गवाही - गृहलक्ष्मी कहानियां

गृह लक्ष्मी टीम

25th November 2020

प्लीज यहां से जाओ, तुम कभी नहीं समझ सकती कि मैं तुमसे कितना प्यार करता था। तुम्हारे लिए मैं कुछ भी करता पर तुमने, तुमने तो कभी मेरी कोई बात ही नहीं सुनी, तुम कभी मुझे सुनना ही नहीं चाहती थीं

गवाही - गृहलक्ष्मी कहानियां

'सच-सच कहना... क्या तुमने सच में मुझसे प्यार किया था, उसने पूछा... वो लड़का चिल्लाया, 'उफ्फ... चली जाओ, मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है। मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो... मुझे अ$फसोस है जो कुछ भी मैंने तुम्हारे साथ किया उस लड़की की आवाज़ तेज हो गई।  'क्यों... मुझे देखो, तुम तो मुझसे प्रेम करते हो न?
तुम मेरी एक झलक पाने के लिए मीलों मेरा पीछा करते थे, मुझसे तुमको बहुत सारी बातें करनी थी, यही कहलाया था न तुमने कई लोगों के माध्यम से। करो मुझसे बातें, देखो मुझे और झांको मेरे उस चेहरे को गौर से जो तुम्हारे फेंके तेज़ाब से बिलकुल वैसा ही बन गया है जैसा घिनौना तुम्हारा प्रेम था।


'नहीं-नहीं... तुम... प्लीज यहां से जाओ, तुम कभी नहीं समझ सकती कि मैं तुमसे कितना प्यार करता था। तुम्हारे लिए मैं कुछ भी करता पर तुमने, तुमने तो कभी मेरी कोई बात ही नहीं सुनी, तुम कभी मुझे सुनना ही नहीं चाहती थीं, मैं अपनी बात कैसे कह पाता और फिर ज़ब मैंने तुमको, उस कमीने के साथ उसकी मोटर साइकिल पर देखा तो मेरे अंदर जो आग लगी मैं उसे बता नहीं सकता। फिर मैंने सोच लिया कि अगर तुम मेरी नहीं तो किसी और की भी न होने दूंगा और मैं कब और कैसे ये हरकत कर बैठा समझ ही नहीं पाया। हो सके तो मुझे मा$फ कर देना, हालांकि मेरा कृत्य माफी लायक नहीं, अब तुम प्लीज यहां से जाओ। ये जगह केवल अपराधियों के लिए है और हां, तुम्हारे बच जाने के लिए मैंने बहुत प्रार्थना की है। मुझे जब होश आया इस घटना के बाद तो मैं बहुत रोया और खुद को पुलिस के सुपुर्द कर दिया, क्योंकि जब तक मैं अपने किये की सजा नहीं भुगत लूं मुझे नींद नहीं आएगी। तुम जाओ, तुम जाओ।


वो लड़की बोली, 'जा रही हूं, मैं केवल तुमको तुम्हारा दिल और प्रेम दिखाने आयी थी, अस्पताल में मेरा एक महीना कैसे गुजरा मैं ही जानती हूं, और जिसे कमीना बोल रहे हो वो दीपक केवल मेरा मित्र था, पर इस एक महीने में उसका मेरे प्रति समर्पण और प्रेम देखकर मैं सच में उससे जुड़ गई और वो मुझसे इस बदसूरत चेहरे के साथ ही विवाह करने को तैयार है। सोचो, मेरे साथ तुम्हारा प्रेम। इस बदसूरत चेहरे के रूप में अपनी गंदगी की गवाही देगा। तुम मुझसे नहीं मेरे उस चेहरे से प्रेम करते थे जिसपे तेज़ाब डालकर तुमने खत्म कर दिया।
वो और तेज चीख उठा, 'चली जाओ, दुबारा कभी यहां मत आना.. हां, मेरा प्रेम गंदा था तभी तो मुझे शैतान बना दिया, जाओ ईश्वर तुम्हे दीपक के साथ खुश रखे।
'मिलने का समय खत्म हुआ।


एक तेज आवाज़ के साथ जमीन पर एक डंडा पटकते हुए हवलदार चिल्लाया !!

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

प्रायश्चित क...

प्रायश्चित का रास्ता

''मुक्ता''

''मुक्ता''

मैं हूं अश्व...

मैं हूं अश्वगंधा

सजा से मुक्त...

सजा से मुक्ति - गृहलक्ष्मी कहानियां

पोल

आपको कैसी लिपस्टिक पसंद है

वोट करने क लिए धन्यवाद

मैट

जैल

गृहलक्ष्मी गपशप

क्या है वो ख...

क्या है वो खास कारण...

क्या है वो खास कारण जिसकी वजह से ब्यूटी कांटेस्ट में...

ननद का हुआ ह...

ननद का हुआ है तलाक,...

आपसी मतभेद में तलाक हो जाना अब आम हो चुका है। कई बार...

संपादक की पसंद

दुर्लभ मगरगच...

दुर्लभ मगरगच्छ के...

रूस की लग्जरी गैजेटस कंपनी केवियर ने सबसे मंहगा हेडफोन...

शिशु की मालि...

शिशु की मालिश के...

बच्चे के जन्म के साथ ही अधिकांश माँए हर रोज शिशु को...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription