बच्चों संग बिताएं क्वालिटी टाइम

प्राची प्रवीन महेश्वरी

16th January 2021

बच्चों के लिए आज उनके मां-बाप के पास ही वक्त की कमी है। कहने के लिए तो वो सब कुछ अपने परिवार को खुशहाल रखने और बच्चों के सुखद भविष्य के लिए करते हैं, लेकिन बच्चों को सुख-सुविधाओं की बजाए आपका भरपूर स्नेह और वक्त चाहिए होता है, क्योंकि आप अपने नन्हे-मुन्ने के साथ जितना वक्त गुजारेंगे वो आपके उतने ही करीब होंगे।

बच्चों संग बिताएं क्वालिटी टाइम

आज वक्त की भागमभाग में सबसे ज्यादा जिस चीज की कमी आई है वो है- एक दूसरे के लिए समय की। पहले लोगों ने दूसरों को समय देने में कटौती की पर इस आदत ने उसे ऐसा जकड़ा कि आज वो दूसरों के साथ-साथ अपनों के लिए भी वक्त निकालने में असमर्थ हो रहा है। दूसरों की अनदेखा कर रहा है या उसको मजबूरी में अनदेखा करना पड़ रहा है। आज इसका प्रभाव माता-पिता व उनके बच्चों पर भी पड़ रहा है। प्राय: माता-पिता बच्चों को चाहते हुए भी भरपूर समय नही दे पा रहे हैं। इसका प्रमुख कारण माता-पिता की बढ़ती व्यस्तता है, परंतु कुछ इस तरह से वे अपने बच्चों को समय दे सकते हैं, उनके साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं। निम्र सुझावों को अपनाकर आप पाएंगे कि जीवन में ना केवल आप संतुष्टी की तरफ बढ़ रहे हैं बल्कि अपने बच्चों को भी संतुष्ट कर रहे हैं।

 

सुबह से शुरुआत करें

दिन की शुरुआत अपने बच्चों के साथ समय बिताकर करें। जिस भी उम्र का बच्चा हो जरूरत के हिसाब से आप उससे जुड़े कार्यों की लिस्ट बनाएं। यकीन मानें, जितना समय आप अपने बच्चों को देते हैं, उनसे आपका रिश्ता उतना ही मजबूत भी होता जाएगा। सुबह उठते ही देखें कि किन-किन कामों में आपके बच्चों को आपकी जरूरत पड़ेगी। उन सभी कामों को करने की जिम्मेदारी आप लें। माॄनग वाक, योगा, स्कूल कॉलेज के लिए तैयारी में उनकी मदद करें। आपका साथ बच्चे के मानसिक व शारीरिक विकास में सहायक होगा।

गेम्स

गेम्स साथ में खेलकर आप बच्चों को जो मजबूती देंगे उसका अंदाजा लगाना भी कठिन है। बच्चों की उम्र के हिसाब से आप इनडोर गेम्स हो या आउट डोर गेम्स कुछ भी खेल सकते हैं। इस तरीके से आप बच्चों के साथ फन टाइम बिताएंगे साथ ही सीखने की क्षमता व रचनात्मकता भी बढ़ाएंगे। बच्चे के साथ आप भी कुछ नया सीखेंगे। बच्चों के साथ खेल-कूद, गेम्स के माध्यम से उनकी फिजिकल व मेंटल एक्सरसाइज भी होगी जो जीवन भी उनको मजबूती देगी।

 

कहानी-किस्से सुनाना

आप एक रुटीन बनाएं कि बच्चों को कोई भी प्रेरणादायक कहानी या प्रसंग जरूर सुनाएं, विशेषकर समाज देश व धर्म से जुड़ा किस्सा। इससे बच्चों में अच्छी सोच आएगी और बच्चे अपने देश व धर्म के बारे में जान पाएंगे। उनकी रोचकता बढ़ेगी व बच्चे ना केवल आपसे जुड़ेंगे बल्कि उनमें अच्छी सोच भी विकसित होगी। इसके साथ उनको अपने बचपन के मजेदार और स्कूल वगैरह के किस्से भी सुनाएं।

एकसाथ खाना

पूरा परिवार जब साथ बैठकर खाना खाता था उस बात को आज समाज लगभग भूल सा गया है। आज लोग एक जगह नहीं बल्कि अलग-अलग कमरों में बैठकर खाना खाना ज्यादा पसंद करते हैं, जो एक गलत राह है। अगर इस राह पर आप चल पड़े हैं तो भी खुद को रोकिए। साथ बैठकर एक पूरा परिवार खाना खा सके ऐसी व्यवस्था करिए। बच्चों को अपने साथ ही बिठाकर खाना खाने की आदत डालें। अगर बच्चे छोटे हैं तो उनको अपने हाथों से खाना खिलाएं और बड़े हैं तो उनको अपने साथ बिठाकर खिलाएं। बच्चों को भोजन की महत्ता समझाएं कि कैसे एक किसान हल जोतकर कठिनाई से अन्न उगाता है। इसलिए हमको कभी भी अन्न को बरबाद नहीं करना चाहिए।

पौष्टिक भोजन

आजकल फास्ट फूड, जंक फूड का प्रचलन है। बच्चे क्या बड़े भी इन्हें बहुत चाव से खाते हैं। लेकिन बड़ों को चाहिए कि वो बच्चों को पौष्टिक आहार की महत्ता समझाने से पहले खुद भी पौष्टिक आहार की महत्ता समझें व अपनाएं और फिर बच्चों को जब आप समझाएंगे तब ही वे इस बात को समझ पाएंगे और हां, उनसे ये बात कहना बिलकुल भी ना भूलें कि जंक व फास्ट फूड खाना बुरा नहीं होता, स्वाद बदलने के लिए आप कभी-कभी जरूर खाएं पर रोज नहीं। रोज अगर आप खाते हैं, तो निश्चित ही ये आपके लिए हानिकारक रहेगा।

 

वृक्षारोपण

वृक्षारोपण यानि पौधे लगाना एक ऐसा कार्य है, जो आप स्वयं भी करें और अपने बच्चों से भी कराएं। जब वो बीज से एक पौधा बनते देखेंगे तो निश्चित ही वो जीवन की महत्ता व प्रकृति की रक्षा कैसे कर सकते हैं ये भी सीखेंगे। जो भी बीजारोपण आप कराएं उसमें उनसे रोज पानी देने के लिए कहें। वृक्षारोपण का क्या महत्त्व है, कैसे ये प्रदूषण को कम करते हैं, बचपन से ही उनको जब इस बात की समझ होगी तब वे ना केवल खुद प्रकृति, प्रदूषण, पर्यावरण, वृक्षारोपण जैसे शब्दों को समझेंगे बल्कि अपने जीवन में इस सबको अपनाकर दूसरों को भी ये सब करने के लिए प्रेरित करेंगे।

शॉपिंग करना सीखाएं

बड़े बच्चों को घर की जरूरी सामान की शॉपिंग करते वक्त साथ लेकर जाएं। उनको चीजों का मोल-भाव करना सिखाएं। सब्जी, फल खरीदना सिखाएं।

बचत करना

बचपन से ही बच्चों में बचत की आदत डालें। उनको एक गुल्लक यानि पिगी बैंक लाकर दें। उनको कुछ पैसे दें और पिगी बैंक में रखने और सेव करने को कहें। और इससे वो अपने व अपनों के लिए सामान खरीदें और गिफ्ट के तौर पर दें। इससे उनके दिल में ना केवल सेविंग नेचर आएगी बल्कि अपनों के लिए भी कुछ करने का जज्बा उनमें बचपन से ही आएगा।

यदि आप इन सुझावों को अपनाएं तो निश्चित तौर पर आपके बच्चे आपके और भी करीब आएंगे और आप उनके लिए दिल-दिमाग से कुछ अच्छा कर पाएंगे।

यह भी पढ़ें -फेशियल मास्क से जुड़ी ये बातें आप जानती हैं क्या?



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