मैं अपनी क्वालिटी ऑफ वर्क को ब्रेक नहीं करना चाहती - रसिका दुग्‍गल

रसिका दुग्गल

1st February 2021

'मिज़ार्पुर' में बीना त्रिपाठी का दमदार किरदार निभाने वाली रसिका दुग्गल अपनी एक्टिंग की छाप से सबके दिल में अपनी जगह बना ली है। और अब फिर से एक बार 'मिज़ार्पुर सीजन 2' में अपनी दमदार ऐक्टिंग के जरिये दर्शको का दिल जीतने को तैयार हैं। हमारी प्रतिनिधि ऋचा मिश्रा तिवारी से हुई खास बातचीत के कुछ अंश-

मैं अपनी क्वालिटी ऑफ वर्क को ब्रेक नहीं करना चाहती - रसिका दुग्‍गल

सबसे पहले ये बताए की कैसा था आपका लॉकडाउन?

मेरा लॉकडाउन बहुत व्यस्त (हैक्टिक) गुजरा। मैंने लॉकडाउन के टाइम ही रोज क्राइम सीजन 2 कि शूटिंग खत्म की थी और वो नाइट शिफ्ट की थी। तो पहले 10 दिन तो मैंने बहुत आराम किया क्योंंकि नाइट शिफ्ट में जब आप शूटिंग कर रहे होते हैं तो बहुत थकान हो जाती है। मैंने शुरू में तो सोचा था कि मेरा पूरा लॉकडाउन ऐसे ही सोते हुए गुजरेगा और मैं अपना ख्याल रखूंगी, फेस पैक लगाऊंगी, बालों का ख्याल रखूंगी, अपना ख्याल रखूंगी, एक्सरसाइज करूंगी। शुरू के 10-15 दिन तो ऐसे ही गुजरे परंतु बाद में सब चीजें हेक्टिक होते चली गई। कुछ लोग ऐसे होते हैं ना जो अपने ही चीजें हेक्टिक कर देते हैं, मैं भी वैसी ही हूं। अगर टाइम खाली मिल रहा है तो मुझसे एक लेवल पर बर्दाश्त नहीं होता। मैं कुछ ना कुछ ढूंढ़ लेती हूं करने के लिए। 

वापस से एक बार मिज़ार्पुर में आप अपनी ऐक्टिंग की छाप छोड़ने को तैयार हैं। कैसा लग रहा और इस बार क्या कुछ अलग होगा?

बहुत कुछ अलग होने वाला है 'मिर्जापुर-2' में। इस सीजन में बीना का एक अलग ही रूप रहेगा। बापूजी बीना के साथ जो कुछ करते हैं और उसका बदला तो बीना लेना ही चाहती है और बीना किसी चीज से डरती नहीं है। बहुत ही शातिर तरीके से वह अपना बदला लेगी और वह आपको 'मिर्जापुर-2' में देखने को मिलेगा। साथ ही आपको यह भी देखने को मिलेगा कि वह किस तरह से ह्यूमिलेशन की भावना से लेकर बदले तक की भावना तक किस तरह पहुंची। यह भी एक जर्नी है, यह भी आपको नजर आएगी। लेकिने जब हम सीजन 2 की शूटिंग कर रहे थे तब हमें लग रहा था कि बीना का इतना नया साइड है कि कहीं वह बीनापन रह ना जाए, कहीं मैं वह बीनापन भूल तो नहीं गई, तो मैं हर समय गुरमीत और हमारे डायरेक्टर से उन सभी से यही सवाल पूछा था कि वह बीनापन दिख रहा है ना, तो वह बोलते थे हां सब ठीक है सब दिख रहा है क्योंकि जब आप एक कैरेक्टर को इतने टाइम बाद रिविजिट करते हैं तो वह डर तो रह जाता है कि कहीं आप जो उनकी जो बेसिक पर्सनैलिटी है वह ना भूल जाए।

जिंदगी में बहुत सारे चैलेंज आते हैं। आप अपनी जिंदगी की चुनौतियों का किस प्रकार से सामना करती हैं?

मेरे पास ऐसा कोई नया फार्मूला नहीं है, जैसे नॉर्मल लोग जीते हैं मैं भी वैसे ही सब हैंडल कर लेती हूं। कुछ डिसीजन ऐसे होते हैं जिनकी वजह से हम सफर करते हैं। यह चीज नॉर्मल है। यह तो जिंदगी का हिस्सा है, जिसने भी जिंदगी जी है वह सब तो जानते ही हैं कि यह सब चीजें तो होती ही है। बस यही सीखना है कि हम हर साल, हर टाइम इसे कैसे हैंडल कर सकते हैं क्योंकि लाइफ में अच्छी चीजें भी होंगी और बुरी चीजें भी होंगी और आपको दोनों का सामना करना पड़ेगा। एक तरह से हम अपने बारे में कितना जान सकते हैं, इसे ही मैच्योरिटी और ग्रोथ कहते हैं। क्योंकि हमारी जिंदगी में अच्छा ही अच्छा होना चाहिए हम सब जानते हैं कि ऐसा होता नहीं है। सबकी जिंदगी में कुछ अच्छा और बुरा दोनों होता है। वैसे ही मेरी जिंदगी में भी बहुत सारी अच्छाइयां और बुराइयां हैं और मैं इन्हें बैटर तरीके से हैंडल करती हूं। 

 

एक ऐक्टर होने के साथ ही बेटी, बहू, पत्नी और मां भी हैं, इतने सारे रोल किस तरह से निभाती हैं?

जब भी मुझसे यह सवाल कोई पूछता है तो मुझे बहुत बुरा लगता है कि यह सवाल मर्दों से क्यों नहीं किया जाता। जब मैं कॉलेज में थी इतनी सारी चीजें कर रही थी, थिएटर भी कर रही थी, पढ़ाई भी कर रही थी, जब जॉब करना शुरू किया ऐक्टर बनने से पहले भी और उसके बाद भी और जब शादी नहीं हुई थी और जब मैं घर जाया करती थी तो घर के आस-पास मेरे पेरेंट्स के दोस्त पूछते थे कि शादी कब कर रही हो। तब मैं बोलती थी कि यह सवाल आपने मेरे भाई से क्यों नहीं पूछा। आप लोग क्यों नहीं पूछते कि आपके काम में क्या चल रहा है, आपकी पढ़ाई में क्या चल रहा है, आपकी जिंदगी से आप क्या करना चाहती हो, यह बात तो है कि औरत कुछ भी अचीव कर ले एंड में जाकर उससे सवाल फैमिली के बारे में ही पूछा जाता है और उनसे यह एक्सपेक्टेशन रखी जाती है। चाहे वो जो भी कर ले वह अपने घर का ख्याल रखें लोगों के खाने-पीने का ख्याल रखेंगे और यह सब रिस्पांसिबिलिटी है उन पर ही आएंगे पर अन्फॉच्यूनेट मैं उन लोगों से जुड़ी हुई हूं जो ऐसा नहीं सोचते हैं और यह नॉर्मल है। मुझे लगता है कि उनका ऐसा होना अनयूजुअल चीज है, पर ऐसा नहीं है। हर इंसान को ऐसा ही होना चाहिए और इस तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। 

 

कोई ऐसा रोल जो आप करना चाहती हों?

एक रोल है, मुझे बायोपिक में लीड रोल करने का मन है। क्योंकि वह बहुत इंटरेस्टिंग एक्सपीरियंस हो जाता है। उसमें आप अपने तरीके से अपने इमैजिनेशन से एक कैरेक्टर बनाते हैं। दूसरी कहानियों में ऐसा होता है कि आपको डायरेक्टर के विजन के हिसाब से कैरेक्टर प्ले करना पड़ता है। ऐसा होता है कि लोगों के दिमाग में पहले से उस इंसान की छवि होती है। जब मैंने 'मंटो' में सफिया मंटू का रोल प्ले किया था तब मंटो सफिया के बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते थे। जिस तरह से नंदिता चाहती थी, मैंने वह फॉर्म अपनाया। मुझे लगा आवाज का काम बहुत डिफिकल्ट था और इतने सारे लोग हैं जो मंटो के फैन हैं और उन्होंने बहुत सालों से मंटो की कहानियां पढ़ी हैं। उनके दिमाग में ही कैरेक्टर बसा हुआ है। आप लोगों को कैसे सैटिस्फाई करेंगे यह काम बहुत मुश्किल हो जाता है। यह बहुत इंटरेस्टिंग चैलेंज है तो मुझे बायोपिक में लीड रोल प्ले करना है और अगर मौका मिले तो मैं अमृता प्रीतम प्ले करना चाहूंगी। बहुत सालों से मैं उनके वर्क और उनकी राइटिंग से बहुत इन्फ्लुएंस हुई हूं, उनकी राइटिंग में रोमांटिक आइडिया भी है और एक रिवॉल्यूशनरी आइडिया भी है। 

बीना त्रिपाठी का रोल कितना चैलेंजिंग था आपके लिए?

बीना का कैरेक्टर मुझे इंटरेस्टिंग इसलिए लगता है क्योंकि उसका जो फिजिकलिटी उसमे है वह बिल्कुल मुझसे अलग है। उसकी फिजिकलिटी ऐसी है, जो हर किसी को अट्रैक्ट कर लेती है। जब मैं ऐसी औरतों को देखती हूं तो मुझे लगता है बहुत इंटरेस्टिंग लगती है। ये एक मैग्नेटिक क्वालिटी होती है। मेरी रियल लाइफ में ऐसी क्वालिटी बिल्कुल भी नहीं है। लोग शायद मुझे नोटिस भी ना करें, मैं किसी कमरे में चली जाऊं तो। क्योंकि थोड़ा सा शायनेस है मेरे अंदर। थोड़ी बॉडी लैंग्वेज ऐसी है, जो शाय लोगों की होती है जैसे थोड़ा सा वह लोग दबे हुए रहते हैं। लेकिन बीना पर्सनालिटी बिल्कुल भी ऐसी नहीं है। वह उसकी फिजिकलिटी में नजर आता है। यह मेरे लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज था कि क्या मैं ऐसी फिजिकलिटी अपना पाऊंगी कि नहीं।

पंकज त्रिपाठी जी के साथ काम करने का अनुभव कैसा था?

बहुत ही अच्छा अनुभव था, मतलब मैंने पहले 2012 में इरफान के साथ काम किया था, फिर 17 में नवाज के साथ किया और मेरी ख्वाहिश थी कि मैं पंकज के साथ दोबारा काम करूं। मैंने उनके साथ 'पाउडरÓ में पहली बार काम किया था 2010 में। अभी जब मैं पंकज से मिली 'मिज़ार्पुर' की शूटिंग के दौरान तो मैंने बोला कि मुझे बहुत खुशी हुई कि आप यह रोल कर रहे हैं। क्योंकि मेरा बहुत मन था आपके साथ काम करने का। मेरे दिमाग में वह सीन रह गया था जो हम लोगों ने एक साथ मिलकर किया था। तो उन्होंने बोला, हां पता है मेरे दिमाग में भी वह सीन रह गया था। इनफैक्ट मैंने कुछ दिन पहले ही वह सीन देखा और दोनों ने बहुत अच्छा काम किया था। तो मैंने बोला, चलिए ठीक है इस बार और भी अच्छा करेंगे।

आप अपने दिन की शुरुआत कैसे  करती हैं?

मैं अपने दिन की शुरुआत इस ख्याल से शुरू करती हूं कि मुझे एक्सरसाइज क्यों करना पड़ रहा है। इतने साल हो गए हैं कि मैं रेगुलरली एक्सरसाइज करती हूं, योगा भी करती हूं, जोगिंग भी चाहती हूं। लेकिन हर सुबह मुझे यह ख्याल पहला आता है कि मैं क्यों ना अपना अलार्म तोड़कर बंद कर दूं और वापस सो जाऊं, मुझे एक्सरसाइज के लिए क्यों जाना पड़ रहा है।

हमेशा तरोताजा और खूबसूरत बने रहने के लिए कोई टिप्स जो आप हमारे पाठको को देना चाहें?

मेरी स्किन बहुत ज्यादा अच्छी है, शायद यह हेरिडिटी है। क्योंकि मेरी मदर की स्किन भी बहुत ज्यादा ग्लोइंग और सॉफ्ट है। इसलिए मैं अपने फेस पर कुछ भी ज्यादा नहीं लगाती और ना ही उसके लिए कुछ करती हूं। मैं बस अपना फेस रोजाना क्लीन करती हूं साथ ही उसे मास्टर आइस करती हूं। मैं उन प्रोडक्ट्स को यूज करती हूं जो इफेक्टिव होते हैं। मैं उन टाइप्स में से नहीं हूं जो गूगल पर क्रीम्स और सब कुछ ढूंढ़ते हैं। मेरे पास जो कुछ होता है, मैं उसी से अपने फेस का ख्याल रखती हूं। मेरी मेकअप आर्टिस्ट ने मुझे जबरदस्ती कुछ प्रोडक्ट खरीदवाए हैं, जिन्हें मैं अभी यूज कर रही हूं। मैं फेशियल भी ज्यादातर नहीं कर पाती हूं। मैं सिर्फ फेस क्लीनअप करती हूं, क्योंकि वह हमारे लिए हेल्दी होता है और जहां तक हो आप भी घर की चीजों से ही फेस पैक बनाकर उन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं। दाल पीसकर उसमें राइस वॉटर डालकर ऐसी चीजें मैं अपने फेस पर भी कभी-कभी इस्तेमाल कर लेती हूं और लॉकडाउन में मैंने यह डिस्कवर किया। साथ ही और भी नई चीज भी देखी जो बहुत ज्यादा यूज़फुल थी। आप अपने फेस को ग्लोइंग करने के लिए थोड़ी सी दाल पीस लीजिए और उसमें संतरे के छिलके को पीसकर उसमें मिलाएं और उसमें थोड़ा सा गुलाब जल डालकर अपने फेस पर लगाएं। इससे फेस काफी ज्यादा खूबसूरत होता है।

 

आपके फैशन के क्या फंडे हैं?

मैं कहना चाहूंगी कि वही कपड़े खरीदें जो सस्टेनेबल हैं। आज के दौर में यह बहुत ज्यादा इंपॉर्टंट चीज है। क्योंकि जिस तरीके से हमने अपने इन्वायरमेंट के साथ जो ज्यादती की है। अब हमारे पास कोई ऑप्शन नहीं रहेगा सिवाय इसके कि हम सस्टेनेबल कपड़े पहने और इंडिया में तो बहुत ऑप्शंस है बहुत सारे सस्टेनेबल ब्रांड्स है। मैं अपने लिए ऐसी चीजें खरीदती हूं जिसे बाद में भी यूज़ किया जा सकता हो, क्योंकि मुझे लगता है कि बहुत सारी चीज हम हमारे कबर्ड में रखेंगे, फिर कपड़े वेस्ट जाते हैं। इसलिए आप ऐसी दो तीन चीजें खरीदें, जिससे आप बहुत सारी चीजों के साथ मिक्स एंड मैच करके पहन सकें।

अपना मी टाईम कैसे स्पेंड करती हैं?

मेरा मी टाइम वही होता है, जब मैं किसी शो को देख रही हूं। मेरी पर्सनालिटी बहुत ही एडिक्टेड है।  यदि मैंने 1 एपिसोड देख लिया और अगर मुझे पसंद आ रहा है तो मैं अगला एपिसोड जरूर देखूंगी। मैं उनमें से नहीं हूं जो पॉज करके यह सोचें कि चलो अब मैं यह एपिसोड कल देखूंगी। जब काम खत्म हो जाएगा जब उसके बाद बैठ कर आराम से देखूंगी। लेकिन मैं कोशिश भी करूं तब मैं यह सब नहीं कर सकती। मैं बोलती हूं अपने आप को सिर्फ एक और एपिसोड और उसके बाद भी अगर मुझे अच्छा लगता है तो फिर मैं एक और देख लेती हूं।

अपने आप को फ्यूचर में कैसे देखती है?

मेरे फ्यूचर का डिसीजन हर हफ्ते बदलता है। पहले हफ्ते में सोचती हूं कि चीजें कैसी करनी चाहिए फिर मेरा माइंड बदल जाता है तो मुझे पता नहीं है लेकिन मैं ऐसा फील करती हूं कि मुझे 2 साल में बहुत अलग-अलग तरीके का काम करने का मौका मिला है और बहुत ही अच्छा काम करने का मौका मिला है। मैं बहुत हैप्पी हूं कि इन 2 साल में मेरे करियर में बहुत कुछ अच्छा हुआ। फिर चाहे वह वर्क बड़ा हो या छोटा हो सक्सेसफुल हो या अनसक्सेसफुल हो उन्हें नंबर्स मिले या ना मिले लेकिन मुझे लगता है जो भी काम और जिस भी कहानी का हिस्सा मैं बनती है तो वह बहुत अच्छी स्टोरी होती है, उसमें बहुत टैलेंटेड लोग जुड़े हुए होते हैं तो मैं उन सब में कंप्रोमाइज नहीं करना चाहती। 

इंड्रस्टी में 12 से 13 साल पूरे कर चुकी हैं। क्या कुछ सीखने को मिला आपको?

कभी-कभी तो मैं खुद बैठ कर रियलाइज़ करती हूं कि मुझे सच में बॉलीवुड इंडस्ट्री में 12 या 13 साल हो गए हैं। मुझे बहुत हैरानी होती है जब मैं सोचती हूं उस टाइम के बारे में। जब हम श्रीजी बिल्डिंग में जाते थे, जहां बहुत सारे स्टूडियोज हैं। जहां हर स्टूडियो में अटलीस्ट 2-3 इंटरव्यूज होते थे। जब मैं बॉम्बे आई थी तब मुझे ये पता नहीं था कि किस से मिलना है, किस को कॉन्टेक्ट करना है। कहां ऑडिशन देने जाना है। उसके बाद मुझे दोस्तों ने बोला कि श्रीजी बिल्डिंग जाओ वहां बहुत सारे स्टूडियो हैं, वहां ऑडिशन दो। मैं वहां फिर मेकअप के साथ ऑडिशन देने जाती थी। लेकिन अब जब उन दिनों के बारे में सोचती हूं तो बाबा रे! कैसे किया ये हमने! अब तो मैं ये सब कभी ना कर पाऊं, क्योंकि ये सब इजी नहीं है।

गृह लक्ष्मी के पाठको के लिए क्या मैसेज देना चाहेंगी?

मैं सिर्फ ये ही मैसेज देना चाहूंगी कि आपको अपनी लाइफ हेंडल करना आता है। आप बस इसी पर विश्वास रखिए। आपकी लाइफ अपने आप हैंडल हो जाएगी क्योंकि ये सब चीज़ें सिखाने वाली नहीं है। सिर्फ इसमें एक कॉन्फिडेंस की बात होती है। तो आप भी अपने आप में कॉन्फिडेंस रखिए क्योंकि जब आप कोई भी काम करेंगे या सोचेंगे वो सब सही होंगे।

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