चाय करे, रोगों को बाय

प्राची प्रवीन माहेश्वरी

13th January 2021

चाय के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह नींद भगाने वाला पेय है, परन्तु क्या आप जानते हैं कि, इसके कई स्वास्थ्य संबंधि लाभ भी हैं? विभिन्न प्रकार की चाय से होने वाले स्वास्थ्य लाभों को जानने के लिए पढें यह लेख।

चाय करे, रोगों को बाय

अदरक, इलायची, लौंग मिली चाय अगर मिल जाए तो पीने वाले की थकान रऌफू चक्कर हो जाती है। कहने को तो चाय एक ही तरह की मानी जाती है परन्तु क्या आप जानते हैं कि चाय भी बहुत तरह से बनाई जा सकती है और उनके लाभ भी अलग-अलग होते हैं। 

ग्रीन टी- हरी चाय सुनने में थोड़ा सा अजीब लगता है परन्तु क्या आप जानते हैं कि हरी चाय बहुत ज्यादा गुणकारी होती है। यूं तो चाय का सेवन दुनिया का 90 प्रतिशत इंसान करता है। जो चाय का शौकीन है उससे अगर ये पूछा जाए कि वो चाय क्यों पीता है तो वो यही कहेगा कि चाय उसकी थकान दूर करके उसे ताजगी प्रदान करती है। उसे पुन: उत्साह से भर देती है।

परन्तु इन चाय के शौकीन लोगों को ये नहीं मालूम कि अगर हरी चाय का सेवन किया जाए तो उनकी न केवल थकान दूर होगी बल्कि इसके साथ ही उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी।

वैज्ञानिकों ने अपने शोध की विस्तृत रिपोर्ट में कहा है कि हरी चाय का नियमित सेवन कैंसर के विकास को रोकता है। अधसूखी चाय की पत्तियों से बनायी गयी ग्रीन टी बेहद फायदेमंद होती है। हरी होने के कारण ये काफी खुशबूदार होती है। कैमोलिया सिनेन्सिस नामक पदार्थ हरी चाय के पौधों में विद्यमान होता है जो कैंसर सेलों को नष्ट करता है व अन्य अंगों के क्षय को रोकता है।

ब्लैक टी-इस चाय में कैफीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। ज्यादा कड़क चाय पीने वालों को ब्लैक टी पीकर ही परम संतुष्टि होती है। इसमें पाए जाने वाले फ्लेवेनॉयड नामक तत्त्व एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं व शरीर में शुगर लेवल को कम रख के खून के संचार को ठीक करते हैं। ये शक्तिवर्धक होती है परंतु इसे कम मात्रा में व कभी-कभी पीना ही अधिक लाभकारी होता है।

हर्बल टी-हर्बल टी आयुर्वेदिक गुणकारी जड़ी-बूटियों से मिलकर बनती है। यद्यपि इसका स्वाद थोड़ा सा कसैला कहा जा सकता है परन्तु इसके बावजूद ये ताजगी के साथ शक्तिप्रदाता भी होती है। ये शरीर से अनचाही चर्बी दूर करती है व पाचन शक्ति बढ़ाती है। रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है तथा स्मरण शक्ति को तेज करती है।

ओलौंग टी- ये चाय सिर्फ जापान व चीन में ही पी जाती है। ये कोलेस्ट्रॉल कम करती है व त्वचा को मुलायम व चमकदार बनाती है। हड्डियों को मजबूती देती है और थकान तो दूर करती ही है।

व्हाइट टी-इसका सेवन पश्चिमी देशों में अधिक किया जाता है। इसका स्वाद कसैला सा होता है परन्तु ये बहुत ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक चाय होती है। झुर्रियां कम करती है, आंखों की रोशनी बढ़ाती है व आयरन की कमी को पूरा करती है।

चाय से स्वास्थ्य लाभ

  • चाय दुनिया भर में पानी के बाद सबसे अधिक पिया जाने वाला पेय है। हाल के वर्षों में चाय के प्रभावों के बारे में व्यापक अनुसंधान हुए हैं। चाय के सेवन से कई तरह के कैंसर, हृदय रोग, गुर्दे की पथरी, दांतों में छेद जैसी कई व्याधियों से बचा जा सकता है।
  • चाय से चैन तो मिलता ही है, इसकी मुलायम पत्तियों में मौजूद तत्त्वों टैनिन, फ्लेवोनॉयड्स, फ्लोराइड थायमिन, कैफीन, विटामिन-सी, खनिज और चाय को एक अनोखा, स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक तथा सौंदर्यवर्धक पेय बनाते हैं।
  • चाय त्वचा की रक्षा में सहायक है। यह तनाव दूर भगाता है। जरा सोचिए भारी व्यस्तता के बीच आपको अगर चाय की एक गर्मागर्म प्याली मिल जाए तो कैसा लगेगा।
  • टी बैग को भिगोकर त्वचा पर लगाने से तुरंत ताजगी का एहसास होता है।
  • दो पूरे सूखे आंवले, एक पूरी फली शिकाकाई, थोड़ी-सी ब्राह्ïमी व आधा छोटा चम्मच चायपत्ती, पाव भर पानी में डालकर लोहे के बर्तन में उबाल कर ठंडा करें या रात भर भिगोकर रखें। फिर इस मिश्रण को छान कर बालों पर तेल की भांति रगड़ कर किसी पोलीथीन से सिर को बांध दें, ताकि सिर से पानी न टपके। तीस मिनट बाद सिर को अच्छी तरह सादे पानी से धो डालें। सप्ताह में एक बार यह प्रयोग करें। इससे बाल काले, लंबे, चमकदार हो जाएंगे।
  • पुदीने की पत्ती डालकर चाय पीने से मोटापा कम होता है।
  • अनिद्रा से उत्पन्न थकान चाय पीने से दूर हो जाती है।
  • चाय की पत्ती को पानी में डालकर उबालिए, छानकर गरारे कीजिए, गले के दर्द में आराम मिलेगा।
  • प्रयोग की गई चाय की पत्ती को अच्छी तरह धोकर, छान कर धूप में सुखा लें। इसे कपूर के साथ जलाएं, इससे मक्खी-मच्छरों से राहत मिलेगी।
  • दो मग पानी में तीन चम्मच चाय की पत्ती डालकर खूब उबालें। फिर इसे छान लें। बालों को शैंपू करने के बाद, इस पानी से बालों को आखिरी बार अच्छी तरह धो लें। इससे बालों की कंडीशिनिंग भी हो जाएगी और बाल चमकदार भी बनेंगे।
  • बालों पर मेहंदी का गाढ़ा रंग चढ़ाने के लिए चाय को उबालकर छान लें। ठंडा होने पर मेहंदी को उस पानी से घोलें। इससे बालों पर मेहंदी का गाढ़ा रंग चढ़ेगा।
  • दांत के दर्द में, दाढ़ में कीड़ा लगने से कैविटी बन जाती है, जिसका इलाज होता है, उसकी फिलिंग करवाना अथवा उसे उखड़वा देना। पर यदि आपने इसका इन दोनों में से ही कोई इलाज न किया हो, तो एक बार दाढ़ में दर्द होने पर उसे शांत करना बड़ा मुश्किल होता है। जैसे ही दाढ़ में दर्द उठे, चाय की चुटकी भर पत्ती लेकर दाढ़ की कैविटी में भर लें। कुछ ही समय में दर्द से राहत मिल जाएगी।
  • चाय की पत्ती को उबालकर उसका पानी छान लें। इस पानी को ठंडा करके इसमें रुई के फाहे भिगोकर आंखों के ऊपर रखकर दस-पंद्रह मिनट रखें। इससे थकी आंखों को आराम मिलता है और आंखें चमकदार बनती हैं।

चाय का इतिहास

चाय को वनस्पति विज्ञान की नामकरण सूची में कैमेलिया सेनन्सिस के नाम से जाना जाता है। एक उत्तेजक और नशीले पेय पदार्थ के रूप में चाय का प्रयोग प्रारम्भ में नींद भगाने के लिए किया जाता था। चीन में इसकी पत्तियों को उबालकर स्वास्थ्य वृद्धि की औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता था, जबकि एशिया के कुछ अन्य देशों में चाय की पत्तियों का अचार डाला जाता है। चाय का प्रस्तुतिकरण, जापान में तो सामाजिक और धार्मिक महत्त्व का संस्कार हुआ करता था। इसके अतिरिक्त थाइलैंड और बर्मा जैसे देशों में चाय की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है। थाईलैंड में सब्जी को च्मिआंगÓ और बर्मा में च्लेप्पेटसोÓ कहते हैं।

प्रचलित लोककथाएं

चाय की खोज के बारे में निश्चित रूप से कोई प्रमाणित आधार नहीं है। पर इसकी उत्पत्ति के विषय में कई दिलचस्प लोक कथाएं प्रचलित हैं। शताब्दियों पहले चीन में एक बौद्धभिक्षु ध्यान मग्न थे। इसी ध्यानावस्था में उन्हें इस घटना पर क्षोभ हुआ और क्रोधवश उन्होंने आंखें बंद करने वाली पलकों को काटकर जमीन पर फेंक दिया। पलकों के जमीन पर गिरने से ही पत्तियों वाला एक पौधा उगा जिसकी पत्तियों द्वारा बने पेय पदार्थ को नींद भगाने के काम में उपयोग किया जाने लगा।

भारतीय किंवदन्ती के अनुसार उस बौद्ध भिक्षु का नाम 'धर्म' था और उन्होंने एक बार सात वर्ष तक लगातार तपस्या करने का व्रत लिया किंतु पांच वर्ष भी पूरे नहीं हुए थे कि उन्हें नींद आने लगी। अचानक उन्हें कुछ ध्यान आया और पास लगे पौधों की पत्तियां तोड़कर उन्होंने खा ली। इसके फलस्वरूप उनकी नींद दूर हो गई और वह अपनी तपस्या पूरी करने में सफल हुए।

परन्तु जापानियों का 'धर्म' नामक संत के विषय में यह मानना है कि उनके द्वारा अपनी दोनों आंखों की पुतलियों को निकाल फेंकने से ही चाय के पौधे की उत्पत्ति हुई।

जो भी हो चीन के ही एक कवि लू-चू ने ही सन् 780 ई. में चाय पर 'चाचिंग' नाम से एक ग्रंथ लिखा।

वैसे तो चाय में पौष्टिकता जैसी कोई चीज नहीं है। इसका प्रयोग भी प्रारंभ में एक उत्तेजक पदार्थ एवं नींद भगाने वाली दवा के रूप में किया गया था। इसमें बहुत थोड़ी मात्रा में विटामिन सी उपस्थित होता है और थोड़ी सी मात्रा में कैफीन का प्रभाव भी रहता है। चाय के एक प्याले में औसतन 4 कैलोरी ऊर्जा और एक ग्रेन कैफीन रहती है। प्राय: चाय में कैफीन, टैनिन, रेशा, क्लोरोफिल, प्रोटीन, मोमी पदार्थ, गौंद तथा वोलाटइल तेल उपस्थित होता है। इसके अतिरिक्त चाय में विटामिन बी, कॉम्पलेक्स और निकोटिन एसिड भी पाया जाता है। वोलाटाइल तेलों से चाय का स्वाद तैयार होता है, तो कैफीन, स्फूर्तिदायनी का काम करती है। 

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