दुनिया को बदल दो

गृहलक्ष्मी टीम

1st January 2021

ऐसी प्रेरक कहानियां जो आपकी दुनिया बदल सकती है।

दुनिया को बदल दो

दूसरों के लिए प्रेरणा बनीं प्रेरणा  प्रेरणा अग्रवाल सक्सेना (वेडिंग प्लानर एंड डिज़ाइनर)

कौन कहता है आसमान में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों, जज्बातों से ख्यालों तक का सफर आसान होता है, मगर ख्यालों को हकीकत की शक्ल देना शायद उतना आसान नहीं होता, मगर कुछ कर गुज़रने के जज्बे, हौंसले और आगे बढ़ने की चाहत में प्रेरणा अग्रवाल सक्सेना आज उस मकाम पर हैं, जहां पहुंच पाना आसान नहीं था। एक बर्थडे पार्टी अरेंज करने के बाद उनका जीवन इस तरह से बदल जाएगा, इस बात का अंदाज़ा शायद उन्हें भी नहीं था। मगर काम के लिए मिले प्रोत्साहन और अपनी काबिलियत के दम पर प्रेरणा ने बतौर वेडिंग प्लानर एंड डिज़ाइनर आज खुद को साबित कर दिखाया है। जज्बा, हिम्मत और आगे बढ़ने का जुनून, हर चीज़ इनके किरदार में साफ-साफ नज़र आती है, लेकिन कहते हैं न कमाल को भी इज़हार की दरकार है। साल 2010 में उन्होंने थीम वीवर्स डिज़ाइंस नाम की एक कंपनी की शुरुआत की और फिर उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रेरणा ने पहली वेडिंग प्लानिंग जयपुर के जाने माने रामबाघ पैलेस में प्लान की। जहां तकरीबन दस हज़ार लोग एकजुट हुए। काम में मिली सफलता के बाद प्रेरणा तब से अब तक तकरीबन 100 शादियां अरेंज कर चुकी हैं। केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी वो वेडिंग प्लानिंग का काम करती हैं। उनकी इस कोशिश में उनके परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया। खासतौर से उन्हें अपनी सास और पति का पूरा स्पोर्ट मिला। इस बिज़नेस को आगे बढ़ाने में उन्हें अपनी बहन अनुश्री सक्सेना का हमेशा पूरा साथ मिला। बतौर बिजनेस वुमेन खुद को साबित करने वाली प्रेरणा अपनी निजी जिंदगी में एक मां का भी अहम् किरदार अदा करती हैं। वो अपने काम के साथ दोनों बच्चों की परवरिश का भी पूरा ख्याल रखती हैं। हर किरदार में खुद को साबित करने वाली प्रेरणा कोरोना काल में भी नए आइडियाज़ और लोगों की सुरक्षा के मद्देनज़र वेडिंग प्लानिंग का काम कर रही हैं। जो उनके काम के प्रति जुनून को साफ तौर पर दर्शाता है। इसके अलावा प्रेरणा महिलाओं को कामकाजी बनाने और अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए भी प्रयासरत हैं और कई संस्थाओं से जुड़कर औरतों के लिए विशेष कार्य भी कर रही हैं।

ख्वाबों को परवाज दो नेहा बगारिया (समाजसेवी)

खुद के भविष्य को सुनहरा बनाने के लिए हर कोई ख्वाबों का ताना-बाना बुनता है। खुद को एक खास मकाम तक पहुंचाने के लिए हर कोई संभव राह को चुनता है। मगर बात जब दूसरों के भविष्य की आती है और उनका मार्गदर्शन करने की आती है, तब कुछ ही लोग अपने कदम आगे बढ़ा पाते हैं और उन्हीं में से एक हैं- नेहा बगारिया। उन्होंने महिलाओं को जिंदगी में खास मकाम दिलाने के मकसद से जॉब्स फॉर हर... नाम की एक सोशल एंटरप्राईज़ कंपनी की शुरुआत की। बतौर फाउंडर कंपनी की बागडोर संभालने वाली नेहा बगारिया ने उन औरतों को रोज़गार देने का नेक काम किया है, जो घर की चार दीवारी में जिम्मेदारियों के बोझ तले अपने ख्वाबों को पल-पल रौंद रही हैं। उन्होंने उन महिलाओं का हाथ थामा, जो रोजगार के लिए दर-दर भटक रही थीं और दो वक्त की रोटी के लिए भी परेशान रहती थीं।  अपने अथक प्रयासों की बदौलत साल 2015 में नेहा बगारिया ने अपनी संस्था की शुरुआत की। आज उनकी इस सोशल एंटरप्राईज़ कंपनी ने कई बेरोजगार औरतों को न सिर्फ रोज़गार दिलवाया बल्कि कुछ कर गुज़रने की चाहत रखने वाली औरतों को एक नई उड़ान भरने का मौका भी प्रदान किया। आज उनकी कंपनी से देखते ही देखते बीस लाख औरतें जुड़ चुकी हैं। नेहा बगारिया का मकसद उन औरतों को दोबारा काम पर लाना था, जो या तो ज़रूरतमंद हैं या फिर जो अपनी नौकरी को किसी कारणवश छोड़ने के बाद कभी दोबारा शुरू नहीं कर पाईं। नेहा अपने ख्वाब को काफी हद तक पूरा कर पाई हैं। नेहा बगारिया की पैदाईश मुंबई में हुई, मगर शादी के बाद ये बेंगलूरू शिफ्ट हो गईं। नेहा उस वक्त कामकाजी महिला थी। मगर बच्चों की पैदाईश के वक्त उन्होंने अपने काम से तकरीबन तीन साल का ब्रेक लिया। इस दौरान उन्होंने औरतों की मनोस्थिति को बेहद करीब से समझा और तभी उन्होंने महिलाओं के लिए कुछ कर गुज़रने का संकल्प लिया और फिर उसे पूरा कर दिखाया। दृढ़ निश्चय से आगे बढ़ने वाली नेहा बगारिया की गिनती आज देश की जानी-मानी बिज़नेस वुमेन्स में की जाती है। इसके अलावा उन्होंने बहुत सी उपलब्धियां हासिल कीं और उनकी कंपनी को भी कई इनामात से नवाज़ा जा चुका है।

जिंदादिली की मिसाल  मानिनी मिश्रा (फिल्मी अदाकारा)

जीवन में आगे बढ़ने की ललक किसे नहीं होती, मगर जिंदगी को बेफिक्र और भरपूर तरीके से जीने की चाहत किसी-किसी को ही होती है। जी हां, इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे बीच बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जो जिंदगी का लुत्फ सही मायने में उठा पाते हैं। उन्हीं में से एक है- मानिनी मिश्रा। जिंदादिली की एक बेहतरीन मिसाल मानिनी बचपन से ही पढ़ने-लिखने की शौकीन रही हैं और आगे चलकर एक साईकेट्रिस्ट बनना चाहती थीं। मगर वक्त कब, कहां किसी की सुनता है, क्योंकि उनकी मंजिल तो कहीं और थी, जहां उनके कदम खुद-ब-खुद उन्हें लेकर चल दिए और फिर वो पहुंच गई टैलेंट की नगरी कहलाने वाली मायानगरी यानी मुंबई में। जहां पहुंचकर उन्होंने छोटे पर्दे से काम की शुरुआत की और फिर जीवन में आगे बढ़ती चली गईं और खूब उपलब्धियां भी हासिल की। 'जन्नत' नाम के सीरियल में बेहतरीन काम करने के बाद उन्हें एक के बाद एक शो और फिल्में मिलने लगीं, जो सिलसिला आज भी लगातार जारी है। देखते ही देखते आज टीवी इंडस्ट्री का एक जाना-माना सितारा मानिनी मिश्रा, बहुत से शोज़ में अपने हुनर और प्रतिभा की छाप छोड़ चुकी हैं। चाहे मोस्ट पापुलर टीवी सीरियल 'जस्सी जैसी कोई नहीं' में हर दिल को भाने वाला परी कपाड़िया का किरदार हो या फिर 'सीआईडी' में डॉ. सोनल बरवे का। इसके अलावा 'नच बलिए' देवों के देव महादेव, दिया और बाती हम, नामकरण और लाल ईश्क जैसे न जाने कितने ही पापुलर शोज़ में वो बेहतरीन अदाकारी का नमूना पेश कर चुकी हैं। हर भूमिका को उन्होंने बहुत ही बेहतरीन तरीके से निभाया है। जिंदगी को देखने के उनके नज़रिए की बदौलत ही वो हर किरदार में खुद को साबित कर पाती हैं और उसमें इतनी जान फूक देती हैं कि उनका निभाया हुआ हर रोल सालों तक लोगों के ज़हन और दिलो दिमाग में जिंदा रहता है। बेहतरीन अदाकारा मानिनी मिश्रा अब तक बीस फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं और हर किरदार में वो एक नए जोश और एक नए अंदाज में नज़र आती हैं। चाहे फैशन फिल्म हो, क्रिश हो या स्टूडेंट ऑफ द ईयर, इन पापुलर फिल्मों में उन्होंने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने में अपने परिवार का भी पूरा सहयोग मिला। उनके माता-पिता ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया है। उन्हें अपने काम में अपनी बेटी का भी पूरा स्पोर्ट मिलता है। किसी भी काम को छोटा बड़ा दर्जा दिए बगैर उन्होंने हर काम को पूरे मन से किया और हर मकाम पर खुद को साबित किया है। मानिनी जी को बचपन से ही पढ़ने-लिखने का बेहद शौक रहा है और आज भी उनका ये शौक कायम है। मानिनी जी लिखने का भी शौक रखती हैं और बचपन से ही उन्होंने कविता लिखना शुरू कर दिया था। मानिनी जी ने 1994 में मिस इंडिया ब्यूटी कान्टेस्ट में भी भाग लिया और मिस पर्सनेलिटी और मिस कंजनेलिटी जैसे दो खिताब अपने नाम किए। मानिनी अपना खाली वक्त किताबें पढ़ने में या फिर कुछ न कुछ सीखने में बिताना पसंद करती हैं। उनका मामना है कि जीवन हमें हर पल कुछ नया सिखाता है और जो सीख लेते हैं, वो आगे बढ़ जाते हैं। जीवन को लेकर उनका यही नज़रिया उन्हें सफलता की राह पर ले जाता है।

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