जानें मेटाबोलिक टेस्ट क्या है और क्यों है जरूरी

मोनिका अग्रवाल

11th January 2021

हमारे शरीर में मौसम और समय दोनों के साथ कई तरह के बदलाव दिखते हैं। ये बदलाव शरीर में ज्यादा पोषक तत्वों, आहार में असुंतलन, या प्रोटीन की बहुत अधिक मात्रा भी हमारे लिए हानिकारक होते हैं। जिससे मेटाबोलिक की समस्या यानि चयापचय हो सकता है।

जानें मेटाबोलिक टेस्ट क्या है और क्यों है जरूरी

हमारे शरीर में समय के साथ बदलाव होने जायज हैं, लेकिन ये बदलाव हमारी हेल्थ के हित में हों तो और भी ज्यादा बेहतर होगा। लेकिन वहीं अगर ये बदलाव हेत्थ के हित में ना हो तो इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। आपको इसके लिए ख्याल रखना होगा कि आपके शरीर में कहीं पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा तो नहीं हो रही? क्या आप जो आहार ले रहे हैं वो सही है या नहीं? अगर ऐसा है तो आपको मेटाबोलिक यानी की चयापचय की समस्या हो सकती है। मेटाबोलिक आपके द्वारा ली गयी कैलोरी को कंट्रोल तोड़ने और शरीर को काम करने के लिए जरूरी ऊर्जा में बदलने का काम करता है। क्या है मेटाबॉलिक परीक्षण और क्या है इससे जुड़ी पूरी जानकारी आज के इस खास लेख के जरिये हम आपको बताएंगे।

  1. क्या है मेटाबोलिक टेस्ट?- आपके शरीर में आपका मेटाबोलिक जितना ज्यादा होगा, आप उतनी ही आसानी और तेजी से अपना वजन कम कर पाएंगे। आपके शरीर में मेटाबोलिक को सही सीमा पर निर्धारित करना बेहद जरूरी है। जिसके लिए इसका परीक्षण करना होगा। हर परीक्षण आपके मेटाबोलिक यानि की चयापचय के हर प्रमुख तत्व के बारे में जानकारी देते हैं। हालांकि कुछ परीक्षण की मदद से मेटाबोलिक आपके द्वारा बर्न की गयी कैलोरी के संक्या के बारे में जानकारी देता है।

2. लैक्टेट थ्रेशोल्ड टेस्ट- हमारे शारीरिक गतिविधियों के दौरान थ्रेशोल्ड खून में लैक्टिक एसिड का तेजी से निर्माण करता है। आप इसे एक्सेरसाइज़ के जरिये हटा सकते हैं। इससे अकसर मांसपेशियों में थकान होने लगती है। इसके आलावा शरीर में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, थकावट महसूस कर सकते हैं। हर किसी के शरीर में लैक्टेट की सीमा भी अलग-अलग होती है।

3. कहां कर सकते हैं टेस्ट- कोई भी परीक्षण क्यों ना हो बात जब शरीर और उससे जुड़ी हेल्थ की हो तो एक फिटनेस सेंटर और अच्छी चिकित्सा सुविधा के साथ करवाना ही बेहतर होता है। हालांकि मेटाबोलिक के परिक्षण के रिजल्ट की जरूरत नहीं होती। आप किसी विश्वसनीय परीक्षण सुविधा के बारे में अच्छे डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं। आमतौर पर इससे जुड़े परीक्षण काफी महंगे होते हैं। इस बात का फैसला आपको ही लेना है कि आपको टेस्ट कहां करवाना है।

घर पर टेस्ट- मेटाबोलिक से जुड़े हर तरह के टेस्ट आप अपने घर पर भी करवा सकते हैं। इसमें आप कुछ ऐसे टेस्ट को जोड़ सकते हैं जिनकी वजह से मेटाबोलिक बार-बार प्रभावित हो रहा है। जिसमें कोलेस्ट्रोल, इंसुलिन, प्रोजेस्टेरोन, थायराइड शामिल हैं। आप होम किट के जरिये घर पर ही मेटाबॉलिज्म टेस्ट कर सकते हैं।

सेंटर पर टेस्ट- मेटाबोलिक से जुड़े टेस्ट आप अच्छी मेडिकल सुविधा के साथ अच्छे फिटनेस सेंटर में करवा सकते हैं। मेटाबोलिक से जुड़े टेस्ट कई कई हिस्सों में किये जाते हैं। जिसमें हमेशा  लगभग कैलोरीमीटर टेस्ट भी शामिल होता है। इस टेस्ट में लगभग 15 से 30 मिनट का समय लगता है। जहां इस्तेमाल किये जाने वाले उपकरण भी अलग ही होते हैं। इस तरह के परीक्षण में  आरएमआर को आंका जाता है।

4. ऐसे बढ़ता है मेटाबोलिक- आप हर रोज व्यायाम और एक्सेरसाइज़ करते हैं तो इससे आपके मेटाबोलिक दर में भी बदलाव आता है। एक्सरसाइज करने से मेटाबॉलिज्म को कई घंटों के बाद तक एक्टिव रहता है। आप एनारोबिक और एरोबिक दोनों तरह के व्यायाम से मेटाबोलिक की दर को पॉजिटिव रूप से प्रभावित कर सकते हैं। अगर आप उम्रदराज हैं या आपका आधे से ज्यादा समय बिस्तर पर ही गुजरता है तो अपने लिए अच्छे व्यायाम की जानकारी लें। 

5. लें संतुलित आहार- जैसा की हर किसी को पता है कि एक संतुलित आहार हमारे लिए कितना ज्यादा जरूरी है।  क्योंकि इसी के आधार पर ही हमारा शरीर बनता और बिगड़ता है। एक अच्छे आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल होता है। प्रोटीन खाने से शरीर में मेटाबोलिक की दर बढती है। आप रनिंग करके की अपनी कैलोरी को तेजी से बर्न कर सकते हैं। जो आपके मेटाबॉलिज्म को सही दिशा देने में मदद भी करती है। 

हमारा शरीर स्वस्थ्य रहे और सही दिशा में काम करता रहे इसके लिए जरूरी है शरीर के द्वारा हमाए खाने को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया भी ठीक रहे। इसलिए हमारा मेटाबोलिज्म ठीक रहे इसकी जिम्मेदारी भी हमारी ही है।

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