएक रोग से ग्रस्त लोग या ग्लूटन फ्री डाइट अपनाने वाले साथ लोग रोजाना अपनी डाइट में रागी को शामिल कर सकते हैं क्योंकि यह पूरी तरह से ग्लूटन फ्री है।

लैक्टेशन बढ़ाता है

स्तनपान कराने वाली माताओं को अपने आहार में रागी को शामिल करना चाहिए। यह दूध बढ़ाता है और मां और बच्चे दोनों के पोषण के लिए आवश्यक अमीनो एसिड, आयरन और कैल्शियम देता है। मां और बच्चे के पोषण के लिए इसे एक बेहतरीन आहार के रूप में जाना जाता है।

शानदार बेबी फूड

दक्षिणी भारत में, जहां रागी का व्यापक रूप से सेवन किया जाता है, 28 दिनों तक के बच्चों को उनके नामकरण के समय रागी दलिया खिलाया जाता है। यहां का यह बहुत महत्वपूर्ण अनाज है। ऐसा माना जाता है कि रागी बेहतर पाचन को बढ़ावा देती है। हाई कैल्शियम और आयरन कंटेंट हड्डी की वृद्धि और शिशु के समग्र विकास के लिए उपयोगी है।

रागी/नाचनी रोटी बनाने के लिए ये विधि अपनाएं और सेहत से भरपूर जीवन पाएं:

सामग्री

2 कप रागी/ नाचनी का आटा

1 प्याज, बारीक कटा हुआ

1 टीस्पून अदरक का पेस्ट

1 मिर्च, बारीक कटी हुई

3-4 करी पत्ते कटे हुए

5 टेबल स्पून चम्मच मेथी या मेथी के पत्ते, कटे हुए

2 टेबल स्पून धनिया बारीक कटा हुआ

1 टीस्पून जीरा

1 टीस्पून नमक

 ¾ कप गर्म पानी

तेल आवश्यतानुसार

विधि

  • सबसे पहले एक बड़े बोल में 2 कप रागी आटा लें।
  • प्याज, अदरक का पेस्ट, मिर्च, कुछ करी पत्ते, मेथी और धनिया मिलाएं। इसके अलावा जीरा, नमक डालें और अच्छी तरह मिलाएं। अब ¾ कप गर्म पानी डालें और अच्छी तरह मिलाएं।
  • 1 टीस्पून तेल डालें और एक मिनट के लिए गूंथे। चिकना और नरम आटा होना चाहिए।
  • 1 टीस्पून तेल से भारी तले के तवे को ग्रीस करें। बॉल के आकार का आटा लें। हाथों की मदद से इसे थोड़ी मोटी रोटी की तरह बनाएं।
  • मध्यम आंच पर तवे पर इस रोटी को रखें।
  • 1 टीस्पून तेल लगाकर दोनों साइड पका लें जब तक कि गोल्डन ब्राउन न हो जाए।
  • आखिर में रोटी को बटर और मसालेदार चटनी के साथ खाएं।

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