मेवों में छिपा है सेहत का राज

डॉ. विजय कुमार सिंह

14th January 2021

सर्दियों के आते ही खांसी, जुकाम, बुखार जैसी छोटी-मोटी बीमारियां परेशान कर देती हैं। महज गरम कपड़े पहनना और चाय-कॉफी पीना ही पर्याप्त नहीं होता। सर्दियों में सूखे मेवे आपको फ्लू, सर्दी, कफ आदि कई रोगों से बचाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करते हैं। जानें सेहत से जुड़े इनके लाभ इस लेख से।

मेवों में छिपा है सेहत का राज

प्राचीन काल के ऋषियों-मुनियों ने स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए सूखे मेवों को उपयोगी बताया है। आज आहार विशेषज्ञों की सूची में सूखे मेवे या ड्राई फ्रूट्स पहले स्थान पर हैं। सूखे मेवे मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार के तनावों को कम करते हैं और सर्दी के मौसम में ये और भी फायदेमंद होते हैं।

इनका सही मात्रा में प्रयोग न केवल व्यक्ति की शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि दिमाग को सक्रिय करने के साथ स्नायु-तंत्र को भी कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। मनुष्य के मस्तिष्क का 70 प्रतिशत भाग अम्लीय वसा से बना है जो दिमाग की कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करता है। इस वसा का निर्माण शरीर सामान्य आहार द्वारा नहीं कर सकता। काजू, बादाम, अखरोट, मूंगफली आदि में यह वसा अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है। आइए जानते हैं कुछ सूखे मेवों के बारे में जो आपको ठंड से बचा सकते हैं-

 

पिस्ता-सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए पिस्ता खाएं। इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए सर्दियों में इसे खाएं। इसमें कैलोरी भी काफी कम होती है। पिस्ता का नियमित सेवन वजन भी नियंत्रित रखता है। दिल के मरीजों के लिए पिस्ता फायदेमंद है क्योंकि यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम कर अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

 

अखरोट-इसकी रचना मस्तिष्क की संरचना से मेल खाती है। इसका सेवन मस्तिष्क को ताकत देता है। इसकी गिरी स्वादिष्टï, पुष्टिïकारक तथा शक्तिवर्द्घक होती है। अखरोट में उपस्थित ओमेगा-3 ओमेगा-6, विटामिन-ई और बी-6 तंत्रिका-तंत्र (नर्वस सिस्टम) के लिए आवश्यक होता है। इसके द्वारा नकारात्मक विचारों से लड़ने में सफलता मिलती है। अखरोट खाने में रूचिकारक व मीठा होता है। शीत ऋतु इसे खाने का सबसे उत्तम समय है क्योंकि ठंडे वातावरण में मानव की पाचन शक्ति तेज होती है तथा शरीर में प्रतिरोधी क्षमता भी बनी रहती है।

छुहारा-यह एक ऐसा मेवा है जिसके सेवन से अनेकों फायदे हैं। इसे भिगोकर, पीसकर दूध में उबालकर खाएं-पिएं तो मानव के शरीर में विटामिन-डी की कमी पूरी होती है, हड्डिïयां मजबूत होती है। साथ ही इसके प्रतिदिन खाने से पेट की गैस संबंधित तकलीफ दूर होती है।

 

किशमिश-मुनक्का-किशमिश कफ दूर करता है। किशमिश और मुन्नके को  पानी में भिगोकर और पीसकर पेस्ट बनाकर गर्म दूध के साथ लेने से पेट जनित बीमारियां जैसे- दस्त, कब्ज, पेट-दर्द, आदि दूर होते हैं। इनमें विटामिन-सी की मात्रा भरपूर होने से ये बहुत ही फायदेमंद माने जाते हैं। इनके नियमित सेवन से आंखों की रोशनी में वृद्घि होती है, घाव जल्दी ठीक होते हैं, पाचनशक्ति मजबूत होती है तथा दांतों को भी लाभ पहुंचता है।

 

सफेद तिल-अन्य मेवों की तरह सफेद तिल भी मेवों के समूह में ही आते हैं। इन्हें भिगोकर खाने से ये अधिक लाभदायक होते हैं। यह हृदय संबंधी बीमारी में सर्वोत्तम इलाज माना जाता है। इसमें कैल्सियम बहुत ज्यादा होता है। यह डाइबिटीज में भी अत्यंत हितकारी है। जोड़ों के दर्द में सफेद तिल को भिगोकर पीसकर खाने से लाभ होता है। मूत्र संबंधी कठिनाई भी इनके सेवन से दूर हो जाती है। सफेद तिलों का सेवन शीत ऋतु में करने से शरीर को खूब गर्मी मिलती है।

 

बादाम-सर्दियों के मौसम में खांसी और कफ की समस्या में बादाम खाना लाभकारी है। इसमें मिलने वाले सोडियम, मैग्नीशियम और विटामिन-ई तनाव दूर करने में सहायक होते हैं। यह गुणों से भरपूर है। परंतु इसे सीधे कच्चा खाने के बजाय इसे पानी में भिगोकर, छीलकर व पीसकर ही खाना चाहिए। दूध में उबालकर भी इसे पिया जा सकता है। यह हृदय के लिए बहुत ही फायदेमंद है।

 

चिलगोजा-यह खाड़ी देशों में पाया जाने वाला ड्राई-फूट है जो काफी महंगा होता है। इसे भिगोने की जरूरत नहीं, इसकी गिरी को छीलकर तुरंत ही खाया जा सकता है। यह आयरन का भरपूर स्रोत माना जाता है। इसको खाने से हड्डियां व सिर के बाल मजबूत होते हैं।

 

काजू-इसको खाने का अपना ही मजा है। इसे सूखे मेवों का राजा भी कहा जाता है। इसमें मौजूद सोडियम, मैग्नीशियम और विटामिन-ई तनावमुक्त नींद लाने में मददगार होते हैं। सर्दियों में इसका सेवन शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसे तलकर, भूनकर अनेक तरह से खाया जाता है। परंतु इस तरह खाना स्वाद के लिए सही पर सेहत के लिए हानिकारक होता है क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा होता है। इसे पीसकर गर्म दूध में पीने से फायदा होता है क्योंकि यह कैल्सियम से भरपूर होता है।

 

चिरौंजी-यह भी सूखे मेवों के समूह का महत्त्वऌपूर्ण मेवा है। इसे भिगोकर खाने से शरीर में रक्त की कमी पूरी होती है। इसका नियमित सेवन त्वचा संबंधी ऌपरेशानियां झांइयां मुंहासे दूर करने में सहायक होता है। इससे त्वचा का रंग भी साफ होता है।

 

नारियल-सूखा नारियल भी मेवों की श्रेणी में ही गिना जाता है। यह खुद में पूर्ण मेवा है। इसमें काफी मात्रा में विटामिन-डी व कैल्सियम पाया जाता है। बालों की खूबसूरती के लिए नारियल अत्यंत ही लाभकारी माना जाता है।

 

मूंगफली-इसे गरीबों का ड्राई फ्रूट कहा जाता है। इसमें वसा खूब मात्रा में पाई जाती है। ये बहुत ही सस्ता व आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा इसमें मौजूद अन्य पोषक तत्त्व रक्त वाहिकाओं द्वारा भरपूर मात्रा में ऑक्सीकृत मस्तिष्क तक पहुंचाते हैं। इसे आप सर्दियों में गुड़ के साथ भी खा सकते हैं।

 

सूखे मेवे खाने का तरीका-सूखे मेवों को खाने का भी एक तरीका होता है ताकि उनका ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। सख्त सूखे मेवों को हमेशा भिगोकर ही खाना चाहिए क्योंकि अगर इन्हें बिना भिगोए खाया जाता है तो ये बहुत ज्यादा सख्त होते हैं और इन्हें पचाने के लिए आंतों को बहुत ज्यादा परिश्रम करना पड़ता है और जब तक वो पचने लायक होते हैं तब तक वो मल के साथ निकल जाते हैं। इसके उलट यदि मेवों को भिगो दिया जाता है तो वे मुलायम हो जाते हैं और इससे उनको पचाने में आंतों को 

ज्यादा ऊर्जा नहीं लगानी पड़ती। संतुलित और नियमित रूप से मेवों का सेवन आपको ठंड में सर्दी से लेकर हार्ट अटैक तक से बचाने की ताकत रखता है। 

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