भोलेनाथ के 10 अवतारों के कीजिए दर्शन

चयनिका निगम

5th January 2021

भगवान शिव की आराधना करने वालों को उनके 10 रूपों से जरूर रूबरू होना चाहिए। इन सभी रूपों की अपनीअलग-अलग कहानी हैं।

भोलेनाथ के 10 अवतारों के कीजिए दर्शन

शिव जी की महिमा से कौन नहीं वाकिफ है। सभी लोग भगवान शिव की आराधना करते ही इसलिए हैं कि वो हम भक्तों की जरूर सुनते हैं। वो भक्तों को निराश बिलकुल नहीं होने देते हैं। भगवान शिव की महिमा के चर्चे सिर्फ भारत में नहीं हैं बल्कि भोलेनाथ के चरणों में खुद को समर्पित करने वाले भक्त विदेशों में भी हैं। खास बात ये है कि शिव जी एक नहीं हैं बल्कि उनके कई और रूप हैं। पुराणों में शिव जी के 28 रूपों की बात कही गई है। इन सभी रूपों की अपनी अलग अहमियत और आस्था है। इनमें से 10 के बारें हम बता रहे हैं-

सती से जुड़ा वीरभद्र अवतार

बात तब की है जब दक्ष के यज्ञ में माता सती ने देह त्यागी थी। भगवान शिव को इस बात पर बहुत गुस्सा आया, उन्होंने अपनी एक जटा निकाली और पर्वत पर पटक दी। फिर इस जटा के एक भाग के तौर पर वीरभद्र प्रकट हुए। वीरभद्र को शिव जी का अवतार माना गया है। वीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ का नाश करके उन्हें मृत्युदंड दिया। 

पिप्पलाद अवतार

शिव जी का ये अवतार शनि पीड़ा का हल देता है। 

 

नंदी अवतार-

चूंकि भगवान शिव धरती पर मौजूद सभी जीवों के लिए हैं। भगवान शिव का नंदी अवतार इस भावना के आसपास बुना है। ये अवतार बैल यानि कर्म का प्रतीक है। मतलब कर्म किए बिना जीवन सुखद नहीं हो सकता है। 

भैरव अवतार

भगवान शिव के पूर्ण रूप के दर्शन करने हैं तो आपको भैरव की आराधना करनी होगी। पुराणों में भैरव श्वि जी का पूर्ण अवतार माना गया है। 

अश्वत्थामा

माना जाता है कि अश्वत्थामा आज भी धरती पर हैं। शिव जी के इन अवतार को अमर माना गया है। अश्वत्थामा पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे। 

 

कृष्णदर्शन अवतार

शिव जी के इस रूप में धार्मिक कर्मों की अहमियत समझाई गई है। इसमें धार्मिक कार्यों जैसे यज्ञ की जीवन में जरूरत को बताया गया है। 

शरभावतार-

शिव के इस अवतार में भगवान शिव रूप बिलकुल अलग है। इसमें शिव जी आधे मृग और आधा शरभ पक्षी का है। शरभ पक्षी के बारे में पुराणों में भी बताया गया है। इसमें बताया गया है कि ये आठ पैरों वाला ऐसा जीव है, जो शेर से भी ज्यादा ताकतवार था। इसी अवतार में आकार भगवान शिव ने भगवान नृसिंह का गुस्सा शांत किया था। 

ऋषि दुर्वासा-

भगवान शंकर के अहम किरदारों में से एक है ऋषि दुर्वासा का अवतार। माना जाता है कि सती अनुसूइया के पति महर्षि अत्रि ने ऋषिकुल पर्वत पर पुत्र के लिए ताप किया था। तब इस ताप असे प्रसन्न होकर बृहमाजी जी से चंद्रमा, विष्णु जी से दत्तात्रेय और फिर रुद्र के अंश से दुर्वासा का जन्म हुआ। 

हनुमान अवतार- शिव जी का सबसे श्रेष्ठ अवतार हनुमान जी का ही है। इसमें शंकर जी ने वानर का रूप धरा था। 

गृहपति अवतार-

मुनि विश्वानर तथा उनकी पत्नी शुचिष्मती बिलकुल शिव जी जैसा पुत्र चाहते थे। उन्होंने वीरेश लिंग की पूजा की और फिर उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ। माना जाता है कि ब्रह्म ने खुद उस बच्चे का नाम गृहपति रखा था। 

 

ये भी पढ़ें-

 संस्कृत साहित्य में रामकथा

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