बरामदा और हॉल के मानक नियम

कलीम उल्लाह

9th February 2021

फेंगशुई एक ऐसी विधा है जिसको अपनाकर आप अपने घर की सुख-समृद्घि में वृद्घि कर सकते हैं। फेंगशुई घर के हॉल और बरामदे के लिए क्या कहता है? जानते हैं लेख से।

बरामदा और हॉल  के मानक नियम

किसी भी प्रकार के भवन में विभिन्न कक्षों की भांति बरामदे और हॉल का भी काफी महत्त्व है। प्राय: लोग इस विषय को गौण मानते हुए उसके निर्माण एवं व्यवस्था पर अधिक ध्यान नहीं देते। ऐसे में वहां रहने वाले या कार्य करने वाले लोगों को अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चीनी वास्तुशास्त्र 'फेंगशुई' में बरामदा और हॉल के विषय में अनेक मानक नियम दिए गए हैं जो मनुष्य को सुख-समृद्धि प्रदान करने में विशेष भूमिका निभाते हैं। इन नियमों को हम यहां संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं। 

बरामदे सकारात्मक ऊर्जा 'ची' को विविध कक्षों तक पहुंचाते हैं। अत: बड़े भवनों में ज्यादा लंबे बरामदे नहीं होने चाहिए। यदि लंबे बरामदे की स्थिति उत्पन्न हो तो इनको घुमाव देकर इनकी लंबाई कम कर सकते हैं। इससे विभिन्न भागों में 'ची' का प्रवाह सुचारू रूप से होता है। 

  • यदि बरामदे सीधे और लंबे होते हैं तो एक प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा की उत्पत्ति होती है तथा 'ची' असंतुलित हो जाती है। ऐसी स्थिति में स्थान-स्थान पर झालरें, परदे एवं घंटियां आदि लगाकर 'ची' को संतुलित तथा प्रवाहमान किया जा सकता है।
  • यदि हॉल में दोनों तरफ खिड़की और दरवाजे नहीं होते तो एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने के अलावा 'ची' के पास कोई अन्य मार्ग नहीं होता। ऐसी स्थिति में यहां सकारात्मक ऊर्जा 'ची' का प्रवाह आवश्यकता से अधिक होता है जिसे कम करने की जरूरत होती है। इसके लिए यहां पर शीशे (मिरर) या कांच की तस्वीरें इस प्रकार टांगे कि 'ची' का प्रवाह जिग-जैग ढंग से हो। 'ची' एक मिरर या तस्वीर से दूसरे मिरर या तस्वीर की ओर जाए। इससे 'ची' का प्रवाह प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। 
  • 'ची' का प्राकृतिक प्रवाह कम करने के लिए हॉल के दोनों ओर मिरर एवं तस्वीर की भांति पौधों के गमले भी लगाए जा सकते हैं। इससे 'ची' के मार्ग में बाधा उत्पन्न होकर उसका प्रवाह संतुलित हो जाता है।
  • खुले हॉल में 'ची' का प्रवाह कम होता है और उसकी गति भी धीमी होती है। यदि खुले हॉल में बहुत सी खिड़कियां और दरवाजे हों तो उनमें से अधिकतर को बंद रखना चाहिए। इससे 'ची' का प्रवाह और गति संतुलित हो जाती है।
  • यदि खुले हॉल की अधिकतर खिड़कियों और दरवाजों को बंद नहीं रखा जाता तो 'ची' की गति और ज्यादा कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में खुले हॉल में सीधी लाइन में छोटे-छोटे क्रिस्टल टांग देने चाहिए। इससे 'ची' के प्रवाह को एक शांतिपूर्ण मार्ग प्राप्त होगा और 'ची' का प्रवाह संतुलित हो जाएगा।
  • यदि किसी हॉल में लकड़ी का प्रयोग अधिक किया गया है तो भी 'ची' असंतुलित हो जाती है। ऐसी स्थिति में नरम मुलायम परदे लगाकर 'ची' को संतुलित कर सकते हैं। यदि हॉल की संरचना गोलाकार है तो वहां पर बड़ी आयताकार या चतुर्भुजाकार पेंटिंग लगाकर 'ची' को संतुलित किया जा सकता है।
  • यदि हॉल संकीर्ण नहीं है तो वहां पर पौधों का गमला नहीं लगाना चाहिए।
  • हॉल को कोलाहल से बचाने के लिए वहां पर फर्नीचर का उपयोग नहीं करना चाहिए। 
  • हॉल में यथासंभव प्राकृतिक प्रकाश का प्रबंध करना चाहिए। इससे 'ची' का प्रवाह लाभदायक होता है।
  • हॉल में कृत्रिम एवं तीव्र प्रकाश को प्रोत्साहन नहीं देना चाहिए अर्थात वहां पर फ्लोरोसेंट लाइट नहीं लगने चाहिए। इससे हानिकारक प्रभाव पड़ता है। 
  • हॉल को उपयोगी बनाने के लिए उसकी छत के बीच में क्रिस्टल टांग सकते हैं। इससे वहां से गुजरने वाले लोगों के स्वर धन, शक्ति और संबंधों में सुधार होता है।
  • हॉल का प्रवेश द्वार आकर्षक बनाने के लिए वहां शीशों (मिरर) का उपयोग किया जा सकता है। इससे 'ची' की गति संतुलित होती है। 

यह भी पढ़ें -ब्लड प्रेशर की समस्या और वास्तुदोष

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