आखिर बहू में कैसे गुण होने चाहिए

Jyoti Sohi

2nd February 2021

बहू पर निर्भर करता है कि वो घर को किस तरह से संभालती है और परिवार के सदस्यों से कैसे मधुर संबध कायम करती है। दरअसल, परिवार एक ऐसी पूंजी है, जिसको आप जितना समेटकर रखेंगे, वो उतना ही फलेगा फूलेगा। बहुओं का ये फर्ज़ है कि वो परिवार की मज़बूत डोर को हमेशा बांधे रखें।

आखिर बहू में कैसे गुण होने चाहिए

शाम के छ बज चुके थे। अब दिन ढ़लने लगा था और रोज़ाना की तरह बच्चे गली में खूब शोर मचा रहे थे। सोचा बहू को फोन कर लूं और पूछ लूं कब तक घर लौट रही हो। जैसे ही फोन उठाया, तभी डोर बैल बज उठी। दरवाज़ा खोला, तो सामने बहू थी। प्रणाम मम्मा कहते हुए पायल अंदर आ गई। मैंने बहू को पानी का गिलास पकड़ाया और चाय चढ़ाने के लिए अभी बर्तन उठा ही रही थी कि बहू रसोई घर में आ गई और कहने लगी कि आप छोड़ो ये सब और अंदर जाकर आराम करो। मैंने कहा पायल बेटा अभी तो तुम आई हो, कुछ देर आराम कर लो। मगर वो फटाफट दो कप चाय बनाकर ले आई। देखकर मन बहुत प्रसन्न हुआ की अगर ऐसी बहू हो, तो बेटी की कमी कैसे महसूस हो सकती है। मैने कहा कि चलो, अब तुम कुछ देर आराम कर लो फिर रात के खाने की तैयारी भी तो करनी है। मगर वो कहां बैठने वाली थी। हाथ मूंह धोने के बाद वो तुरंत दोबारा रसोई में आ गई और रोज़ की तरह रात का खाना बनाने लगी। हांलाकि मुझे मन से अच्छा तो नहीं लगता था, मगर फिर सोचा कि चलो इसी बहाने ये घर के काम को अपना तो समझती है न। अभी मन से बहू को दुआएं निकल ही रही थीं कि दोबारा डोर बैल बजी। बहू ने झट से दरवाज़ा खोला, देखा तो राजेश के पिताजी और छोटा बेटा भी घर लौट आए थे। अब बहू भी रात के खाने का काम लगभग पूरा कर चुकी थी। पिताजी के आते ही बहू ने उन्हें चाय नाश्ता दिया और फिर पास में बैठकर दिन का हालचाल पूछने लगी और कुछ अपना बताने लगी। अब रात के नौ बज चुके थे। खाना टेबल पर था, मगर रोज़ की तरह राजेश अभी तक आफिस से लौटा नहीं था। मगर बहू के चेहरे पर इस बात की शिकन मुझे कभी भी नहीं नज़र आई। न कभी शिकायत, न कोई झुंझलाहट। बहते पानी की तरह थी पायल बहू, जैसा माहौल, वैसा ही ढ़ल जाना। वो हम सबके साथ बैठकर खाना खाकर किचन की सफाई करने लगी। फिर कहा कि बहू राजेश तो आज भी लगता है लेट ही आएगा, तुम अब आराम करो। मगर आराम उसे कहां पसंद। मेरे साथ किचन समेटने के बाद वो फिर सबके साथ बैठकर बातचीत में लग गई। परिवार में बैठना, बढ़ों का आदर करना और हर काम को खुद करना, उसे बेहद पसंद था। हम भी शायद अपनी बहुओं में कुछ ऐसे संस्कार और गुण तलाशते हैं, ताकि वो परिवार में रच बस जाएं। आइए जानते है, बहू के कुछ ऐसे गुण जो उन्हें परिवार से जोड़ने में सफल साबित होते हैं।

परिवार का सम्मान करें

नवविवाहिता जब एक परिवार में कदम रखती हैं, तो हर कोई बड़े स्नेह से बहू का स्वागत करता है। मगर ये ज़िम्मेदारी बहू की भी है कि वो पूरे मन से अपने नए परिवार को स्वीकार करे। बड़ों को सम्मान दें और छोटों को प्यार दें। साथ ही हर रिश्ते की मर्यादा कायम रखना भी बेहद जरूरी है।

ससुराल के रीति रिवाजों को सीखें 

हर परिवार की अपनी अलग मान्यताएं और अपने रिवाज होते हैं। अब ये बहू का फर्ज़ है कि अगर उन मान्यताओं के स्वीकार करने से परिवार की गरिमा बनी रहती है, तो हमें किसी प्रकार की अड़चन पैदा नहीं करनी चाहिए। हांलाकि हर मनुष्य के अलग विचार होते हैं। मगर ये भी सच है कि जिस काम में परिवार का साथ मिले, वही सच्ची खुशी है।

परिवार के साथ वक्त बिताएं

हर समय अलग थलग रहने की बजाय परिवार के साथ बैठें और उन्हें पूरा वक्त दें। परिवार के साथ वक्त व्यतीत करने से आपको अन्य परिवार वालों के विचारों की जानकारी हासिल होगी। साथ ही उनकी पसंद नापसंद भी मालूम होगी और वो भी आपके साथ हर बात शेयर करने में कंफरटेबल फील करेंगे। 

किचन में मदद जरूर करें

इसमें कोई दोराय नहीं कि घर की बहू से सबकी बहुत सी अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं। मगर पढ़ाई और नौकरी के कारण बहुत सी लड़कियां रसोईघर के कार्यों से भली भांति परिचित नहीं होती है। मगर ससुराल जाने के बाद बहू का ये फर्ज है कि अगर आप खाना बनाना नहीं भी जानती हैं। तब भी आप रसोई में मदद जरूर कराएं, ताकि घरवालों को किसी तरह की कोई बात करने का मौका न मिल सके। 

हर वक्त मायके की बढ़ाई करें

मायके की यादें उम्र भर हमारे साथ रहती है, जिन्हें भुलाना आसान नहीं होता है। मगर ससुराल जाकर हर वक्त मायके का गुणगान करना किसी को नहीं भाता है। कोशिश करनी चाहिए कि मायके की बातों को बार बार याद करने की बजाय नए परिवार में रच बस जाएं। 

ज्यादा डिमांडिंग नहीं होना चाहिए

विवाह के दौरान हम ज़रूरत के हर सामान की खरीददारी करते हैं। जो चीजें सालों साल हमारे काम आती रहती है। ऐसे में हमें कोशिश करनी चाहिए कि विवाह के फौरन बाद हमें ज्यादा खरीददारी से बचना चाहिए। इसके अलावा हमें बात बात पर अपनी डिमांडस नहीं करनी चाहिए और जो जैसा मिला हो उसे वैसे ही स्वीकार कर लेना चाहिए। 

हर कार्य में सम्मिलित हों

अब वक्त बदल चुका है। हर कोई अपने कार्यों में पूरी तरह से व्यस्त है। ऐसे में हमें चाहिए कि चाहे परिवार में कोई उत्सव हो यां फिर पूजन। परिवार के साथ हर कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाना बेहद ज़रूरी है। जो हमें परिवार के साथ जोड़ने का एहसास करवाती है।  

विनम्र स्वभाव धारण करें

जीवन में आपने भले ही बहुत सी सफलताएं हासिल की हों। मगर परिवार में आपका बहू का स्थान है, जिसका अर्थ है साथ मिलकर आगे बढ़े और हर किसी की खुशी का ख्याल रखें। ऐसे में आपके विनम्र स्वभाव की बदौलत परिवार में हर शख्स आपके करीब आएगा और आपको सम्मान भी हासिल होगा। 

सबकी जरूरतों का ख्याल रखें

कोशिश करें की सब लोगों की जरूरतों और पसंद से आप वाकिफ होें, ताकि आप आसानी से परिवार के मुश्किल वक्त में ढ़ाल बनकर उनकी मदद कर सके। 

बाहर वालों की बातों में आएं

अक्सर नई बहू को रिश्तेदार कई तरह की बातें सिखाने की कोशिश करते हैं, जिसमें से कुछ अच्छी होती हैं, तो कुछ बुरी भी। ऐसे में हमें अपने दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी की बातों में आकर अपने घर में किसी तरह की उलझन पैदा करने से बचना चाहिए। 

हर परिवार को बहू से बहुत सी अपेक्षाएं होती है। मगर ये बहू पर निर्भर करता है कि वो घर को किस तरह से संभालती है और परिवार के सदस्यों से कैसे मधुर संबध कायम करती है। दरअसल, परिवार एक ऐसी पूंजी है, जिसको आप जितना समेटकर रखेंगे, वो उतना ही फलेगा फूलेगा। बहुओं का ये फर्ज़ है कि वो परिवार की मज़बूत डोर को हमेशा बांधे रखें। 

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