है हममें दुनिया को बदलने का हुनर

ज्योति सोही

4th February 2021

खुद के बारे में सोचना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन जब सोच की दिशा खुद की बजाय देश-समाज और जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए कुछ बेहतर करने की ओर मुड़ती है तो कुछ ऐसी हस्तियों का जन्म होता है, जिनमें दुनिया को बदलने का हुनर है, वो भी खामोशी से, जैसे इन महिलाओं ने बदला...

है हममें दुनिया को बदलने का हुनर

मजबूत इरादों की मिसाल

मनीषा गोयल (न्यूट्रिशनिस्ट)

कहते हैं, जिन्हें थककर रूकना मंजूर नहीं उनसे कोई भी मंजिल दूर नहीं बचपन से ही कुछ कर गुजरने की चाहत उनके मन में हमेशा से ही थी। मगर इस दुनिया में अपनी जगह बनाने और एक मिसाल बनकर उभरने का ख्वाब शायद उस वक्त ख्वाब ही रह जाता अगर मनीषा गोयल ने अपने इरादों को मज़बूती से न पकड़ा होता। पिता के देहांत के बावजूद भी मनीषा गोयल टूटी नहीं और उसी दिन अपना पर्चा देने कालेज पहुंची, जिसमें उन्हें काफी अच्छे अंक भी प्राप्त हुए। उसी के दम पर उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी और बतौर न्यूट्रिशनिस्ट एक नामी संस्था को ज्वाइन किया। खाद्य पदार्थों और कुकिंग का शौक तो उन्हें बचपन से ही था। ऐसे में अब अपने पेशे के ज़रिए वो लोगों से जुड़ती चली गईं और उनकी समस्याएं हल करते करते अपनी एक अलग जगह बनाई। मगर इम्तिहान यहीं पर खत्म नहीं हुए। पेशे से न्यूट्रिशनिस्ट होने के साथ-साथ अब मनीषा एक मां भी थीं। मगर फिर भी मनीषा ने जिम्मेदारियों के बोझ तले अपने ख्वाबों को न सिर्फ धुंधला होने से बचाया बल्कि घर संभालने के साथ साथ काम के जुनून को जिंदा रख बीएड की तालीम हासिल की और एक स्कूल में नौकरी भी तलाशी। दो बच्चों की जिम्मेदारी के साथ अपने ख्याबों को सही शक्ल देना शायद इतना भी आसान नहीं था। मगर फिर भी वो रूकावटों का सामना करती हुई चलती गई और अपनी मंजिल को हासिल किया और फिर देखते ही देखते अब मनीषा गोयल नामी संस्थाओं से जुड़े होने के अलावा बाल भारती पब्लिक स्कूल, बृज विहार गाजि़याबाद में बतौर टीचर काम कर रही है। इतना ही नहीं, मनीषा को पेड़ पौधों से भी बेहद लगाव है और उन्होंने इससे जुड़ी योजनाओं पर काम भी किया, जिसके लिए उन्हें कई इनामात से नवाज़ा जा चुका है।

मानसिक रोगियों का भविष्य संवारती सोनल

सोनल ओसवाल (ग्राफोलाजिस्ट)

खुद को प्रतिभाशाली बनाने के लिए हम हर संभव प्रयास करते हैं, मगर बात जब दूसरों की समस्याओं को सुलझाने की आती है, बात जब दूसरों के दर्द को कम करने की आती है या बात जब किसी बुझे मन को रोशनी की किरण से प्रकाशित करने की आती है, तो कुछ ही ऐसे चुनिंदा लोग हैं जो वाकई उन समस्याओं को उन परेशानियों को दूर करने का साहस रखतेे हैं। उन्हीं में से एक है- सोनल ओसवाल, जो पेशे से एक ग्राफोलाजिस्ट हैं। स्कूल के दिनों से ही सोनल को साईकोलोजी में रूचि थी। 

वे लोगों की लिखावट और उनसे बातचीत करके उनकी शख्सियत को पहचानने की कोशिश करती थीं। उन्होंने इससे संबधित कोर्स किए और अपने इसी शौक को अपना पेशा बना लिया और फिर देखते ही देखते वे एक पेशेवर ग्राफोलोजिस्ट बन गई। जिस तरह से हाथों की लकीरें हमारे जीवन के हर उस पहलू को खुद-ब-खुद बयां कर देती है, जो घटित होने वाला है। वहीं दूसरी तरफ हमारी लिखावट उन चीजों को दर्शाती हैं, जो हमारे साथ हुआ और उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा। 

सोनल ने बतौर ग्राफोलोजिस्ट लोगों के बर्ताव, उनकी समझ सोचने की शक्ति और उनके माहौल समेत हर चीज़ को बारीकी से समझाए जो काउंसङ्क्षलग में मददगार साबित हुई। इस तरह से एक-एक कर उन्होंने मानसिक तनाव के शिकार बहुत से लोगों की मनोवृति को समझा और उन्हें ठीक करने की हर संभव कोशिश की और उन्हें इस काम में सफलता भी हासिल हुई। सोनल ने शुरूआती दिनों में एक रिहेबीलिटेशन सेंटर के साथ काम करना शुरू किया। दरअसल, सोनल ओसवाल उन लोगों में शुमार हैं, जो खुद से पहले औरों के बारे में सोचते हैं और उनके जीवन को एक-नई दिशा प्रदान करते हैं। 

सालों ने इस नेक कार्य में जुटी सोनल को इस काम में अपने माता-पिता का पूरा सहयोग मिला। सोनल का सपना है कि वे मानसिक रोगियों के बेहतर भविष्य के लिए मेंटल वेलनेस सेंटर खोलें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ सकें और उन्हें इसका फायदा भी हो।

 

 

जिनकी लोकगीतों से झलकती है सभ्यता-संस्कृति

मालिनी अवस्थी (गायिका)

कहते हैं आसमान तो बहुत है, मगर उन्हें फतह करने वाला कोई कोई है। अपने हुनर और अपनी मेहनत की बदौलत आसमान की बुलंदियों को छूने वाली ऐसी चुनिंदा शख्सियतों में से एक है- मालिनी अवस्थी। सुरों की जुगलबंदी और दिलकश आवाज़ से लोकगीतों की आत्मा को जीवंत करने वाली इस शख्सियत की गायकी से संस्कृति और सभ्यता की खुशबू महकती है।

एक हंसमुख, खुशमिज़ाज और फन की सच्ची कदरदान इस गायिका के नज़दीक गायकी इबादत का दर्जा रखती है। इन्हें बचपन से ही गायन से बेहद लगाव रहा। इनकी पैदाईश उत्तर प्रदेश के कन्नौज में हुई। नन्ही उम्र में संयुक्त परिवार में पली बड़ी और हमेशा संगीत के माहौल के बीच रहीं। ये हमेशा से संगीत के बारे में जानना चाहती थी और सीखना चाहती थीं। वक्त के साथ देखते ही देखते खुद-ब-खुद इनका मन पारंपरिक संगीत की ओर झुकने लगा।

इनके पिताजी पेशे से डाक्टर थे। मगर घर में बड़ी बुजुर्ग दादी मां और मां समान ताई जी का संगीत के प्रति खासा लगाव था, उनकी ढोलक की थाप संगीत की तरफ आकर्षित करती थी। इसके चलते इनका झुकाव भी संगीत की तरफ बढ़ता चला गया और देखते ही देखते सच्ची मेहनत और लगन से एक मशहूर गायिका बन गईं। हालांकि ये सफर इतना आसान नहीं था, मगर मालिनी जी को हर मुश्किल डगर पर अपने पति का पूरा साथ मिला और फिर कुछ इस तरह से आगे बढ़ी कि फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हालांकि घर की जिम्मेदारियां और बच्चों के प्रति अपने दायित्वों से ये कभी पीछे नहीं हटीं। मगर फिर भी इन सब चीजों के बावजूद इन्होंने संगीत के प्रति अपने प्रेम को कभी कम नहीं होने दिया और एक साधना के समान इस पथ पर निरंतर आगे बढ़ती चली गईं। मालिनी जी अवधी, भोजपुरी और बुंदेली भाषा में गाती हैं। वे ठुमरी और कजरी में भी प्रस्तुत करती हैं। लोकगीतों से शुरू हुआ सफर बालीवुड तक पहुंचा और खूब शौहरत कमाई।

हर तरफ अपनी आवाज़ को अपनी पहचान बना चुकी मालिनी जी देश के साथ-साथ विदेशों में भी अपने फन का मुज़हरा कर चुकी हैं और लोकगीतों को युवाओं तक पहुंचाने का काम कर रही है। मिट्टी के साथ जुड़े रहने की उनकी ख्वाहिश उनके व्यक्तित्व को और निखारती हैं। मालिनी जी ने राहत अली खान साहब से भी संगीत की शिक्षा हासिल की। साथ ही गिरिजा देवी जी से भी गायकी के गुर सीखें। वह बनारस की पौराणिक हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी जी की एक गंडा बांध शिष्य हैं।

सन 2016 में इन्हें भारत सरकार की ओर से नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा इन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। इन्होंने भातखंडे संगीत संस्थान लखनऊ से शिक्षा प्राप्त की। मालिनी जी का अपने पिता से बेहद लगाव था। इसी के चलते पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने पिता और बेटी के इसी खूबसूरत रिश्ते को सुरों में पिरोकर अवधी लोकगीत 'बाबा निमिया के पेड़ जिनि काटियो रे, निमिया पे चिरैया के बसेर... रिलीज किया। जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है। 

गायिकी को एक साधना मानने वाली मालिनी जी को अपने कार्यक्षेत्र में अपने पति और अपने बच्चों का हमेशा सहयोग प्राप्त हुआ।

यह भी पढ़ें -पेड़ों से बंधी जीवन की डोर

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