खालीपन - गृहलक्ष्मी कविता

रौनक शर्मा

2nd January 2021

खालीपन - गृहलक्ष्मी कविता
एक अजीब सी बात हो गई,
कुछ अलग सी बात हो गई।
यूं तन्हा से जब कर गए,
तो जिंदगी वीरान सी हो गई।
मेरे ख्यालों को कर गए खाली,
और खालीपन सी बात हो गई।
अब सिर्फ ख्याल बाकी हैं,
और सांस खयालों में खो गई।
यह खालीपन रहा होगा कहीं न कहीं तुममें भी,
या फिर उभर आया होगा कोई ख्याल।
कुछ करने से पहले न जाने,
न जाने कितने उलझे होंगे सवाल।
कितनी ही बार अपनी खिड़की 
से बाहर झांका होगा,
सोने से पहले न जाने कितनी बार जागा होगा।
एक हंसी और आंखों में पानी आया होगा,
उन आंसुओं से आसमां को भर लेना चाहा होगा।
न मिली कभी, पर एक अजनबी सा 
रिश्ता हो गया तुमसे,
जाने के बाद जो करीब आया तू मुझसे।
जी करता है बांहों में भर लूं, जो कहीं तू मिले,
चल मिलकर झेलते हैं ये दुनिया के झमेले।
तेरी हंसी के साथ हंसी मिली, 
करें कुछ अलग सी बात, ये चाह रह गई।
तुम चले गए, कहानी अधूरी रह गई,
और एक अजीब सी बात हो गई।
अलविदा सुशांत। 

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