जड़ी-बूटियों से निखारें सौंदर्य

ज्योति प्रकाश खरे

9th February 2021

वस्तुत: अब सौंदर्य संबंधी विचारों में परिवर्तन होने लगा है। इसकी झलक आधुनिक सौंदर्य की देखभाल में मिलती है। अब लोग इस संबंध में अधिक रचनात्मक ढंग से सोचने लगे हैं कि किस प्रकार स्वाभाविक ढंग से अथवा प्राकृतिक चीजों से सौंदर्य को स्थिर रखा जाए।

जड़ी-बूटियों से निखारें सौंदर्य

प्राकृतिक सौंदर्य को नष्ट करने वाली चीजों के प्रति लोग अब सतर्क हो गए हैं। वातावरण का प्रदूषण, अस्वाभाविक रूप से ठंड और गर्मी पहुंचाने वाले साधन आदि इनमें सम्मिलित हैं। इन सबसे सौंदर्य को हानि पहुंचती है, त्वचा और बाल विकृत होते हैं। जितना हम प्रकृति से दूर जा रहे हैं, उतनी ही हमारे स्वास्थ्य और सौंदर्य को हानि पहुंच रही है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम प्रकृति की ओर लौट कर जड़ी-बूटियों आदि के रस को अपने सौंदर्य की देखभाल के लिए प्रयोग करें। आधुनिक सौंदर्य विज्ञान में इन चीजों का उपयोग बड़े सुरक्षात्मक ढंग से किया जा सकता है। इनके उपयोग से किसी प्रकार की हानि नहीं होती। त्वचा में किसी प्रकार की जलन और शरीर में बेचैनी के लक्षण प्रकट नहीं होते। दूसरी ओर, बनावटी चीजों के त्वचा में जज्ब होने से शरीर में रसायन इक होने लगते हैं जिनमें एलर्जी के अतिरिक्त कई अन्य प्रतिकूल प्रभाव भी होते हैं। जड़ी-बूटियों के रस का मानव के शरीर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है, प्राकृतिक जड़ी-बूटियों में खनिज, विटामिन और एन्जाइम होते हैं, जिनसे स्वास्थ्य, सौंदर्य, त्वचा और बालों को लाभ पहुंचता है।

वास्तव में प्रकृति स्वयं सौंदर्य विशेषज्ञ है। उसमें ऐसे असंख्य तत्त्व भी हैं जिनसे सौंदर्य की देखभाल में लाभ पहुंचता है। इन्हें त्वचा को पोषण देने वाले, उसकी शुद्धि करने वाले, उसे ताजगी देने वाले, नमी तथा विशेष स्वरूप देने वाले आदि की श्रेणी में रखा जा सकता है। हम अपने जीवन में इन सब चीजों का अपने रसोई घर और ऌिफ्रज में से इस्तेमाल करते हैं। सौंदर्य बढ़ाने के अतिरिक्त ये चीजें सौंदर्य को नष्ट होने से भी बचाती हैं। इसमें बहुत-सी ऐसी चीजें हैं, जिनसे त्वचा में रक्त-संचार बढ़ता है और त्वचा पुष्ट होती है। त्वचा को साफ करने वाली प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से त्वचा शुद्ध तो होती है, इनसे क्षार और एसिड का संतुलन भी बना रहता है।

नींबू, हल्दी, कैक्टस जड़ी-बूटियां आदि का रस प्राकृतिक रूप से त्वचा को साफ करने वाली महत्त्वपूर्ण चीजें हैं। दही, अण्डे की सफेदी और पपीते के गूदे आदि से बनी चीजें त्वचा को शुद्ध करने के अतिरिक्त उसका पोषण भी करती हैं। इन चीजों में एन्जाइम होते हैं, जिनसे त्वचा की सतह के ऊपर की मृत कोशिकाओं की सफाई होती है आलू का रस त्वचा के दोषों को सोख लेता है। हम त्वचा पर जो कुछ भी लगाते हैं, त्वचा उसे जज्ब कर लेती है। इसलिए इस बात का अधिक महत्त्व है कि हमें ज्ञान हो कि त्वचा पर हम किस चीज का उपयोग कर रहे हैं।

बादाम रोगन का उपयोग त्वचा को पुष्ट करने वाली क्रीमों और लेपों में होता है। बादाम रोगन में लेनोलिन मिलाकर आंखों के गिर्द लगाया जाता है। बादाम का चूर्ण लेप वाले पॉउडरों में मिलाया जाता है। बादाम की तरह खूबानी भी त्वचा का पोषण करती है। इसमें विटामिन ए होता है। इससे दाग बनाने वाले ऊतकों का उपचार होता है। इससे चेहरे पर आई लकीरें नष्ट होती हैं और उसका लचीलापन कायम रहता है। इन प्राकृतिक वस्तुओं में अपनी एक महक भी होती है। दही, शहद, दूध और अंडा आदि सौंदर्य बढ़ाने वाली महत्त्वपूर्ण वस्तुएं हैं। उदाहरण के लिए अंडे में लेसिथिंग नामक तत्त्व होता है जो त्वचा के लिए पोषक सिद्ध हुआ है।

 जड़ी-बूटियों के रस में त्वचा को स्वस्थ और मुलायम रखने के गुण होते हैं। चंदन, युक्लिप्टस, लौंग, कपूर आदि चीजें कीटाणुनाशक प्रभाव भी रखती हैं। इनसे त्वचा की सूजन और एलर्जी से पैदा प्रभाव भी नष्ट होते हैं। इनका त्वचा को साफ करने वाले लोशनों, लेपों आदि में प्रयोग होता है। इनसे कील-मुंहासे भी नष्ट होते हैं। चंदन वातावरण के प्रदूषण और धूप के प्रभाव को नष्ट करता है। सौंदर्य प्रसाधन के क्षेत्र में त्वचा की रक्षा महत्त्वपूर्ण है।

यह भी पढ़ें -स्वाद, सुगंध और गुणों का खजाना- हरा धनिया

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