शादी से पहले हो फाइनेंशियल मुद्दों पर बात, जिंदगी रहे खुशहाल

चयनिका निगम

10th December 2020

आर्थिक स्थिति शादी के बाद मतभेद की वजह बन सकता है। इसलिए शादी के पहले ही इससे जुड़े कुछ मुद्दों पर बात कर लेना जरूरी हो जाता है।

शादी से पहले हो फाइनेंशियल मुद्दों पर बात, जिंदगी रहे खुशहाल
शादी के सपने सब देखते हैं लेकिन शादी के बाद पैसों से जुड़ी दिक्कत के बारे में कितने ही लोग सोचते हैं। कोई भी नहीं या बहुत कम लोग। माता-पिता भले ही ऐसा सोच लें। शादी करने वाले जोड़े तो बिलकुल भी आर्थिक स्थिति के बारे में नहीं सोचते हैं। मगर अब समय बदलने के साथ इस मुद्दे पर भी सोचा जाना चाहिए ताकि एक जोड़े के तौर पर आप लोग अपना भविष्य सुरक्षित कर सकें। ताकि शादी के बाद आफ्नै आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता ना करनी पड़े। आगे चलकर होने वाले बच्चों को ये न बताना पड़े कि ‘हम तुम्हारी जरूरतें पूरी नहीं कर सकते'। ऐसे न हो इसके लिए आपको शादी के पहले ही पैसों से जुड़ी कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। ये बातें आपकी मासिक सैलरी से जुड़ी भी हो सकती हैं और कुछ एक्सट्रा कमाई से भी। क्या होंगे वो फैक्ट्स, जिन पर आपको देना होगा ध्यान, चालिए जान लेते हैं-
उधार कितना है?-
आजकल कर्ज में होना बड़ी बात नहीं है क्योंकि ज्यादातर लोग कम उम्र से ही अब फ्लैट या कार लोन पर ले ही लेते हैं। अब ऐसे में कीमत ईएमआई से निपटाई जाती है पर इसे कहा कर्ज ही जाता है। इसलिए शादी से पहले दोनों पार्टनर एक दूसरे के लिए कर्ज पर बात जरूरत कर लें। जैसे किसको कितना देना है और कितने दिन तक देना है। इस तरह से दोनों को एक दूसरे की लाइबिलिटीज पता होंगी। क्योंकि हो सकता है किसी एक के लिए बुरा समय आए तो दूसरे को ये जिम्मेदारी निभानी होगी। तब किसी को कोई बात साफ नहीं करनी होगी और दूसरा पार्टनर अपनी जिम्मेदारी वहन करने के लिए पहले से ही तैयार होगा। 
अकाउंट किसका-किसका-
शादी के बाद कई जोड़े ज्वाइंट अकाउंट में पैसे जमा करते हैं, जबकि कुछ ऐसा नहीं भी करते हैं। आप क्या करेंगी? इस पर भी बात कर लीजिए। दरअसल कुछ जोड़े अपनी-अपनी कमाई अलग खातों में रखने को सही मानते हैं। ताकि किसने कितना कमाया का अंदाजा लग सके। लेकिन कुछ लोग हर महीने दोनों मिलकर कितना कमा रहे हैं, इस नजरिए से जमा करते हैं और दोनों की कमाई एक ही खाते में जमा होती रहती हैं। वहीं कुछ जोड़े ये भी करते हैं कि वो हर महीने अपने-अपने वेतन का कुछ प्रतिशत एक ही अकाउंट में ट्रांसफर करते रहते हैं। इससे किस रकम को खर्चा करना है और किसको जमा मानना है, का अंदाजा आसानी से लग जाता है। 
आपका घर, परिवार-
औरत होने के नाते आपसे अपेक्षा की जाएगी कि शादी के बाद आप अपने घर-परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी तो बिलकुल न निभाएं। लेकिन हो सकता है कि आप इस सामाजिक और अनकहे नियम को नकारना चाहती हों। अगर ऐसा है तो सबसे पहले तो आपने पार्टनर से इस मामले में बात साफ कर लें। उन्हें बता दें कि परिवार पर पैसे खर्च करने या न करने का निर्णय आपका अपना होगा। इस मामले में कोई आपको दिशा निर्देश नहीं देगा। हो सकता है कि आपके होने वाले पति को ये बात खराब लगे। लेकिन जरा सोचिए ये बात शादी के बाद पता चलेगी तो ज्यादा दिक्कत होगी। ऐसे में ये बात आप शादी के पहले ही साफ कर लें और पार्टनर का नजरिया इस पर जान लें। 
भविष्य आपके हिसाब से-
आर्थिक स्थिति आपकी कैसी होगी? इसका निर्णय भी आपको ही लेना होगा। या कहें भविष्य में आप कितना और किस तरह से कमाना चाहती हैं, ये निर्णय भी आपको ही लेना होगा। जैसे हो सकता है कि आप भविष्य में पार्ट टाइम ही नौकरी करना चाहें जबकि आपके पार्टनर को ये बात बिलकुल पसंद न हो। वो अपने फुल्ल टाइम और ज्यादा कमाई की अपेक्षा करते हों। या आप शादी के बाद अपनी कमाई से फ्लैट बुक कराना चाहती हों, लेकिन पति को इस बात से दिक्कत हो। वो पहले सेविंग पर ध्यान देना चाहते हों। अब ऐसे में ये जरूरी होगा कि आप होने वाले पति से अपने भविष्य को लेकर अपनी योजनाओं पर बात कर लें। ये बातें, आप दोनों के भविष्य और खुशहाली के लिए जरूरी होंगी। इसलिए अपनी योजनाओं और उनकी योजनाओं पर बात करें, वो भी शादी से पहले। 
आर्थिक निर्णय कौन लेगा-
ज्यादातर भारतीय परिवारों में बाहर के आर्थिक निर्णय पुरुष लेकते हैं जबकि घर के लिए बजट बनाने के काम महिलाएं करती हैं। मगर हो सकता है आप दोनों इस बने बनाए नियम को ना मानें। या आपके पति घर के बजट में भी दखलंदाजी करना चाहें। अब ऐसे में ये तो जरूरी होगा कि फाइनेंशियल निर्णय कौन लेगा? पर बात भी खुले दिमाग के साथ कर ली जाए। इस तरह से एकदूसरे के मन की बात भी दोनों को पता चल जाएगी। 
खर्चा करने का तरीका-
सबकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती है। किसी-किसी को ही चांदी के चम्मच के साथ साथ पैदा होने के मौका मिलता है। हो सकता है, आप भी इन्हीं में से हों। आप भी खर्चा करने से खुद को ना रोक पाती हों। मगर जरूरी नहीं कि आपके पति भी ऐसे ही हों। इसलिए ये मुद्दा भी बात करने वाला है। ताकि खर्चे करते या बचत करते हुए एक दूसरे की आदतें परेशान न करें। आपका दिल खोलकर खर्चा करना उन्हें न खले तो  उनका हाथ खींच कर खर्चा करना आपको खराब न लगे। इसके लिए आपको अपनी आदतें होने वाले पति से बतानी होंगी। उनके एतराज करने पर उनमें सुधार भी करना होगा। या ये भी देखिए कि उनकी गलत फाइनेंशियल आदतों को वो भी बदलने के लिए तैयार हैं या नहीं। कहीं ऐसा तो नहीं उनकी सारी अपेक्षाएं सिर्फ आपसे ही हों। तब तो मामला मतभेद वाला हो जाएगा। 

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

कार लोन लेने...

कार लोन लेने से पहले कर लें तैयारी

कंजूस बनिए, ...

कंजूस बनिए, भविष्य सुरक्षित कीजिए

कमाओ, बचाओ फ...

कमाओ, बचाओ फिर खर्चो...याद रखो

पति हैं 'mum...

पति हैं 'mumma's boy' तो न होने दें रिश्ते...

पोल

आपको कैसी लिपस्टिक पसंद है

वोट करने क लिए धन्यवाद

मैट

जैल

गृहलक्ष्मी गपशप

क्या है वो ख...

क्या है वो खास कारण...

क्या है वो खास कारण जिसकी वजह से ब्यूटी कांटेस्ट में...

ननद का हुआ ह...

ननद का हुआ है तलाक,...

आपसी मतभेद में तलाक हो जाना अब आम हो चुका है। कई बार...

संपादक की पसंद

दुर्लभ मगरगच...

दुर्लभ मगरगच्छ के...

रूस की लग्जरी गैजेटस कंपनी केवियर ने सबसे मंहगा हेडफोन...

शिशु की मालि...

शिशु की मालिश के...

बच्चे के जन्म के साथ ही अधिकांश माँए हर रोज शिशु को...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription