तुलसी की पूजा करें लेकिन बिलकुल न भूलें ये 9 बातें

चयनिका निगम

17th January 2021

Tulsi plant use to be most pure thing in Indian families.

तुलसी की पूजा करें लेकिन बिलकुल न भूलें ये 9 बातें
तुलसी के पत्ते हर हिन्दू परिवार में एक जरूरी हिस्से की तरह है। घर के आंगन में ना सही तो किसी छोटे गमले में तो तुलसी का पौधा मिल ही जाएगा। ये पौधा आयुर्वेदिक दवाओं में खूब इस्तेमाल होता है। कई कारगर घरेलू नुस्खे इसी से पूरे होते हैं। लेकिन तुलसी पूजा का भी अहम हिस्सा है। पूजा के जल में या प्रसाद में तुलसी के पत्ते डालकर इसका इस्तेमाल नियम से किया जाता है लेकिन इस्तेमाल में छोटी गलती भी आपकी पूजा में विघ्न ला सकती है। इसलिए पूजा में तुलसी को बहुत सोच-समझकर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। तुलसी के पूजा में इस्तेमाल में कौन सी सावधानी बरतनी होगी, जान लीजिए-

भगवान विष्णु के लिए-

तुलसी की पत्ती वैसे तो सभी भगवानों को अर्पित किए जाते हैं। लेकिन तुलसी को सही मैने में विष्णु जी पर ही चढ़ाया जाता है। 

पूजें जरूर-

तुलसी का पौधा अगर घर में है तो आपको उसको बस लगा कर छोड़ नहीं देना है बल्कि उसकी पूजा भी करनी है। पूजा न करना अशुभ माना जाता है और तुलसी का अपमान भी। इसके साथ ही इस पौधे पर जल चढ़ाने से आयु लंबी होने का आशीर्वाद भी माना जाता है। 

कब तोड़ें, कब नहीं-

तुलसी के पत्तों को तोड़ने से भी बचना चाहिए। जब तक जरूरत न ही तुलसी के पत्ते ना ही तोड़ें तो अच्छा। इसको हर दिन नहीं बल्कि किन्ही खास दिनों में ही तोड़ा जा सकता है। आपको तोड़ते समय ध्यान देना है कि वो दिन एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण काल का न हो। इनके साथ ही रात के समय भी तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए। इसे हमेशा सुबह के समय ही तोड़ना सही रहता है। इसके अलावा रविवार, शुक्रवार, अमावस्या, चौदस तिथि, ग्रहण और द्वादशी को तुलसी तोड़ना भी सही नहीं रहता है। 

शिवलिंग पर तुलसी, नहीं-

तुलसी के पत्तों को कभी भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। इस मान्यता के पीछे एक कहानी है। कहानी में राक्षस जालंधर के बारे में बताया गया है। इस राक्षस को विष्णु जी के आशीर्वाद की वजह से अमर रहने का वरदान मिला हुआ था। पर वो इस वरदान को गलत तरह से इस्तेमाल करता था और लोगों को खूब परेशान करता था। भगवान शिव ने उसे मरने का सोचा तो विष्णु जी ने अपना कवच उससे वापस मांग लिया। फिर शिव जी ने जालंधर का वध कर दिया। ये बात उनकी पत्नी को पता चली तो उन्होंने शिव जी को श्रापदिया कि उन पर तुलसी कभी नहीं चढ़ाई जाएगी। 

गणेश जी और तुलसी-

गणेश जी की पूजा में भी तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। मान जाता है कि एक बार तुलसी ने भगवान गणेश को विवाह के लिए कहा। उन्होंने जब कहा कि वो तो ब्रह्मचारी हैं तो उन्होंने गणेश जी को दो विवाह का श्राप दे दिया। इस वजह से गणेश ने तुलसी को राक्षस से विवाह का श्राप भी दिया। श्राप तो बाद में भगवान गणेश ने वापस ले लिया। कहा जाता है भगवान ही तुलसी को देवी का दर्जा दे सकते हैं। मगर गणेश जी पर तुलसी नहीं चढ़ाई जा सकती है। 

घर के अंदर तुलसी नहीं-

घर के अंदर तुलसी का पौधा लगाया जाना बिलकुल भी अच्छा नहीं माना जाता है। दरअसल पौराणिक कथाओं में माना जाता है कि तुलसी के पति की मृत्यु के बाद भगवान विष्णु ने उन्हें अपनी सखी राधा माना था। मगर वो उन्हें घर नहीं ले जाते थे। उन्होंने कहा कि उनके घर पर तो सिर्फ लक्ष्मी की ही जगह है। तो तुलसी ने खुद को घर के बाहर रहना ही सही माना। इस पौधे को आंगन में या फिर सोने के कमरे वाली बालकनी में भी लगाया जा सकता है। 

गुरुवार का दिन-

आपने ये तो जान लिया कि तुलसी का पौधा कब नहीं लगाना चाहिए लेकिन ये भी जान लीजिए कि इसे कब लगा सकते हैं। तुलसी का पौधा लगाने का सबसे अच्छा दिन गुरुवार का माना जाता है। इसमें भी महीने की बात करें कार्तिक का महिना तुलसी का पौशा लगाने के लिए अच्छा माना जाता है। 

मंत्र याद रखें-

तुलसी की पट्टी तोड़ना बहुत जरूरी है तो इसे तोड़ने से पहले एक मंत्र जरूर बोलें-

मातस्तुलसि गोविंद हृदयानंद कारिणी।

नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते।।

तुलसी का पौधा सूखे तो-

तुलसी का पौधा कई बार सूख जाता है। कई लोग इसे आम बात मानते हैं लेकिन तुलसी का पौधा सूख जाना काफी अशुभ माना जाता है। अगर ये पौधा सूखे तो इसे मिट्टी में दबा दीजिए। फिर इसी जगह तुलसी का दूसरा पौधा भी लगा दें। 

 

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