पांडव गुफा: पचमढ़ी की वो जगह, जहां पांडवों ने गुजारा था वनवास

चयनिका निगम

30th November 2020

मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जिसकी छोटी से छोटी जगह भी घूमने के मकसद से खास ही लगती है। ऐसी ही एक जगह है पचमढ़ी में बनीं पांडव गुफाएं।

पांडव गुफा: पचमढ़ी की वो जगह, जहां पांडवों ने गुजारा था वनवास
पांडव और उनका वनवास हमें सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। पांडव अपने वनवास के दौरान जहां-जहां गए, वहां-वहां उनसे जुड़ी कोई न कोई जगह है, जो आज देखा कर पौराणिक कथाओं पर विश्वास और पक्का हो जाता है। मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में बनीं पांडव गुफाएं ऐसी ही जगह है, जिसका नाता पांडवों के वनवास से है। माना जाता है कि पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ यहां करीब 12 साल रुके थे। उन्होंने यहां रहते हुए कई दिन काटे थे। इस पांडव गुफा को देखने अब पूरी दुनिया से लोग आते हैं। गुफा के ऊंचाई पर है, जहां नीचे सुंदर गार्डन बनाया गया है। इस बगीचे की सुंदरता और सुकून को देखते हुए अक्सर यात्री यहां विश्राम कर लेते हैं। इस गुफा से जुड़ी अनोखी बातें आइए जानें-
बुद्ध साधुओं की पसंद-
पुरातत्व विभाग की मानें तो ये गुफा बुद्ध साधुओं ने पहली शताब्दी को बनवाई थी। वो यहां एकांत में समय गुजारना चाहते थे। उन्हें ये जगह बहुत पसंद आई तो उन्होंने यहीं गुफा बनवा ली। लेकिन इस तथ्य से परे पांडवाओं वाला तथ्य ज्यादा माना जाता है। 
छोटे पहाड़ पर पांच गुफा-
पांडव गुफा गिनती में पांच हैं और एक छोटे पहाड़ पर ऊंचाई पर बनी हैं। इन गुफाओं में सबसे बड़ी और हवादार गुफा को द्रौपदी कुटी कहा जाता है तो सबसे छोटी अंधकार वाली गुफा को भीम कोठरी बोला जाता है। इसमें एक गुफा मेडिटेशन के लिए बनी है। जिसमें ईको इफेक्ट भी है। पचमढ़ी की गुफाओं में दीवारों पर पेंटिंग भी बनी हुई थी, जो समय के साथ मिटगई है। 
पचमढ़ी नाम की कहानी-
पचमढ़ी शहर का नाम भी पांडवों से जुड़ा हुआ है। यहां आम लोग मानते हैं कि पांडवों के पांच कमरों या गुफाओं के आधार पर ही शहर का नाम पचमढ़ी रखा गया है। इसमें पच का मतलब 5 है तो मढ़ी का मतलब कुटिया। पचमढ़ी मध्य प्रदेश का अकेला हिल स्टेशन है। इसको सतपुड़ा की रानी भी कहा जाता है। 
आने का सही समय- इस पौराणिक जगह को देखने के लिए आपको सुबह 8 से शाम 6 बजे के बीच ही आना होगा।
इंट्री फीस- फ्री
कैसे आएं-
पचमढ़ी आने के लिए राज्य के तकरीबन सभी बड़े शहरों भोपाल, जबलपुर, इंदौर आदि से बसें चलती हैं। अगर यहां ट्रेन से आना है तो पचमढ़ी से करीबी रेलवे स्टेशन पिपरिया है। यहां से 47 किलोमीटर दूर स्थित पिपरिया तक देश के कई बड़े शहरों से सीधी ट्रेन मिल जाती है। पचमढ़ी से नजदीकी एयरपोर्ट 1965 किलोमीटर दूर भोपल में है। जहां राज्य की राजधानी होने के नाते कई शहरों से नियमित फ्लाइट आती जाती हैं। 

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