संगीतज्ञ गधा : पंचतंत्र की कहानी

गृहलक्ष्मी टीम

26th November 2020

पुराने समय की बात है। एक धोबी के पास बूढ़ा और कमजोर गधा था लेकिन धोबी उस पर बहुत ज्यादा काड़ों का बोझ रख कर उन्हें धोने ले जाता था गधे का मालिक उसे भूखा रखता था इसलिए रात के समय गधा पास के ही खेतों में फसल खाने पहुंच जाता।

संगीतज्ञ गधा : पंचतंत्र की कहानी
एक दिन उसकी मुलाकात एक सियार से हुई। दोनों में मित्रता हुई और फिर वे दोनों मिल-जुलकर भोजन की खोज करने लगे। एक रात को उन्हें पके हुए खीरों से भरा खेत मिला। उन्होंने वहां जी भरकर खीरे खाये और निर्णय लिया कि वे रोज पके खीरों का स्वाद उठाने आया करेंगे। जल्दी ही गधा बहुत हष्ट-पुष्ट और स्वस्थ दिखाई देने लगा।

एक रात, रात्रि भोज के बाद गधा बेहद खुश था इसलिए उसने सियार से कहा, "मित्र, देखो आकाश में चन्द्रमा चमक रहा है। जिससे यह रात कितनी सुहावनी लग रही है। ऐसी रात में मुझे गाने की इच्छा हो रही है।"

लेकिन सियार ने कहा, "अरे मूर्ख मत बनो, अगर तुम गाना गाने लगे तो पास ही सोए हुए किसान जाग जाएगें, जो उठकर हमें मारेंगे।" लेकिन गधा कुछ सुनने के लिए राजी ना था इसलिए उसने कहा, "तुम्हें संगीत की समझ नहीं है मेरे मित्र आज तुम मेरे गीत सुनागे तब उसे समझ पाओगे" सियार ने उसे फिर से चेतावनी दी, "मूर्ख, अपना गर्दभ राग मत अलापना, मुझे पता है तुम्हारा स्वर मीठा नहीं है।"

लेकिन गधे ने सोचा कि सियार उससे ईर्ष्या कर रहा है। उसने कहा "तुम सोचते हो मैं मीठा नहीं गा सकता? तो आज तुम्हारा यह भ्रम मैं तोड़ दूंगा।" ऐसा कहा कर उसने आसमान की ओर अपना मुंह किया। गधे को गीत गाने के लिए तैयार होता देखा सियार ने कहा, "मित्र तुम्हें जितने गीत गाने हैं, तुम गाओ। मैं तुम्हारा बाहर इंतजार करता हूं ऐसा कहकर वह सरपट दौड़ गया।

उधर खेत से गधे को रेंकने की आवाज सुनकर किसान जग गया और डंडा लेकर उस ओर दौड़ा। गधा समीप आते खतरे से बेखबर रेंकने में मस्त था। क्रोधित किसान ने गधे को घर दबोचा और अच्छी धुनाई की। दर्द से चिल्लाता हुआ गधा नीचे गिर पड़ा। तब किसान ने उसे रस्सी से बांध कर छोड़ दिया ताकि अगली सुबह आकर उधर से उसकी खबर ले सके।

गधे ने किसी तरह खुद को बंधन मुक्त किया और उस जगह पर पहुंचा जहां सियार उसका इंतजार कर रहा था। गधा अपनी गलती पर पछतावा कर रहा था। और सियार की सलाह ना सुनने पर शर्मिन्दा था। शिक्षा समय पर अपने मित्रों की सलाह सुनना उचित होता है।

शिक्षाः समय पर अपने मित्रों की सलाह सुनना उचित होता है।

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