उम्मीद - गृहलक्ष्मी कहानियां

शोभा गोयल

4th December 2020

मेरे विचारों में पहले से अधिक लचीलापन आ गया है। क्योंकि जिन्दगी सब चीजों से अधिक कीमती है। ये बात सही है क्वारटांइन का एंकात पीड़ा देता है पर यह खुद को करीब से महसूस भी करवाता है।

उम्मीद - गृहलक्ष्मी कहानियां

किचन का काम खत्म कर वह टीवी चला कर बैठ गई। कोरोना से संबंधित कुछ अपडेट आ रहे थे। बढते केसेज और वायरस की वजह से अमेरिका, इटली का मंजर देख वह सकपकाने लगी। अभी देश में लाॅकडाउन चल रहा है चारों तरफ डर का माहौल बना हुआ है। कुछ दिन पहले देहली में दीदी की रिपोर्ट कोरोना पाॅज़ीटिव आई। क्या होगा, कैसे होगा, कब खत्म होगा के विचारों में उलझकर वह‌‌ कितनी देर यू ही गुम होकर बैठी रही तंद्रा तब भंग हुई जब मोबाइल बजा, दीदी का फोन था।
हैलो दीदी, कैसी हो आप?
मै ठीक हूं आन्या, तु परेशान लग रही हैं।
बड़ी बहनें ऐसी ही होती हैं आवाज से ही पहचान लेती हैं कि कोई परेशान हैं
कुछ नहीं दीदी,आज के हालात को लेकर चिंतित हूं, रोजाना नये केसेज आ रहें हैं। सब ठीक होगा या नहीं, और मुझे सबसे ज्यादा आपकी चिंता हो रही है आप क्वारंटाइन में है ‌पता नहीं कितनी शारीरिक पीड़ा सहनी पड़ रही होगी।
नहीं छोटी, ऐसा कुछ नहीं है जो होता है अच्छे के लिए होता है। मुझे कोई शारीरिक पीड़ा नहीं है मैं बिल्कुल ठीक हूं। देख यह कोराना मेरे लिए एक सीख बनकर आया है। पहले मैं सोचती थी मुझे कुछ नहीं होगा। मैं फिट हूं, सामर्थ्यवान हूं, नियमित योग और हेल्दी डाइट लेती हूं। कोरोना से संक्रमित होने के बाद मेरी सोच बदल गयी। यह अच्छी तरह समझ में आ गया है, यदि आप सुरक्षित है तभी आपका परिवेश सुरक्षित हो सकता है। ऐसा लगता है जैसे मैं पहले से अधिक संवेदनशील और सतर्क हो गयी हूं। अब मैं निर्णय लेने में जल्दबाजी नहीं करती, धैर्य का मूल्य समझने लगी हूं। मेरे विचारों में पहले से अधिक लचीलापन आ गया है। क्योंकि जिन्दगी सब चीजों से अधिक कीमती है। ये बात सही है क्वारटांइन का एंकात पीड़ा देता है पर यह खुद को करीब से महसूस भी करवाता है।
आपात स्थिति या मुश्किल दौर हमे भयग्रस्त होकर हमे अपनी शक्तियां को भुलाने का अवसर देता है लेकिन साथ ही हमे सिखाता है बिना हिम्मत खोये ‌शीर्ष पर बैठकर नेतृत्व संभालते हुए स्थिति से मिलकर मुकाबला करने का मौका जैसे आज ‌दुनियाभर की संस्थाएं कर रही है बड़े बडे आयोजन और सेमिनार निरस्त हो रहे हैं। आर्थिक नुकसान जरूर हो रहा है पर इस बात का मलाल नहीं क्योंकि ‌यह अभी मानव के हित में है। तु भी अपना ध्यान रख, परिवार के साथ यादगार पल गुजार, फिर जीवन की भागमभाग में कहां समय मिल पायेगा। समय कठिन है पर स्थायी नहीं, यकीन रख यह दौर गुजर जायेगा। सुखद समय जल्दी ही आयेगा।
हां दीदी, सुखद‌ समय जल्दी ही आये यही दुआ है...कहकर फोन रख दिया और उसके सामने से नाउम्मीदी के बादल छंट गये।

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