कैसे करें खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच?

हनुमान प्रसाद उत्तम

6th January 2021

खाद्य पदार्थों में मिलावट आज की गृहणी की सबसे बड़ी समस्या है। मिलावट के कारण आज न मात्र रसोई के जायके पर दुष्प्रभाव पड़ा है अपितु उससे स्वास्थ्य की बड़ी हानि हुई है। इस समस्या के लिए गृहिणियां कर भी क्या सकती हैं, क्योंकि यह मिलावट किसी एक चीज में नहीं है, अपितु अनेक चीजों में होती है। रसोई में खास प्रयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच गृहणियां कर सकती हैं लेकिन इसके लिए मिलावट को पहचानने की विधि जाननी जरूरी है।

कैसे करें खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच?

पिसी हुई लाल मिर्च

पिसी हुई लाल मिर्च को थोड़े पानी में डालिए। यदि रंग पानी में घुलने लगे व बुरादा पानी के ऊपर तैरने लगे तो संभवत: आपको मिर्च के स्थान पर कदाचित लकड़ी का रंगा हुआ बुरादा दे दिया गया है।

हींग

इसकी शुद्धता की जांच करने के लिए थोड़ी सी हींग लेकर पानी में घोलें। यदि हींग पानी में घुल जाती है तथा पानी का रंग दूधिया दिखाई देता है तो वह शुद्ध है अन्यथा मिलावटी। ज्यादातर हींग में मेटेनिल यलो कलर की मिलावट की जाती है। ऐसी स्थिति में पानी दूधिया न होकर हल्का पीला हो जाता है। शुद्ध हींग को अगर जलाया जाए, तो वह तेज लौ के साथ जलती है।

चाय 

एक सफेद कागज लें तथा उसे थोड़ा गीला करके उस पर चाय की कुछ पत्तियां बिखेर दें। यदि चाय की पत्तियां कागज पर अपना रंग छोड़ती है तो समझिए चाय पर दोबारा रंग किया गया है, क्योंकि असली चाय रंग नहीं छोड़ती है।

चाय की बुकनी में यदि लकड़ी का बुरादा मिला होगा तो पानी में घोलते ही बुरादा तैरने लगेगा। यदि चाय में रंग मिला है तो ठण्डे पानी में चाय की पत्ती डालते ही पानी रंगीन हो जाएगा।

साबुत काली मिर्च

साबुत काली मिर्च के दाने एक गिलास पानी में डालिए। अगर वे डूब जाएं तो समझें शुद्ध काली मिर्च है तथा तैरती रहे तो हो सकता है गुलमोहर या पपीते के बीज उसमें मिलाए गए हैं।

जीरा

जीरे में मिलावट का पता लगाने के लिए उसे हथेलियों के बीच रगड़िए, यदि आपके हाथ में कुछ रंग लग जाए तो समझिए कि जीरा मिलावटी/नकली है।

पिसी हल्दी

हल्दी रंगरूप को निखारने के साथ-साथ हमारे शरीर के लिए ऊर्जा संचय करने में भी सहायक होती है, लेकिन मिलावट करने वालों ने इसे भी अब शुद्ध नहीं छोड़ा। पिसी हल्दी में ज्यादातर गेरू की मिलावट की जाती है। जांच करने के लिए हल्दी को एक गिलास पानी में घोल लें तथा घोल में एक मि.ली. आयोडीन डाल दें। घोल का रंग नीला पड़ने पर आप समझ लें कि हल्दी में मिलावट की गई है।

इसके अतिरिक्त थोड़ा सा हल्दी पॉउडर लेकर उसमें पानी डालिए। लकड़ी का बुरादा मिला होगा तो वह पानी में तैरने लगेगा। फिर इस घोल को छान लीजिए। छने घोल में थोड़ा सा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाइए। यदि बैंगनी रंग उभर कर आता है और पानी मिलाने पर खत्म हो जाता है तो इसका आशय है कि हल्दी शुद्ध है, लेकिन अगर लाल-बैंगनी रंग बना रहता है अतिरिक्त पानी डालने पर तो समझिए कि उसमें मेटेनिल यलो रेग की मिलावट है जो स्वास्थ्य पर अधिक बुरा असर डालता है।

चीनी

आजकल बाजार में सल्फर चीनी की बिक्री ज्यादा है। इसलिए जब भी आप चीनी खरीदें उसे हथेली पर रखकर रगड़े। यदि वह चूरा हो जाती है तो समझिए कि सल्फर है। इसमें मिठास कम व कुछ गंध सी आती है। शुद्ध चीनी होने पर उसका चूरा नहीं होगा।

शुद्ध घी

एक चम्मच पिघला घी लें तथा उसमें उतनी ही मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाइए। इसके बाद इसमें दो चम्मच चीनी घोलिए। यदि दो रंगहीन सतह दिखाई दे तो उसका मतलब है कि मिलावट नहीं है। 

यदि निचली सतह भूरी-लाल हो जाए तो इसका मतलब है कि उसमें वनस्पति घी मिलाया गया है।

इसके अतिरिक्त एक चम्मच भर पिघले घी या मक्खन में कुछ बूंद आयोडीन की डालने पर अगर बैंगनी रंग उभर आए तो इसका मतलब है कि स्टार्च की मिलावट है।

खाद्य तेल

एक शीशे के बर्तन में तेल एक चम्मच डालिए। इसमें थोड़ा सा नाइट्रिक एसिड मिलाइए। यदि उसमें आर्जीमोन के तेल की मिलावट होगी तो वह लाल या मटमैला भूरा रंग दिखाई देगा।

इसके अलावा एक बर्तन में थोड़ा सा तेल लें। उसमें पेट्रोलिम ईथर डालकर घोलिए। बर्तन(शीशे का हो) को बर्फ या नमक के बीच रखिए। यदि मिश्रण का रंग गंदा या मटमैला हो जाए तो समझ लीजिए कि उसमें अरंडी का तेल मिला है।

एक शीशे के बर्तन में 2 मि.ली. तेल डालें। उसमें उतनी ही मात्रा में नाइट्रिक एसिड मिलाइए। एक बर्तन में पानी लेकर उसे चूल्हे/गैस पर चढ़ाइए। इस पानी में बर्तन को किसी होल्डर की सहायता से पकड़े रहिए। पानी को उबलने दीजिए। 

यदि बर्तन में गंदा पानी दिखाई दे तो 

उसका आशय है कि खनिज तेल की मिलावट की गई है।

इस तरह से जरा सी सावधानी बरत कर आप नकली माल से बच सकते हैं। साथ ही साथ अपने परिवार को विकराल रोगों से पीड़ित होने से बचा सकती हैं। कभी-कभी ये मिलावटी खाद्य पदार्थ जानलेवा भी साबित हो जाते हैं।  

कॉफी

शुद्ध कॉफी पानी में डालने पर कुछ देर तक तैरेगी। यदि उसमें भुने-पिसे गेहूं  या ईमली के बीज के चूर्ण की मिलावट होगी तो वह तुरंत तल में बैठ जाएगी। यही नहीं कॉफी के पॉउडर को पानी में डालने पर शुद्ध जल्दी ही पानी में घुल जाएगी। यदि तहलटी पर कुछ जम जाए तो समझिए कि निश्चित रूप से कॉफी नहीं कुछ और है।

दूध

इसकी शुद्धता की जांच के लिए आप एक बूंद  दूध समतल चिकनी जगह पर डालिए। यदि बूंद  स्थिर रहती है तो इसका आशय है कि दूध शुद्ध है। पानी मिले दूध की बंूद सफेदी भी नहीं छोड़ती है। दूध की सही जांच के लिए लेक्टोमीटर भी आता है।

केसर 

शुद्ध केसर आसानी से टूटता नहीं है जबकि मिलावटी को टूटते देर नहीं लगती। इसके अलावा केसर पानी में जल्दी से घुल जाती है जबड्डकि अन्य पदार्थ आसानी से पानी में नहीं घुलते। यही नहीं केसर में कभी-कभी मकई की बालें रंग कर मिलाई जाती है। इसकी जांच के लिए पानी में डालते ही वे पानी में तैरने लगती है और पानी रंगीन हो जाता है।

शहद

शहद की जांच के लिए उसे एक सलाई में लगाकर जलाए शुद्ध शहद होगा तो सरलता से जल जाएगा। अशुद्ध होने पर वह जलेगा नहीं। इसके अतिरिक्त सर्दियों में यह जमता नहीं है। यदि मिलावट है तो उसकी चीनी नीचे जमने लगती है।

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