अजवायन के औषधीय गुण

प्राची प्रवीन महेश्वरी

5th January 2021

अजवायन एक भारतीय मसाला है जो हर रसोई में रहता है। भारत के हर क्षेत्र में इसका उत्पादन होता है। आयुर्वेद कहता है कि अजवायन हृदय, पाचन, त्वचा, कफ, वात, वायु, दन्त रोग सभी में लाभकारी है महिलाओं के लिए भी अजवायन रामबाण औषधि है। अजवायन में कीटनाशक क्षमता होती है। सड़न निवारक गुण होने से इसका काढ़ा बनाकर उस पानी से घाव धोने से घाव ठीक हो जाता है। अकेली अजवायन को सैंकड़ों प्रकार के अन्न को पचाने वाली औषधि कहा जाता है।

अजवायन के औषधीय गुण

अजवायन के लाभ

शराब की लत छुड़ाने में- अजवायन को सेककर शीशी में भरकर रख लें फिर जब भी शराब पीने का मन करे तो एक चुटकी अजवायन मुंह में डालकर चबाते रहिए इससे शराब की बुरी लत छूट जाती है।

आंखों की फूली में व दंत रोगों में- आंखों में फूली होने पर अजवायन को जलाकर उसकी भस्म को कपड़े से छानकर सुरमे के समान आंखों में लगाने से एक माह में फूली में फायदा होना शुरू हो जाता है। इसी चूर्ण से दांतों का मंजन करने से दांतों व मसूड़ों के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

सूखी खांसी में- 3 ग्राम अजवायन का पान के साथ सेवन करने से सूखी खांसी दूर हो जाती है। इस पान को थूके नहीं बल्कि धीरे-धीरे चबाते रहें।

बहुमूत्र में- अजवायन को पीस लें व बराबर मात्रा में गुड़ लेकर 3-3 ग्राम की गोली बनाकर रख लें। इसका दिन में तीन बार उन बच्चों को सेवन कराएं जो नींद में पेशाब कर देते हैं। यह प्रयोग उनके लिए लाभकारी होगा।

उल्टी, दस्त, हैजा में- उल्टी, दस्त, हैजा की स्थिति में अजवायन का सत्त पिपरमेंट का सत्त, कपूर को मिलाकर अमृतधारा बनाई जाती है। इसे बताशे में रखकर खाएं।

बच्चों के उल्टी-दस्तों में- नवजात शिशुओं को उल्टी-दस्त होने पर मां के दूध में अजवायन घिसकर फिर छानकर पिलाया जाए तो फिर आराम मिल जाता है।

पेट में कीड़े हों तो- पेट में कीड़ों की स्थिति में प्रात:काल खाली पेट 4 ग्राम अजवायन पीसकर चुटकी भर काला नमक और एक गिलास छाछ के साथ सात दिन तक नित्य सेवन करने से पेट के कृमि नष्ट हो जाते हैं। अजवायन चूर्ण में काला नमक मिलाकर उसके रस को पिलाने से पेट के कीड़े दूर हो जाते हैं।

पेट दर्द व पाचन शक्ति की कमी में- वायु विकार व अपच के कारण पेट दर्द हो रहा हो, तो अजवायन, काली मिर्च, सेंधा नमक तीनों को पीसकर गर्म पानी के साथ 3-4 ग्राम सुबह-सुबह सेवन करने से पाचन शक्ति तेज होती है तथा पेट दर्द दूर होता है।

त्वचा संबंधी विकारों में- आग से जले हुए घाव, कृमियों के कारण उत्पन्न घाव, खाज, खुजली, दाद आदि विभिन्न चर्म विकारों में अजवायन को पानी के साथ पीसकर गाढ़ा लेप लगाएं। इससे शीघ्र लाभ होगा।

मासिक धर्म में रुकावट- 4 ग्राम अजवायन सुबह एवं शाम को एक गिलास गर्म दूध के साथ लेने से मासिक धर्म की परेशानियां दूर हो जाती हैं।

पेट फूलने में- पाचन रस को सामान्य बनाने के लिए 100 ग्राम अजवायन, 50 ग्राम छोटी हरड़, घी से सेकी हुई 25 ग्राम हींग, 25 ग्राम सेंधा नमक सबको मिलाकर चूर्ण बना लें। नित्य 3 ग्राम चूर्ण सुबह-सुबह गर्म पानी से सेवन करें तो पेट विकार ठीक हो जाते हैं।

शारीरिक पीड़ा में- शारीरिक दर्द निवारण हेतु जहां पर दर्द हो रहा हो उस स्थान पर अजवायन सेककर-पीसकर गर्म पानी में लेप करें। तथा लेप पर हल्का सा सेंक करें इससे रक्त संचार खुलेगा व दर्द दूर होगा।

दूध के अपच में- पाचन शक्ति कमजोर होने पर दूध ठीक से पच नहीं पाता है। ऐसी स्थिति में दूध धीरे-धीरे घूंट-घूंटकर पीना चाहिए। उसके बाद 3 ग्राम अजवायन मुंह में रखकर चबाएं।

 

यह भी पढ़ें -ए टू जेड बीमारियां और उनका इलाज

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