जब बच्चे को गैस परेशान करे तो अपनायें ये 8 जरूरी टिप्स

मोनिका अग्रवाल

29th December 2020

शुरुआती तीन महीनों में शिशुओं को गैस होना आम बात है,क्योंकि इस दौरान उनकी आँतों का विकास हो रहा होता है.जब शिशु का शरीर माँ का दूध या फोर्मूला दूध का पाचन करता है,तो उसके पेट में गैस बनने लगती है

जब बच्चे को गैस परेशान करे तो अपनायें ये 8 जरूरी टिप्स

शुरुआती तीन महीनों में शिशुओं को गैस होना आम बात है,क्योंकि इस दौरान उनकी आँतों का विकास हो रहा होता है.जब शिशु का शरीर माँ का दूध या फोर्मूला दूध का पाचन करता है,तो उसके पेट में गैस बनने लगती है.वहीं जब छह महीने के बाद शिशु को ठोस आहार देना शुरू किया जाता है,तो ऐसे में नए खाद्य पदार्थों के चलते उसके पेट में गैस बनने लगती है.इसके अलावा,जल्दी जल्दी फोर्मूला पीना,निप्पल ठीक से न लेना,दूध पिलाने के बीच में डकार न दिलाना,मा की डायट ,रिफ़्लेक्स आदि कुछ ऐसे कारक हैं जिससे बच्चे के पेट में गैस बनती है.

 बेशक नवजात शिशु बोल नहीं पाते लेकिन कुछ ऐसे लक्षण हैं जिनसे हमें आसानी से पता चल जाता है कि शिशु को गैस हुई है-

1-घबराहट और चिड़चिढ़ापन-ये पहला लक्षण है,ख़ासकर यदि दूध पिलाने के बाद .गैस होने पर बच्चे को घबराहट होने, लग सकती है

2-ब्लोटिंग-बच्चे का फ़ूला हुआ पेट भी,गैस होने का संकेत हो सकता है.

3-पैरों को पेट की ओर खींचना-गैस होने पर बच्चा अपने पैरों को पेट की ओर खींचने की कोशिश करता है.

4-पेट को रगड़ना-गैस की परेशानी होने पर बच्चा कई बार ,पेट पर हाथ लगाकर ज़ोर से रगड़ कर अपनी असहजता प्रग़ट कर सकता है.

5-बच्चे के पेट से आवाज़ आना.-जब आसपास बिल्क़ुल शांति हो तो हो सकता है बच्चे के पेट में गैस होने पर उसके पेट से किसी तरह की आवाज़ सुनाई दे.ऐसा पेट में गैस घूमने के कारण हो सकता है.

6-बहुत ज़ोर से रोना-पेट में गैस बनने से होने वाली तकलीफ़ से बच्चा ज़ोर ज़ोर से रोता है

7-डकार लेना-इसके अलावा बच्चा अगर बार-बार डकार ले रहा है,तो यह भी गैस होने का लक्षण हो सकता है.

शिशु को डकार दिलवा कर,पेट के बल लिटा कर,निप्पल की पकड़ सही करके,बोतल का छेद सामान्य करके,फ़ीडिंग करते समय उसकी पोज़ीशन सही करके ,शिशु को गैस की समस्या से निजात दिलवा सकते हैं,लेकिन इसके अतिरिक्त एक और भी  सही तरीक़ा हैं -उसके पेट की मालिश की जाय.कुछ बड़े बुज़ुर्ग गुनगुने पानी में हींग मिलाकर भी शिशु की नाभि के चारों तरफ़ लगाने की सलाह देते है

पेट की मालिश का सही तरीक़ा-

A-शिशु के पेट की मसाज करने के लिए कोई आरामदायक जगह चुने.

B-पेट मसाज किसी भी मोशन या पैटर्न में की जा सकती है लेकिन,गैस से राहत सरकुलर मोशन मसाज से मिलती है.

C-अपनी तर्जनी की टिप्स से ,नाभि के आसपास, क़्लौकवाइज़ सर्कुलर मोशन में मसाज करें.इन सर्क़्लस के रोटेशन को तीन से पाँच बार रिपीट करें.

D-उसके बाद ऊपर से नीचे की ओर मसाज करें,

E-अब दोनों उँगलियों से नाभि के चारों ओर सरपट चलने के स्ट्रोक में हल्के हाथ से दबाव डालें.धीरे धीरे घेरे का विस्तार बढ़ाती जायँ.

F-अब पुन:दोनों हथेलियों से क्लोक़ वाइज़ और मसाज करते हुए ऊपर से नीचे की ओर दबाव डालते हुए मसाज करें

G-मसाज के बाद शिशु के दोनों घुटने से छाती को छूने का प्रयास करें.फिर एक एक करके,अलग अलग शिशु के घुटनो से उसकी छाती छूने का प्रयास करें.फिर दोनों टांगों से क्रोस बनाते हुए उसकी छाती को छुएँ(ये सब कुछ सेकड्स के लिए करें

H-अब शिशु को उलटीं पोसिशन में लिटा करके  उसकी पीठ पर ऊपर से नीचे स्ट्रोक में मालिश करें.

कुल मिलाकर 10 से 15 मिनट मालिश करके आपका शिशु गैस से राहत महसूस करने लगेगा.

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कंगारू मदर केयर

हेल्दी फूड बच्चों के लिए

 

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