कंजूस बनिए, भविष्य सुरक्षित कीजिए

चयनिका निगम

26th November 2020

कंजूस शब्द अपने आप में अच्छा नहीं समझा जाता है लेकिन मंदी का ये दौर आपसे मांग कर रहा है कि अब आप कंजूस बनें और पैसों की बचत करें।

कंजूस बनिए, भविष्य सुरक्षित कीजिए
पिछले तकरीबन 10 महीने से चल रहे कोरोना काल ने देश की आर्थिक व्यवस्था को तोड़ कर रख दिया है। आपके जानने में भी कई लोग होंगे, जिन पर इस बात का खूब असर हुआ और उनके घर के हालात बदत्तर हुए। ढेरों लोगों की तो नौकरियां भी चली गईं। हो सकता है ऐसी बातें आपने अभी तक खबरों में ही सुनी हों। या किसी को इन सबका सामना करते देखा हो। आपके घर में इसका जरा भी असर नहीं हुआ तो अच्छी बात है। लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है कि आगे भी नहीं होगा। 
बल्कि समय के साथ आर्थिक हालात खराब होने की संभावना तो है ही। इसलिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा पैसे जोड़े जाएं। भविष्य के लिए इतनी बचत की जाए कि कमाई बहुत न हो तो भी पैसों की दिक्कत न हो। हमारे घर के खर्च आराम से चलते रहें। अगर अब आप भी ये सब करना चाहती हैं तो सबसे पहले कंजूस बन जाइए। कंजूस मतलब ऐसा कुछ कीजिए कि पैसे सिर्फ जरूरत के समय ही खर्च हों। जब तक चीज बहुत जरूरी न हो पैसे खर्च करने से बचें। 
आप वो सब करें, जो एक कंजूस करता है। उसकी जेब से पैसे निकालना ही बहुत बड़ा काम होता है। पर हां, कंजूसी भी ऐसी हो कि परिवार पर इसका बहुत असर न पड़े और न ही जरूरतों पर। फिर इसके बाद भी आप कंजूस बनें और पैसे बचा लें तो बात है। मगर ये होगा कैसे, जवाब हमारे पास है। आपको कंजूस बनाने और भविष्य को सुरक्षित करने के टिप्स हम दिए दे रहे हैं-

खाने की प्लानिंग-

आप कंजूस बनने की कोशिशें कर रही हैं। तो शुरुआत किचन से कीजिए। कभी भी किचन में पहुंच कर खाना बनाने लगने की आदत अच्छी नहीं है। इससे आपका फोकस सिर्फ खाने पर होता है और कम समय में जो भी काम जल्दी होता है आप वो कर लेती हैं। जबकि पहले से फ्रिज में रखे पुराने फूड आइटम का रियूज करने के लिए जरूरी है कि खाने की प्लानिंग थोड़ा पहले से की जाए। इस प्लानिंग का फायदा ये होगा कि आप पुराना खाना इस्तेमाल करेंगी और वो फिकेगा नहीं, जिसको खरीदने में आपके पैसे ही खर्चा हुए हैं। इसलिए अब से जब भी खाना बनाना हो इसकी प्लानिंग थोड़ा पहले कर लें और देख लें फ्रिज में पहले से क्या रखा है। या किस फूड आइटम का रीयूज हो सकता है। ऐसा करके आप सिर्फ खाने का भरपूर इस्तेमाल ही नहीं करती हैं बल्कि अपने पैसों की अहमियत भी समझती और पूरे परिवार को समझाती हैं। 
सिर्फ टूटा है, जुड़ जाएगा-
पहले जहां किसी चीज के टूटते ही उसे बदल कर नया ले लेने की ख़्वाहिश आप जता देती थीं, वहीं अब ऐसा करना सही नहीं है। ऐसा सिर्फ तब ही करिए जब नया खरीदने से ज्यादा खर्चा बनवाने पर हो रहा हो। जैसे बहुत साल पुराने गीजर को बनवाने में अगर 5000 से ज्यादा का खर्चा आ रहा है तो एक बार बाजार हो आइए, हो सकता है कुछ रुपए जोड़कर आपको नया गीजर मिल जाए। लेकिन इससे इतर अगर मामला है तो आपको पहले टूटी हुई चीज को जुड़वाने की कोशिश ही करनी चाहिए। आपको मंदी के इस दौर में अपने कंजूस वाले दिमाग से ये निर्णय लेना होगा। यकीन मानिए ये आपके पैसे बचाने और फालतू खर्चे से दूरी बनने में आपकी पूरी मदद करेगा। 
सुंदर दिखना है मेहनत कीजिए-
अभिनेता अक्षय कुमार दुनिया के कुछ अमीर लोगों में से एक हैं। लेकिन जब उनसे उनके खर्चे के लिए पूछिए तो वो खुद को ‘लो मेंटेनेंस' कह देते हैं। पैसे बचाने के लिए आपको भी ‘लो मेंटेनेंस' वाले खांचे में फिट बैठना होगा। आपको खुद का ख्याल रखने की प्रक्रिया पर भी पैसा बचाना होगा। खास तौर पर इस जाते हुए और नए आने वाले साल में तो यही होना चाहिए। इस साल में क्योंकि पैसा बचाना है इसलिए आपको पार्लर जाकर महंगे ट्रीटमेंट लेने से अच्छा है कि घर पर ही थोड़ी मेहनत करके खुद को सुंदर दिखाने की कोशिशें कीजिए। फिर भले ही सहेलियां आपको कंजूस कहें लेकिन आप पीछे न हटिएगा। 
दूसरों की तरह नहीं-
कई सारे लोग पैसे सिर्फ इसलिए खर्च करते हैं कि दूसरों ने ऐसा किया था। दूसरों ने ये काम किया है इसलिए हम भी करेंगे। पर याद रखिए औए समझिए कि कंजूस बनने की शुरुआत होती ही ऐसे है कि हमको हर चीज से पहले अपने पैसे देखने हैं। सबसे पहले पैसे खर्च होने से रोकने हैं। बस इस मकसद को दिल में बैठाने के बाद दूसरे क्या कर रहे, उसे देखना बंद ही कर दीजिए। ऐसा अभी और अगले साल तक तो आपको करना ही होगा। क्योंकि आर्थिक आफत कब आप पर गिरेगी कोई नहीं जानता। इसलिए इस वक्त कंजूस बनने की शुरुआत कीजिए और दूसरों को देखना बंद कर दीजिए। फिर चाहे दूसरे बाहर डिनर पर जाएं या नई कार खरीदें। आपको बस जरूरत पर खर्च करना है ये बात दिल में बैठा लीजिए। दूसरों की देखादेखी कुछ भी करना आपको कभी कंजूस नहीं बनने देगा। और आप भविष्य को लेकर सुरक्षित नहीं कर पाएंगी। 
पैसों की वैल्यू-
याद रखिए एक सिक्के से लेकर 2000 नोट तक हर एक पैसे की अपनी अलग अहमियत है और इसे कमाने के लिए आपने या आपके किसी अपने ने बहुत मेहनत की होगी। इस मेहनत और पैसे दोनों को ही जाया करने से पहले कई बार सोचिए तब ही पर्स से पैसे निकालिए, इन पैसों को किसी की मेहनत के तौर पर देखिए। इसके लिए आपको रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़े बदलाव करने होंगे। कह सकते हैं आपको कंजूस का तमगा अपने नाम करना होगा। हो सकता है कि लोगों की बातें भी सुननी पड़ें। लेकिन भविष्य को देखते हुए खुद को कंजूस कहलाने में बिलकुल भी गुरेज न करें। कुछ पर हम ध्यान दिलाए देते हैं, ये वो आदतें हैं, जिनसे आपके पैसे बचेंगे ही-
  • पहले बच्चों के साथ बाजार जाती थीं तो बच्चे की जिद पर 1 नहीं दो नहीं कई चॉकलेट दिला देती थीं। ताकि वो खुश हो जाए। लेकिन ऐसा मत कीजिए चॉकलेट कोई हेल्थी चीज तो है नहीं, मतलब बच्चे के स्वास्थ्य को इससे कोई फायदा बिलकुल नहीं होगा बल्कि नुकसान अलग से होगा। इसके साथ आपके पैसे एक तरह से बर्बाद ही हो जाएंगे। 
  • ऑनलाइन शॉपिंग के समय जरूरत के सामान के साथ कुछ और भी खरीद लेने की आदत भी बदल लीजिए। जब लगे कि अरे ये भी तो खरीदना था तब आप शॉपिंग एप बंद कर दें लेकिन जरूरत से इतर से कुछ न खरीदने का प्रण ले लें। 
  • सब्जियों के साथ अक्सर ऐसा होता है कि हफ्ते भर कि सब्जी ले तो लेते हैं लेकिन न बना पाने के चलते वो खराब हो जाती हैं। या फिर हम लेते ही ऐसी क्वालिटी हैं कि सब्जी बहुत जल्दी खराब हो जाती है। 
  • जरूरत और लक्जरी के बीच आपको अंतर भी समझना होगा। इस वक्त सिर्फ जरूरत पूरी करने की कोशिशें करें, ‘मैं तो सिर्फ ये वाला ब्रांड इस्तेमाल करती' वाली आदतें आपको छोड़नी होंगी। आपको छोड़ना होगा ‘हम तो ऐसे की चिंता किए बिना खर्चा करते वाला एटीट्यूड'। 
  • कहीं जाना नहीं है। इस बात का फायदा उठाएं, जेब पर इसकी समय की मार कम पड़ेगी। कहना ये है कि अभी फिलहाल आप बहुत जरूरत होने पर ही बाहर निकल रही हैं तो बहुत सारे खर्चे तो ऐसे ही बच जाते हैं। इन खर्चों को ऑनलाइन शॉपिंग करके ना बढ़ाएं। ऑनलाइन शॉपिंग एक सुविधा है, जिसका इस्तेमाल जरूरत के समय ही करें। 
  • सेल का चक्कर जेब पर अक्सर भारी पड़ता है। पर हमें लगता है कि सेल है तो इससे आपको फायदा हो रहा है। जबकि कई दफा सेल फायदा नहीं बल्कि सिर्फ झांसा बन जाती है। इसलिए आर्थिक मंदी के इस दौर में सेल पर ध्यान तब ही दें, जब आप सच में कुछ खरीदने वाली हों और इस वक्त भी सेल को परखें जरूर। कहीं सेल सिर्फ कहने भर के लिए तो नहीं है। 
सेविंग का पैमाना-
सेविंग का पैमाना आपने अभी तक जहां तक भी सेट किया था। अब उसे थोड़ा बढ़ा दीजिए। आपको अपनी जरूरतों वाले खर्चे में कमी लानी होगी। हो सकता है लोग आपको कंजूस कहने भी लगें। लेकिन आपको इसमें भटकना नहीं है बल्कि अपनी सेविंग को थोड़ा और बढ़ाना ही है। इसे 5 प्रतिशत ही बढ़ाइए लेकिन ऐसा कीजिए जरूर। इसका फायदा आपको लंबे समय में दिखेगा। आपको ध्यान रखना है कि मासिक इनकम में से सेविंग निकालने के बाद जो पैसे बचें सिर्फ उसी में आपको अपना काम चलाना है। इसके अलावा कहीं से कोई पैसे नहीं खर्चने हैं। इसका सीधा असर परिवार पर पड़ेगा लेकिन उन्हें भी समझाइए कि मंदी के इस दौर में ये क्यों जरूरी है? क्यों जरूरी है कि हम कंजूस बन जाएं। आपको एक बात और ध्यान रखनी होगी कि अपने पहले से जुड़े हुए धन में से भी आपको फिलहाल कुछ भी निकालने से बचना है। जब तक बहुत जरूरी न हो इन पैसों को छूने से भी बचिए। क्योंकि बचा हुआ निकाल लिया तो फिर कंजूस बनने की कोशिशें ही बेकार हो जाएंगी। फिर आपका नए सिरे से जोड़ने का क्या मतलब रह गया। 

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