घर पर भी सबकुछ और ऑफिस में भी

चयनिका निगम

8th November 2020

अक्सर बहुओं के साथ ऐसा होता है कि वो घर और ऑफिस के बीच दिन भर झूलती हैं लेकिन खुश फिर भी कोई नहीं होता है। जबकि इसका आसान हल है।

घर पर भी सबकुछ और ऑफिस में भी
‘जब से शादी हुई है सिर्फ लाइफ मैनेज करने में ही सारी जिंदगी कट रही है। कभी घर का काम, कभी ऑफिस का काम, पूरा दिन इन्हीं सबमें कट जाता है। इसके बाद पता चलता है कि परिवार में कोई न कोई नाराज ही है। किसी के लिए कुछ नहीं कर पाई और किसी के लिए कुछ। मैं पूरे दिन थक जाती हूं लेकिन लोगों की इच्छाएं ही नहीं खत्म होती हैं। समझ नहीं आता कि अब करूं तो क्या' श्वेता अपनी जिंदगी के बारे में ऐसी बातें सोचने वाली अकेली महिला नहीं हैं। ज्यादातर वर्किंग महिलाओं का यही हाल है। पूरा दिन कुछ न कुछ करते रहने के बाद आखिर में पता चलता है कि परिवार में किसी का मुंह बना है क्योंकि उनके किसी काम में कोई कमी रह गई थी। या कहें कि जानबूझ कर कई बार कमी निकाली गई। मानो आपके 24 घंटों की मेहनत जीरो कर दी गई हो। लेकिन ऐसा न होता अगर पूरा परिवार महिलाओं के इस संघर्ष में उनके साथ खड़ा होता। मगर ऐसा बहुत कम होता है। ज्यादातर परिवारों की घर की महिलाओं से इतनी अपेक्षाएं होती हैं कि उन्हें किसी तरह की कोई रियायत दी ही नहीं जाती है। महिलाएं इसी वजह से किसी न किसी को खुश करने की जद्दोजहद ही करती रहती हैं। पर अगर कुछ स्मार्ट कदम उठाए जाएं तो महिलाएं खुशी-खुशी सबकुछ मैनेज कर सकती हैं, वो भी सबको खुश रखते हुए। मतलब आप जिंदगी के हर मोड़ पर संतुष्ट होंगी। क्या-क्या है ये कदम, जान लीजिए-
प्राथमिकता हों तय-
आप सबकुछ करना चाहती हैं, घर के काम,ऑफिस के काम और बच्चे। आपको सबकुछ पर्फेक्ट करना है वो भी बिना किसी गलती के। अब ऐसे में ये जरूरी है कि कुछ भी कभी भी कर लेने की जिद खत्म कर दी जाए। काम कितना जरूरी है, इसके आधार पर उन्हें करने की आदत डालें। जैसे रात में सोने से पहले आप खाली होती हैं तो ऑफिस के काम करने की बजाए बच्चों के साथ समय गुजारें। ठीक ऐसे ही खाना बनाने के समय सिर्फ खाना ही बनाएं। ‘ये कर लूं, फिर वो कर लूंगी' वाली सोच के साथ खाना कभी समय पर नहीं बन पाएगा और लोग नाराज रहेंगे। इसलिए हर पहर की क्या जरूरत है, वो देखिए। जैसे क्योंकि अभी घर से ऑफिस का काम कर रही होंगी तो इस वक्त शाम का समय ऑफिस के छूटे हुए काम निपटाने का है। 
पहले से योजना-
कभी भी काम समय पर करना हो तो पहले से की गई तैयारी काफी काम आती है। इसके लिए आपको आने वाले हफ्ते की योजना रविवार को ही बना लेनी होगी। इस तरह से कई सारे ऐसे काम आपकी योजना में शामिल हो जाएंगे, जो लंबे समय से हो नहीं पा रहे थे। इस तरह पूरे हफ्ते की प्राथमिकता भी तय हो जाती है। आपका पूरा हफ्ता आराम से गुजर जाएगा। इस प्लानिंग में आप छोटी डिटेलिंग भी कर सकती हैं, जैसे आज और कल रात के डिनर में क्या बनेगा। या सुबह जब समय बहुत कम होता है, तबके लिए भी प्लानिंग कर लीजिए। जैसे कितने बजे उठना और क्या नाश्ता बनना। कितने बजे बच्चों को क्लास के लिए उठाना और तैयार करना आदि। इस वक्त अगर आप ज्यादा से ज्यादा काम समय पर कर लेंगी तो पूरे दिन काम समय पर होता रहेगा। आप भी संतुष्ट रहेंगी, दूसरे भी। इस तरह से आपको सारे काम करने का कुछ समय अलग से भी मिल जाएगा। 
काम हो रिलैक्स-
अपने काम का समय आपको वो चुनना होगा, जो आपकी पूरी दिनचर्या के हिसाब मैच हो सके। इसके लिए आपको वो शिफ्ट चुननी होंगी, जो घर के काम के हिसाब से अच्छी हो। जैसे कई सारी महिलाएं सुबह की सबसे पहली शिफ्ट चुनती हैं। ताकि काम से जल्दी फ्री होकर बाकी दिन के काम समय पर निपटाए जा सकें। इसके लिए जरूरी होगा कि आप अपने परिवार की सुविधा देखते हुए समय का चुनाव करें। आपके काम की ओर से आप रिलैक्स होंगी तो घर के काम मैनेज करना आसान होगा। इसलिए पूरी कोशिश कीजिए कि ऑफिस के कामों की ओर से आपको किसी तरह का तनाव न हो। क्योंकि ऑफिस वाला तनाव बहुत मानसिक दबाव बनाता है और ये दबाव कई सारे काम खराब करता है। आप बाकी कामों को शांत मन से कर ही नहीं पाती हैं। 
सहयोग चाहिए-
ढेर सारे काम एक साथ करने हों तो किसी के सहयोग की जरूरत आपको जरूर पड़ेगी। इसलिए जरूरी है कि आप ऑफिस के साथ घर पर भी लोगों का सहयोग पाएं। ऐसे लोगों से बना कर रखें, जो आपको काम और घर दोनों में मदद कर सकते हैं। ऐसे लोग जब-जब अप कमजोर पड़ेंगी, आपकी मदद करेंगे। हो सकता है ऐसे लोग आपको बिलकुल पसंद न करते हों। अब ऐसी स्थिति में आपको अपनी छवि इन लोगों के सामने बदलनी होगी। छवि नहीं बदलेंगी तो ये लोग आपको सहयोग तो नहीं करेंगे बल्कि परेशान जरूर करेंगे। इसलिए ऐसे लोगों से बना कर रखें और दोस्ती होने के बाद उन्हें अपनी परेशानियां भी बताएं ताकि वो आपकी मदद के लिए खुद को तैयार कर पाएं। 
अनुभव से जानें-
देखिए आप अपने जैसी स्थिति वाली महिलाओं से बात भी कर सकती हैं। इस तरह से आपको रियल उदाहरण मिलेंगे। आप समझ पाएंगी कि किस कदम का क्या रिजल्ट हो सकता है। जैसे बहुत ज्यादा प्रोटेस्ट करने से मामला बिगड़ सकता है लेकिन बैठ कर अपनी बात कहने से बिगड़ी हुई बात भी संभल सकती है। या फिर काम और घर दोनों में ही परेशानी खड़ी करने वाले लोगों से दूरी बना लें या उन्हें एक बार में समझा दें। 

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