दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान जी के दर्शन कीजिए राजस्थान में

चयनिका निगम

10th November 2020

हनुमान जी के भक्तों के लिए उनके हर मंदिर की अपनी अलग अहमियत है। ऐसा ही एक अहम मंदिर है बालाजी हनुमान मंदिर, सालासर, राजस्थान।

दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान जी के दर्शन कीजिए राजस्थान में
भगवान हनुमान की कई मूर्तियां आपने देखी होंगी। लेकिन क्या कभी दाढ़ी-मूंछ वाले भगवान हनुमान देखें हैं? अगर नहीं तो आपको राजस्थान के बालाजी हनुमान मंदिर, सालासर आना होगा। इस मंदिर में अनोखी मूर्ति है, यहां भगवान हनुमान की दाढ़ी-मूंछों वाली अद्भुत मूर्ति है। इस मूर्ति की अपनी अलग ही महिमा है, कि इस मंदिर में भक्त खुद खिंचे चले आते हैं। ये मंदिर को भक्तों के बीच सालासर बालाजी के नाम से जाना जाता है। यहां आने वाले भक्त अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और एक न एक दिन उनकी इच्छा पूर्ण जरूर होती है। इस मंदिर से जुड़ी रोचक बातें आइए जानें-
खुद प्रकट हुए-
बालाजी इस जगह पर खुद प्रकट हुए थे और साल था 1811। दरअसल बालाजी ने अपने एक भक्त मोहनदास को मूर्ति रूप में आने का वचन दिया था और इस मूर्ति के साथ उन्होंने वो वचन पूरा किया। 
हल से टकराई थी मूर्ति-
आसोटा नाम की जगह पर एक खेत में इस मूर्ति का पता चला था। तब एक किसान खेत जोत रहा था कि उसके हल से कोई कठोर चीज टकराई। ये एक पत्थर था, जिसे पोंछने पर किसान को बालाजी हनुमान की छवि नजर आई। तब ही उसकी पत्नी बाजरे का चूरमा ले आई और उसका भोग भी मूर्ति पर लगा दिया। इसी वजह से मूर्ति को बाजरे के चूरमे का भोग लगाया जाता है।
मूर्ति पहुंची सालासर-
इस मूर्ति के प्रकट होने और फिर सालासर पहुंचने की भी एक कहानी है। जिस दिन ये मूर्ति प्रकट हुई थी, ठीक उसकी रात को आसोटा के ठाकुर को एक सपना आया। इस सपने में उन्होंने ठाकुर को सालासर में अपनी मूर्ति ले जाने को कहा। लेकिन मूर्ति ले जाने वाली बैलगाड़ी को कोई चलाए न बल्कि ये जहां रुक जाए, बस वहीं मूर्ति की स्थापना कर दी जाए। भक्तों ने किया भी ऐसा ही। उन्होंने वर्तमान जगह पर मूर्ति स्थापित कर दी। 
दाढ़ी मूंछ में क्यों-
इस मूर्ति की खासियत है इसमें बने दाढ़ी-मूंछ। इसके पीछे भी एक रोचक कहानी है। बालाजी ने अपने भक्त मोहन को जब दर्शन दिए तो उनके रूप में दाढ़ी-मूंछ भी थीं। फिर उन्होंने बालाजी से एक इच्छा जताई और कहा कि वो इसी रूप में प्रकट हों। बाद यही हुआ और आज सालासर के बालाजी अपने इसी रूप की वजह से खासे प्रसिद्ध और भक्तों के करीब हैं। 
अंजनी मां का आगमन-
इस मंदिर के करीब ही अंजनी मां का मंदिर भी है। माना जाता है कि बालाजी के कहने पर ही अंजनी मां इस यहां आईं। लेकिन उनका मानना था कि दोनों के एक ही मंदिर में होने पर किसकी पूजा पहले होगी? की समस्या हो सकती है। अंजनी मंदिर बालाजी मंदिर से थोड़ी दूर है, जिसमें अंजनी मां की गोद बालाजी बैठे हुए हैं। 

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