सर्दियों में कैसे रखें बच्चों का ख्याल

Jyoti Sohi

1st January 2021

सर्दियों में बच्चों की सेहत का ख्याल रखना बेहद ज़रूरी हो जाता है। चाहे उनका खेलना हो, घूमना हो, खाना हो यां फिर नहाना। हर जगह सावधानी बरतनी बेहद आवश्यक होती है। दरअसल, ये एक ऐसी उम्र है, जहां बच्चे अपना ख्याल खुद नहीं रख पाते हैं। तो ऐसे में हमें कुछ खास बातों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि उन्हें सर्दी की नज़र न लगे।

सर्दियों में कैसे रखें बच्चों का ख्याल


ठंडी हवाओं के चलते ही, मन राहत महसूस करने लगता है, मगर यही सर्द हवाएं अपने साथ रूखापन, खांसी और जुकाम जैसी सौगात लेकर आती हैं, जो बड़े बुजुर्गों के साथ साथ बच्चों के लिए भी परेशानी का सबब बन जाती है। अगर आप भी सर्दियों में अपने बच्चों को रखना चाहती है स्वस्थ, तो बरतें ये खास सावधानियां

 

सर्दियों के दस्तक देते ही सर्द हवाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है। जो आगे चलकर बच्चों में सर्दी और खांसी की वजह साबित होता है। ऐसे में अगर बात बच्चों की सेहत की करें, तो उनका ख्याल रखना बेहद ज़रूरी हो जाता है। चाहे उनका खेलना हो, घूमना हो, खाना हो यां फिर नहाना। हर जगह सावधानी बरतनी बेहद आवश्यक होती है। दरअसल, ये एक ऐसी उम्र है, जहां बच्चे अपना ख्याल खुद नहीं रख पाते हैं। तो ऐसे में हमें कुछ खास बातों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि उन्हें सर्दी की नज़र लगे। सबसे पहले बात करेंगे बच्चों के कपड़ों की। 

 

बच्चों को ठीक से कपड़े  पहनाएं  

अगर आपका बच्चा छोटा है,तो ठंड में उसे मोटे और पूरे कपड़े पहनाएं। बच्चे के सिर, पैर और कानों को ढककर रखें। हमेशा बच्चे को 2.3 कपड़े पहनाकर रखें। कपड़े लेयरिंग में पहनाएंगे तो ज्यादा बेहतर रहेंगे । 1.2 कपड़े की जगह 3.4 पतले कपड़े उसके शरीर को ज्यादा गर्म ऱखेंगे। ठंड में कॉटन की जगह ऊनी जुराबें पहनाएं। घुटने के बल चलने वाले बच्चों को हाथों में भी दस्ताने पहनाएं। इसके अलावा, बड़े बच्चों को भी खेलते वक्त दस्ताने, जूते और टोपी पहनाना न भूले। इससे बच्चे ठंड से बचे रहेंगे और बीमारी का खतरा भी कम होगा।

 

सफाई भी जरूरी 

नवजात शिशु को 2.3 दिन छोड़कर नहलाना चाहिए। वैसे रोजाना गुनगुने पानी में तौलिए को भिगोकर बच्चे के शरीर को पोछें। बड़े बच्चों को रोज़ाना नहलाने की कोशिश करें। हालांकि सर्दी में गुनगुने पानी से ही नहलाएं। रोजाना नहलाने का फायदा ये होगा कि आपका बच्चा कीटाणुओं की चपेट में नहीं आएगा। दरअसल, बच्चे दिन भर खेलने में व्यस्त रहते है, ऐसे में उनके हाथ, पैर और कपड़े कीटाणुओं की चपेट में भी आते हैं। बच्चों को साफ और स्वस्थ रखने के लिए रोज़ नहलाना चाहिए और पूरे कपड़े रोज़ाना बदलने चाहिए। 

 

टीवी टाईम

सर्द हवाओं से अपने बच्चों को बचाने के लिए हम कई बार उन्हें टैब और टीवी के सामने बैठा देते हैं। घंटों टीवी देखने के कारण बच्चों को आंखों की समस्या भी हो सकती है और वो सामाजिक तौर पर भी कटे कटे रहने लगते हैं। साथ ही उनमें एकाग्रता की कमी भी देखी जाती है। ऐसे में बच्चों को घर में बुजुर्गों के साथ भी वक्त बिताना चाहिए। उन्हें कुछ समय के लिए दादा दादी के साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए और कहानियां भी सुननी चाहिए। ताकि बच्चों के मस्तिष्क का विकास हो सके। साथ ही स्क्रीन टाईम के लिए उन्हें दिनभर में सिर्फ 45 मिनट से लेकर 1 घंटे तक का ही वक्त देना चाहिए। इसके अलावा बच्चों को अपने साथ घर के विभिन्न कार्यों में भी व्यस्त रखना चाहिए। ताकि वे सामाजिक मूल्यों को जान सकें और हर किसी की मदद के लिए तैयार रहें। 

 

खेलने का वक्त 

इसमें कोई दोराय नहीं कि खेलना बच्चों के विकास के लिए बेहद ज़रूरी है। मगर ठिठुरन भरी सर्दी से बचने हम लोग कई बार बच्चों को घरों में कैद कर देते हैं। ऐसे में बच्चे अधिकतर वक्त टीवी यां मोबाईल के साथ गुज़ारने लगते हैं। इस परेशानी से निपटने के लिए हमें बच्चों के इनडोर गेम्स पर ज़ोर देना चाहिए। साथ ही कुछ देर के लिए धूप में भी बच्चों को खेलने के लिए बाहर भेजना चाहिए। मगर इस बात का अवश्य ख्याल रखें की बच्चों को सुबह जल्दी और देर शाम खेलने से रोकना चाहिए। क्यों की इस वक्त में मौसम बेहद ठंडा होता है, जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।  

 

मालिश 

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा ठंड में स्वस्थ रहे, तो रोजाना 10.15 मिनट उसकी मालिश जरूर करें। इससे बच्चे की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं। मालिश हमेशा नीचे से ऊपर की ओर करें। मालिश का असली मकसद खून के दौरे को दिल की तरफ ले जाना होता है। पैरों और हाथों पर नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें। मालिश के लिए बादाम, जैतून, बच्चों के तेल व अन्य तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मालिश और नहाने के बीच 15 मिनट का गैप जरूरी है। यही नहीं मालिश और खाने बीच भी करीब 1 घंटे का अंतराल रखें। अगर खाना खाने के तुरंत बाद मालिश करेंगे, तो बच्चे को उलटी की आशंका रहेगी। 

 

खाने पीने का भी रखें विशेष ध्यान 

बदलते मौसम का असर सबसे पहले छोटे बच्चों पर पड़ता है। ऐसे में हमें ध्यान रखना चाहिए कि किस मौसम में अपने बच्चे को क्या खिलाया जाए। जिससे उनका शरीर बदलते मौसम और उससे होने वाली समस्याओं से जूझ सके। दरअसल छोटे बच्चे बहुत ही संवेदनशील होते हैं। इसलिए बदलते मौसम का प्रभाव उनपर सबसे जल्दी होता है। 1 साल तक के बच्चों के लिए तो मां का दूध व जरूरत पड़ने पर फॉर्म्युला मिल्क बेहतर है। अगर ड्राई फ्रूट्स से एलर्जी हो, तो इसे न दें। 

 

अपने बच्चे को रोजाना एक खजूर, 3.4 किशमिश भी खिला सकते हैं और उसे थोड़ा सा केसर या शहद की 4.5 बूंदें भी चटाने से ठंड में वह फिट रहेगा। इसके अलावा संतरा,सेब, चीकू, अनार आदि फल भी बच्चे को खिला सकते हैं। 

 

रोजाना बादाम का सेवन करने के लिए सर्दी सबसे अच्छा मौसम माना जाता है। बादाम का सेवन करने से यह हमारे शरीर को गर्म रखने में मदद करता है और बादाम में मौजूद प्रोटीन तत्व हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। 

 

ड्राई फ्रूट के लड्डू को सर्दियों के दौरान बनाकर बच्चों को देना बहुत अच्छा होता है। क्योंकि यह लड्डू शरीर को गर्म रखता है और बहुत आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। बच्चों के आहार में ड्राई फ्रूट्स और नट्स शामिल करना सबसे अच्छा तरीका है। 

 

गाजर का हलवा सभी बच्चों का पसंदीदा होता है। इसलिए सर्दी में बच्चों को ये खिलाना कोई मुश्किल कार्य नहीं है। यह ताजा रसदार गाजर, दूध, नट्स और घी के साथ तैयार किया जाता है जो सर्दियों के लिए एक शानदार मिठाई है। 

 

सर्दियों में गाजर सूप बच्चों को देने के लिए एक बढ़िया विकल्प है। बच्चे को खूब सारी हरी.हरी सब्जियां खिलाइए।

मुलेठी खांसी को ठीक करने के लिए एकदम सही प्राथमिक चिकित्सा है। बच्चों को देने के लिए पानी में उबाल लें और उन्हें इसे घूंट के रूप में दें।

 

शहद में एंटी.ऑक्सीडेंट और वार्मिंग गुण पाए जाते हैं। खांसी और गले की खराश से जल्द राहत के लिए इसे अदरक के रस के साथ मिलाया जा सकता है। इसका उपयोग बच्चों में भी किया जाता है।

 

आंखों की देखभाल

सर्दी के दिनों में बच्चों की आंखों के किनारे कुछ पीला-पीला सा जमा हो जाता है। हालांकि अगर सर्दी में शिशु की आंखें लाल हो या पानी निकल रहा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। लेकिन अगर आंखों के कोने में सफेद या पीले रंग का बहाव हो तो इसे ना तो हाथ से रगड़ें और ना ही इसे खींच कर निकालें। बल्कि गुनगुने पानी में रूई को डिप करके इससे बच्चे की आंखों को साफ करें।

 

धूप से होगा फायदा 

धूप में विटामिन डी होता है। ये बच्चे के लिए ठंड में काफी फायदेमंद होगा। आपको बच्चे को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच कभी भी 20.25 मिनट के लिए धूप में बैठाना चाहिए । इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे का पूरा शरीर कपड़े से ढ़का न हो, नहीं तो धूप का फायदा नहीं मिलेगा। धूप में बच्चे के हाथ.पैर के पास कपड़ा फोल्ड कर दें। ताकि उसके शरीर पर धूप लग सके।

 

हीटर का यूज़ संभलकर 

बच्चे के आसपास हीटर का इस्तेमाल न करें। अगर करना जरूरी है, तो ऑयल वाले हीटर का यूज करें। ये कमरे से ह्यूमिडीटी खत्म नहीं करते। पर इन्हें भी लगातार न चलाएं।  1.2 घंटा चलाकर हीटर को बंद कर दें। बाहर  जाने से करीब 15 मिनट पहले हीटर को बंद कर देंए वरना कमरे के अंदर और बाहर के तापमान का फर्क बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है। 

 

दवा का ध्यान रखें

बच्चों की शरीर की जरूरतें बड़ों की तुलना में अलग होती हैं। ऐसे में उनकी समस्या का खुद उपचार करने के बजाय डॉक्टर के इलाज को तरजीह दें। सर्दी.खांसी के लिए अपनी समझदारी से सिरप, दवा या नेजल ड्रॉप दे सकती हैं। लेकिन सर्दी.खांसी बढ़ने लगे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

 

सनस्क्रीन लगाएं

ठंड में सबसे ज्यादा मजा आता है धूप में बैठने और खेलने में। लेकिन इसका नुकसान होता है कि स्कीन टैन हो जाती है। तो अपने बच्चे को धूप में बैठाने से पहले उनको सनस्क्रीन लगाना ना भूलें क्योंकि उनकी स्कीन आपसे भी ज्यादा नाजुक है।

 

बच्चों के लिए सर्द मौसम में बरतें आम सावधानियां  

बच्चों के कानों और छाती को पूरी तरह से ढ़ककर रखे।

स्वेटर पहनाने के साथ साथ बच्चों के कानों को टोपी से कवर करना न भूलें।

बच्चों को ऊनी जुराबें, गल्व्स और जैकेट आदि पहनाएं।

धूप निकलने पर ही घर से निकलें।

अपने शिशु का टीकाकरण समय पर करायें, जिससे वो कई संक्रामक बीमारियों  जैसे जुखाम आदि के खतरे से दूर रहे।

ठन्ड़ के समय हमेशा शिशु के पैर ढक कर रखे। जिससे उन्हें ठन्ड़ आसानी से न पकड़ सके।

बच्चों को स्कूल में तथा घर में साफ सफाई रखने के लिए बताये।

बच्चों में ज्यादा दिन तक रहने वाला सर्दी जुखाम नीमोनिया भी हो सकता है। इसीलिए बच्चे के लिए लापरवाही न बरते समय से इलाज करे।

यदि बच्चा नवजात शिशु हैं तो उसे रोगों की प्रतिरोधी क्षमता बनाये रखने के लिए उसे स्तनपान करायें क्योंकि नवजात शिशु को हर बीमारी से माँ का दूध बचा सकता हैं।

बच्चो के आहार के साथ कोई लापरवाही न बरते। स्कूल जाने वाले बच्चों को पोषक आहार दें और उन्हें मुंह पर रूमाल रखकर छींकने व खांसने की आदत डाले।

सोते हुए बच्चे का सिर ऊपर रखे, जिससे वह आसानी से साँस ले सके।

बाहर ज्यादा ठंड होने पर बच्चों को इनडोर गेम्स मतलब बंद जगह पर खेलने के लिए प्रेरित करे।

 

घरेलू उपचार

रोजाना तेल मालिश करें। तेल को हल्का गुनगुना गर्म कर लें। वैसे तो किसी भी तेल से मालिश कर सकते हैं। फिर भी ऑलिव ऑयल या बादाम तेल को मालिश के लिए अच्छा माना जाता है। . 

बच्चों को हल्के गर्म पानी से रोजाना नहलाएं। इससे शरीर से कीटाणु तो दूर रहते ही हैं। साथ ही जोड़ और मसल्स आदि भी खुलते हैं।

बच्चों के सर्दी-खांसी में अजवाइन का काढ़ा पिलायें।

बच्चे को गर्म पानी में गुड़, जीरा और काली मिर्च का मिश्रण दे। सर्दी, खांसी और गले में खराश होने पर यह मिश्रण असरदार होता है।

आधी कटोरी देसी घी में एक गांठ अदरक पीस कर उसमें २५ ग्राम गुड़ डालकर पकालें। ठंडा होने पर थोड़ा - थोड़ा बच्चे को खिलाये। यह खाँसी की अचूक दवा है।

सर्दी-खांसी के दौरान सूप बहुत आरामदायक भोजन होता है। आप सब्जियों का गर्म सूप दे सकती हैं। यदि आपका बच्चा थोड़ा और बड़ा है तो आप उसे चिकन सूप दे सकती हैं। ये सूप बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

ठन्ड़ से बचने के लिए गरम चीजे खिलाये, जो शरीर को अंदर से सुरक्षा प्रदान करे।

फल सब्जिया पूरी तरह से बच्चो के आहार में शामिल करे।

 

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