सर्दी के मौसम में बच्चों की देखभाल ऐसे करें

प्राची प्रवीन महेश्वरी

16th January 2021

सर्दियां शुरू हुई नहीं कि माएं अपने नन्हे-मुन्नों को सिर से पैर तक ऊनी कपड़ों से ढंक देती हैं ताकि उनके नवजात शिशुओं को कहीं से भी ठंड अपनी चपेट में ना ले सके। ऊनी कपड़ों के अलावा कुछ उपाय भी हैं, जिनसे आपके शिशु ठंड में भी राहत की सांस ले सकते हैं।

सर्दी के मौसम में बच्चों की देखभाल ऐसे करें

सर्दी का मौसम सबसे ज्यादा स्वस्थ व सुंदर माना जाता है बशर्ते सही तरह से उसमें बचाव के साथ रहा जाए। खासकर छोटे बच्चों को सदी में बचाव की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। छोटे बच्चों की सर्दी में देखरेख का दायित्व माता-पिता पर ही होता है। अत: उन माता-पिता को जिनके बच्चे छोटे हैं उनको चाहिए कि वो बच्चों की देखभाल करते वक्त सर्दी में निम्र बातों का विशेष ख्याल रखें-

वूलन कपड़े

छोटे बच्चों को कपड़े पहनाते वक्त विशेष ध्यान रखें उनको सबसे पहले वूलन इनर जरूर पहनाएं ताकि उनको सीने में गरमाहट रहे क्योंकि सीने की गरमाहट से पूरी शरीर को गरमाहट व राहत मिलती है। उसके बाद 2 या 3 स्वेटर मौसम की जरूरत के हिसाब से पहनाएं।

  • बच्चों के सिर, पैर, कानों को हमेशा ऊनी कपड़ों से ढंककर रखें क्योंकि इन तीनों के ऊपर सबसे ज्यादा ठंड का असर पड़ता है और सबसे जल्दी ये ठंड की चपेट में आ जाते हैं। अत: इनको कवर करके ही रखें।
  • छोटे बच्चों के कपड़ों का चयन करते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चों के कपड़े हल्के, मुलायम व गर्म हो। कपड़े भारी बिलकुल ना हो, ताकि बच्चे उनको आसानी से पहन सकें।
  • हाथों में दस्ताने व पैरों में मोजे पहनाएं, साथ ही पैंट के नीचे वार्मर भी पहनाएं, जिससे बच्चे गरमाहट से भरे रहें। ठंड कम हो तो वार्मर न पहनाएं।
  • मोजे व दस्ताने ठंड में ऊनी कपड़ों के ही लें तभी फायदा होगा अन्यथा नहीं।

स्नान यानि बाथ

अगर तापमान बहुत ठंडा हो तो बच्चों को एक दिन छोड़कर नहलाएं, रोज ना नहलाएं। उम्र के हिसाब से ही नहलाएं। 0-5 वर्ष तक के बच्चों को कम ही नहलाएं। 5-10 तक रोज नहला सकती हैं। बाकी स्वास्थ्य और मौसम भी देख लें तभी नहनाएं। बच्चों को नहलाने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखें- सबसे पहले बच्चों की तेल मालिश करें। 5 वर्ष तक के बच्चों की  रोज तथा 5-10 वर्ष के बच्चों की सप्ताह में एक बार जरूर मालिश करें (कोई भी बेबी ऑयल ले लें या फिर सरसों या गोले या तिल का तेल भी ले सकते हैं।) मालिश बंद कमरे में करें तो अच्छा होगा। अगर ठंड ज्यादा है तो हीटर लगाकर कर लें हीटर लगाते वक्त कमरे में ऑक्सीजन लेवल बना रहे। 

  • छोटे बच्चों को लिटाकर व बड़े बच्चों को बिठाकर मालिश करें, मालिश नीचे से ऊपर की तरफ करें तो खून का प्रवाह सही होता है और तेल त्वचा के अंदर जाकर त्वचा के रुखेपन को दूर करता है जिससे ना केवल रंग साफ होता है बल्कि त्वचा मुलायम भी हो जाती है।
  • नहलाते समय हमेशा गुनगुने पानी का ही प्रयोग करें। ठंडे पानी से कभी बच्चों को नहलाने की गलती ना करें। नहलाते समय बाथरूम का ही प्रयोग करें अगर कमरे में नहला रहे हैं तो इसके लिए आप कमरे को बंद करके उसमें हीटर रख कर ही नहलाएं कमरे का तापमान गर्म ही रखें उसमें बाहर से हवा नहीं आनी चाहिए अगर कांच की खिड़की है तो उसमें से रोशनी आती रहे तो अच्छा होगा। खिड़की के शीशे बंद ही रखें।
  • मालिश व नहलाने के बीच में प्राय: 10 मिनट का गैप जरूर रखें, अगर मालिश करते ही नहला देंगे तो खून का प्रवाह बच्चे को पोषण देने में सहायता करता है वह नहीं हो पाएगा। साथ ही मालिश करने से शरीर में एकाएक गर्मी उत्पन्न होती है। अगर गर्म शरीर पर पानी गिरता है तो उसके कारण भी होनि हो सकती है, मालिश करने के 10 मिनट बाद ही बच्चे को नहलाएं।
  • नहलाते समय साबुन-शैम्पू का प्रयोग जरूरत से ज्यादा देर तक ना करें। इसे बच्चे को ठंड लगने का डर रहेगा।
  • नहलाने के लिए बाल्टी में पानी लेकर ही नहलाएं उसके लिए भी शॉवर का प्रयोग ना करें क्योंकि ठंड में शॉवर का देर तक प्रयोग हानिकारक भी हो सकता है।
  • नहलाने के तुरंत बाद ही बच्चे का बदन व सर ढंक दें। बालों को अगर धोया है तो उनको तुरंत सुखा दें, बाल सुखाने के लिए अगर ड्रायर का प्रयोग करें तो दूर से ही। पास से बच्चों को ड्रायर करना हानिकारक होता है।
  • अगर ठंड बहुत ज्यादा है तो कमरे में ही कपड़े पहनाएं। अगर मौसम ठंडा होते हुए भी हवा नहीं है और धूप निकल रही है तो बच्चों को धूप में कपड़े पहनाकर थोड़ी देर तक धूप में भी बिठा सकते हैं।
  • धूप में बच्चों को विटामिन डी मिलता है जो बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी है।
  • भोजन का चयन उम्र के हिसाब से करें। 0-5 साल तक के बच्चों के लिए सूप, दलिया, दूध, शहद, फलों का रस (थोड़ा गर्म करके) प्रयोग करें। खाने में दाल, सब्जी, रोटी व कभी-कभी चावल भी दे सकते हैं (दांत वाले बच्चों को)। बिना दांत वाले बच्चों को आप दूध, दाल का पानी, खिचड़ी दे सकते हैं। 5-10 साल तक के बच्चों को आप फल, रोटी, दाल, दूध, सब्जी, चावल, दही भी खिला सकते हैं। इन बच्चों को ड्राईफ्रूट व शहद भी दें तो अच्छा है।
  • सुलाते वक्त- बच्चों को दिन हो या रात हमेशा घर के अंदर ही सुलायें व सुलाने के लिए बिस्तर का प्रयोग करें। कभी भी जमीन पर ना सुलायें बच्चों को गर्माहट के लिए गर्म पानी की हॉट बॉटल भी दे सकते हैं। ये भी बच्चों को ठंड में सुरक्षा देगी।
  • सर्दी हो जाने पर बच्चों को आप गुनगुने पानी में तुलसी ड्राप डाल कर दें तो राहत मिलेगी। साथ ही शहद, काली मिर्च, अदरक का रस भी चटा सकते हैं। इसको प्रयोग करें पर उम्र के अनुसार ही।
  • दूध में केसर मिलाकर दें।
  • जायफल घिसकर भी अपने बच्चों को दे सकते हैं ठंड में बचाव के लिए।

दवाएं- ठंड होने पर बच्चों के लिए आयुर्वेदिक दवाएं प्रयोग करें। होम्योपैथी दवाएं भी ले सकते हैं। अगर इससे फायदा ना हो तो एक या दो दिन प्रतीक्षा करके किसी अच्छे ऐलोपैथिक डॉ. को दिखाएं और उचित सलाह लेकर उपचार शुरू करें।

 

योग का प्रयोग

आज का समय कहता है कि बच्चों में बचपन से ही योग व प्राणायाम करने की आदत डालें। इससे बच्चे सर्दी में बीमार कम होंगे, जिससे बच्चे स्वस्थ होंगे।

यह भी पढ़ें -होली संग आए पकवान सेहत, सावधान!

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