ठहरिए, आगे हेलमेट चेकिंग चालू आहे! - गृहलक्ष्मी कहानियां

विनोद विट्ठल खंडालकर

18th January 2021

दोपहिया वाहन चलाने वालों को अगर यह समाचार मिल जाए कि आगे हेलमेट चेकिंग चल रही है तो चालक रास्ता बदल देता। कुछ अपनी डिक्की में रखे हेलमेट को पहन लेते हैं। यह सब चालक केवल चालान से बचने के लिए करते हैं। इन दोपहिया वाहन चालकों को एक्सीडेंट से मौत का डर नहीं लगता, इसलिए हेलमेट नहीं लगाते।

ठहरिए, आगे हेलमेट चेकिंग चालू आहे! - गृहलक्ष्मी कहानियां

दोपहिया वाहन चलाने वालों को अगर यह समाचार मिल जाए कि आगे हेलमेट चेकिंग चल रही है तो चालक रास्ता बदल देता। कुछ अपनी डिक्की में रखे हेलमेट को पहन लेते हैं। यह सब चालक केवल चालान से बचने के लिए करते हैं। इन दोपहिया वाहन चालकों को एक्सीडेंट से मौत का डर नहीं लगता, इसलिए हेलमेट नहीं लगाते। एक वाहन चालक तो चालान के डर से बगीचे में घूमने निकल गया। बगीचे में उसे एक प्रेमी जोड़ा इश्क फरमाते हुए दिखा, जब वह उनके पास से गुजरा तो उसने देखा प्रेमी पे्रमिका की आंखों में आंखें डालकर कह रहा था, 'प्रिये, मुझे तुम्हारी आंखों में पूरा संसार दिखाई दे रहा है।' चालान से बचने बगीचे में घूम रहे व्यक्ति ने झट से प्रेमी को कहा, 'अरे जरा अपनी प्रेमिका की आंखों में देखकर यह बता दो कि सदर चौराहे पर हेलमेट चेकिंग चल रही है या बंद हो गई है?' हमारे शहर की जनता हेलमेट पहनने से बचना चाहती है। इस चक्कर में बेचारों को गली कूचे से होकर जाने में अपनी बहादुरी लगती है, पर हेलमेट फिर भी नहीं लगाते, क्योंकि यातायात पुलिस वाले तो शहर के मेन चौराहों पर ही हेलमेट की चेकिंग करते हैं। वैसे तो सभी व्यक्ति यातायात पुलिस से बचना ही चाहते हैं, क्योंकि वे आपके पास पेपर होने के बाद भी कोई न कोई कमी निकालकर आपका चालान बना ही देते हैं। इस दौरान दोपहिया वाहन के पुरुष चालक के साथ यदि कोई महिला बैठी है तो उन्हें पुलिस वाले जाने देते हैं। उनका कोई चालान नहीं करते, यानी साथ में बैठी महिला हेलमेट का काम करती है। चेहरे पर कपड़ा बांधे युवतियों को भी हेलमेट न लगाने की छूट है। उन्हें केवल हिदायत देकर छोड़ दिया जाता है। सारी सख्ती युवाओं पर ही दिखाई जाती है। कुछ लोगों की यह भी शिकायत होती है कि पुलिस वाले खुद तो हेलमेट नहीं लगाते वाहन चालकों को हेलमेट लगाने पर सख्ती करते हैं। लोगों की इस शिकायत पर हमारे शहर में बिना हेलमेट लगाए दोपहिया वाहन चलाने वाले पुलिस वालों के चालान काटे गए, जिसका समाचार पत्रों के माध्यम से प्रचार भी किया गया।

एक बार हेलमेट की चेकिंग के दौरान एक युवक मोटरसाइकल पर बिना हेलमेट पुलिस के चंगुल में फंस गया। उस युवक से हेलमेट न पहनने पर 250/ रुपये की राशि बतौर जुर्माना देने की मांग की, पर युवक इतनी राशि देने के पक्ष में नहीं था। उसने पुलिस वालों से कहा, 'मेरे पास तो मात्र 100 रुपये हैं।' तब पुलिस वालों ने कहा 'अच्छा ठीक है आपका चालान नहीं कटेगा बस! 100 रुपये देकर आगे बढ़ जाओ।' उस युवक ने पुलिस वालों से कहा, मुझे तो बहुत आगे जाना है, आप 100 रुपये का चालान बना देते तो आगे के चौराहों  पर उसे दिखाकर मैं आगे बढ़ जाऊंगा।! तब उनमें से एक पुलिस वाले ने कहा आगे चौराहे पर आपको पुलिस रोकती है तो उनसे एक कोडवर्ड कह देना 'तोताÓ। वे आपको आगे जाने देंगे। दूसरे दिन फिर वह युवक बिना हेलमेट के सड़क पर निकला तो यातायात पुलिस ने उसे पकड़ लिया तो उसने पुराना कोडवर्ड 'तोता' दोहराया तो उनमें से एक पुलिस वाले युवक पर लाठी भांजते हुए कहा, 'बेटा आज 'तोता' नहीं 'चिड़िया' है। इस बार उस युवक को हेलमेट न लगाने पर 250/ रुपये का जुर्माना देना पड़ा।

कहीं-कहीं ऐसा भी देखा गया है कि जिस जगह पर हेलमेट चेकिंग चल रही है, वहीं पर एक हेलमेट बेचने वाले की दुकान फुटपाथ पर लगी है। यातायात पुलिस वाले चालान न काटते हुए वाहन चालक को तुरंत उस दुकान से हेलमेट खरीदने को कहते हैं। इस फुटपाथ की दुकान से बेचे जाने वाले हेलमेट की कीमत मात्र 150/ से 200/ रुपये होती है। जो वाहन चालक हेलमेट खरीद लेता है तो उसका चालान नहीं कटता। जब की यातायात विभाग ने आईएसआई सॢटफाइड ही हेलमेट पहनना अनिवार्य किया हुआ है। कुछ नहीं तो उस दुकानदार की तो चांदी हो जाती है, इसका फायदा पुलिस को भी मिलता होगा की नहीं यह एक विचारणीय प्रश्न है।

समाचार पत्रों के माध्यम से इन सब घटनाओं का जिक्र किया जाता है, उसे पढ़ कर भी दोपहिया वाहन चालकों को सीख नहीं लगती। वो अब भी यही कहते हुए पाए गए कि हम तो चालान से बचने हेलमेट लगाते हैं।

यह भी पढ़ें -नाक की पगड़ी

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