2021 में घूमें वहां, जहां आए सबसे ज्यादा मजा

चयनिका निगम

13th February 2021

पिछले साल भले ही आप लोग घूम नहीं पाए पर इस साल ऐसा नहीं होगा। बीच, पहाड़, रेगिस्तान और जंगल सफाई के बेस्ट ऑप्शन ये रहे।

2021 में घूमें वहां, जहां आए सबसे ज्यादा मजा

पिछला साल कुछ-कुछ थमा हुआ था। लोग तकरीबन पूरे साल ही ज्यादा कहीं निकाल नहीं पाए। या कहें कि डरते रहे निकलने से। फिर साल के आखिरी 2 महीनों में लोगों ने बाहर निकलना शुरू किया और खूब घूमे भी। इन कुछ दिनों में ही लोगों ने खूब दुनिया नापी। इतनी नापी कि खूब मजे किए और दुनिया के कई हिस्सों को देखा। इन्हीं हिस्सों में दुनिया की कुछ बेहद सुंदर जगहें शामिल थीं। इनमें पहाड़ भी शामिल थे और बीच भी। इन जगहों में जंगल भी थे और डेजर्ट भी। इन चारों तरह की जगहों को लोगों ने खूब पसंद किया और नए साल में भी जरूर इन्हीं जगहों पर जाकर अपनी घूमने की इच्छाएं पूरी करेंगे। इन सभी जगहों पर एक नजर डाल लीजिए ताकि जब आप घूमने जाएं तो बेस्ट के बारे में आपको पहले से पता हो-

 

बीच पर करने हैं मजे?-

जब घूमने निकलेंगे तो जरूर आपका मन बीच पर जाने को करेगा ही। तब आप किसन जगहों पर जाना पसंद करेंगे? आप कहेंगे गोवा...हां, गोवा तो है ही पर इसके अलावा भी कई जगहें हैं, जहां जाकर आपको बहुत मजा आने वाला है। टॉप 5 बीच ये रहे- 

 

पुडुचेरी में मिलेगा सुकून-

इस केंद्र शासित प्रदेश में प्रकृति की असली शक्ल नजर आती है। ये पूरा शहर ही अपने आप में खास है और काफी शांत नजर आता है। यहां कई सारे बीच हैं। जिनमें गांधी बीच सबसे अच्छा कहलाता है। यहां अक्सर शाम को तो भीड़ भी हो जाती है। मगर खुला आसमान और अंतहीन समंदर आपको यहां बहुत अच्छा महसूस करवाएगा। इस बीच के अलावा भी यहां का करिकल बीच लोगों को खूब पसंद आता है। 

कैसे पहुंचें-

नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई जैसे बड़े शहरों से यहां का सबसे नजदीकी हवाई अदद जुड़ा है जो यहां से 35 किलोमीटर दूर है। बंगलोर से यहां के एयरपोर्ट के लिए नियमित उड़ाने भरी जाती हैं। 

 

गोवा, पूरी दुनिया की पसंद-

गोवा एक ऐसी जगह है, जहां पूरी दुनिया आना चाहती है। इस जगह पर आने वाले लोग खुश होकर ही जाते हैं। यहां का तकरीबन हर बीच बेस्ट है। जैसे, मेंड्रेम बीच, क्वेरिम बीच, अंजुना बीच और कलांगुट बीच। इन सभी के पास आकर आपको प्रकृति का स्नेह मिलेगा और आप इसे बहुत करीब से महसूस कर पाएंगे। गोवा आकर आपके पास पार्टी के लिए भी खूब सारे विकल्प खुल जाते हैं। 

कैसे पहुंचें-

गोवा तक आने के लिए देश के तकरीबन हर एयरपोर्ट से उड़ाने हैं। रेल यात्रा करनी है तो कोंकण रेलवे से यहां आया जा सकता है। 

 

गोकर्ण, कर्नाटक..यात्रा भूल नहीं पाएंगे-

कर्नाटक, एक ऐसा राज्य है, जहां अभी भी कम ही लोग छुट्टियां बिताने जाते हैं लेकिन ये जगह कई दफा आपको सरप्राइज कर देगी। इस राज्य की ऐसी ही एक जगह है गोकर्ण। गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर और सुंदर बीचों के लिए जाना जाता है। यहां के ओम, हाल्फ मून और पैरडाइज बीच आपका दिल जरूर जीत लेंगे। या जगह अभी बहुत कॉमर्शियल नहीं हुई है। इसलिए यहां नेचर भी अनछुआ ही है मानो। सबसे अच्छे बीच की माने तो यहां का ओम बीच बेस्ट माना जाता है। 

कैसे पहुंचें-

गोकर्ण राज्य के बड़े शहरों मडगांव, दाबोलिम, बंगलौर और मंगलौर से जुड़ा है। इन शहरों के रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे और सड़क मार्ग का इस्तेमाल यहां आने के लिए किया जा सकता है। 

 

महाराष्ट्र का तारकरली आएगा पसंद-

महाराष्ट्र का तारकरली आपको निश्चित ही पसंद आएगा। ये एक गांव है, जो अरब सागर के किनारे पर बसा है। यहां के बीच सफेद रेत और साफ पानी के लिए जाने जाते हैं। यहां पर वॉटर स्पोर्ट्स भी खूब होते हैं, जिनके साथ आपको खूब मजा आएगा। यहां पर एक किला सिंधुदुर्ग भी है, जिसे 17 वीं शताब्दी में बनाया गया था। यहां आपको कर्ली नदी के बैक वॉटर देखने का मौका भी मिलेगा। 

कैसे पहुंचें-

 ये जगह मुंबई से 546 किलोमीटर दूर है। यहां से आप टैक्सी ले सकते हैं 

 

कोवलम में दिखे केरल की सुंदरता-

देश के टॉप टूरिस्ट प्लेस की बात करें तो कोवलम को बेस्ट माना जाता है। आप यहां पर क्रूज का मजा भी ले सकते हैं। यहां नारियल के पेड़ और साफ पानी आपको लौटने नहीं देंगे। कोवलम बीच पर आपको बिलकुल साफ पानी मिलेगा तो स्वादिष्ट खाना भी और फिर वॉटर स्पोर्ट्स का मजा भी आप यहां ले सकते हैं। 

कैसे पहुंचें-

कोवलम से नजदीकी एयरपोर्ट 14 किलोमीटर की दूरी पर त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट है तो पास का रेलवे स्टेशन भी त्रिवेंद्रम ही है।  

 

हिल स्टेशन बुला रहे आपको-

जब भी आपको लगे कि अब हिल स्टेशन आपको बुला रहे हैं तो चल पड़िएगा देश के अनोखे और सुंदर पहाड़ों की ओर। पर जाएंगे कहां आपके पास ऑप्शन तो बहुत हैं। इनमें से बेस्ट के बारे में जान लीजिए-

डलहाउजी है

छोटा स्विट्जरलैंड-

हिमाचल प्रदेश का डलहाउजी को सच में छोटा स्विट्जरलैंड माना जाता है। आपको यहां आकार स्वर्ग सा भी महसूस हो सकता है। इस जगह का नाम भारत के वायसराय लॉर्ड डलहाउजी के नाम पर रखा गया था। पठानकोट से 80 किलोमीटर दूर बने इस हिल स्टेशन में विदेशी खूब आते हैं। उन्हें ये पसंद आता है। यहां से चंबा घाटी का रास्त भी शुरू होता है। इस जगह को ब्रिटिश एमपायर ने 1854 में स्थापित किया था। इस प्रांत में 84 प्राचीन मंदिर भी हैं, जो हजारों साल पुराने हैं। 

कैसे पहुंचें-

18 किलोमीटर की दूरी पर कांगड़ा रेलव्वे स्टेशन और 12 किलोमीटर की दूरी गागल हवाई अड्डा है। 

 

कर्नाटक का कुर्ग बन जाएगा आपकी पसंद-

कर्नाटक के सुंदर लैंडस्केप वाले पहाड़ों पर बना कुर्ग आपको सच में बहुत पसंद आएगा। यहां पर कॉफी भी बनाई जाती है और यहां उत्पादन भी अच्छा होता है। इसके पहाड़ों पर हरियाली का हरा रंग ऐसा छाया रहता है कि दूर से ही इनका हरा रंग नजर आता है। यहां आपको कोडावास से रूबरू होने का मौका मिलेगा। कोडावास खास मर्शियल आर्ट के एक्सपर्ट होते हैं। यहां आप आएंगे तो कॉफी और मसालों की हरियाली आपको बिलकुल अनोखी महसूस होगी। यहां आएं तो कुशालनगर, पोल्लिबेट्टा जैसी जगहें भी जरूर देखें। 

कैसे पहुंचें-

मैसूर, बंगलौर और मैंगलौर यहां से करीब हैं। इन तीनों जगहों से हवाई, सड़क और रेलवे मार्ग से आया जा सकता है। 

 

कश्मीर के गुलमर्ग में स्कीइंग-

कश्मीर के गुलमर्ग को स्कीइंग के लिए पहचाना जाता है। ये एशिया का 7वां सबसे अच्छा स्कीइंग डेस्टिनेशन भी माना जाता है। ये जगह जाड़े में पूरी तरह से बर्फ से ढकी रहती है। इस जगह को हार्टलैंड ऑफ विंटर स्पोर्ट्स भी कहा जाता है। गुलमार्ग की दो जगहें आपको खूब आकर्षित करेंगी। कानडोगरी और अपरवाट की चोटियां स्कीइंग के लिए बेस्ट हैं। 

कैसे पहुंचें-

यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जम्मू है तो पास का हवाई अड्डा श्रीनगर है। 

 

दार्जिलिंग है कइयों की पसंद-

पश्चिम बंगाल का ये हिल स्टेशन 2000 मीटर की ऊंचाई पर है। ये जगह अपनी टी इंडस्ट्री के लिए जानी जाती है। यहां से आपको दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंघा नजर आती है। यहां आपको ब्रिटिश जमाने का इन्फ्रास्ट्रक्चर दिखेगा तो बिलकुल अलग तरह के पेड़-पौधे भी। बिलकुल अनोखे ऑर्किड के फूल तो आपको बहुत ही पसंद आएंगे। 

कैसे पहुंचें-

बागदोगरा (सिलीगुड़ी) यहां से सबसे पास का एयरपोर्ट है और यहां से 90 किलोमीटर दूर है। जबकि पास का रेलवे स्टेशन न्यू जलपाइगुड़ी है|

 

ऑली, उत्तराखंड मानो स्वर्ग-

उत्तराखंड अपने कई सारे हिल स्टेशन के लिए जाना जाता है। इन्हीं में से एक है ऑली। ऑली के चारों ओर ओक के पेड़ हैं तो नन्दा देवी और नरपर्वत की चोटी भी पास में ही है। ऑली जोशीमठ का ही एक कस्बा है। ऑली के उत्तर में बद्रीनाथ है और पास में ही स्नो लेपर्ड वाला नेशनल पार्क भी। यहां पर लाल लोमड़ी भी देखी जा सकती है साथ में ढेरों अनोखे पेड़ भी। 

कैसे पहुंचे-

हवाई मार्ग से यहां आना है तो नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून का जॉली ग्रैंट एयरपोर्ट है। जो यहां से 220 किलोमीटर दूर है। ऋषिकेश यहां का सबसे रेलवे स्टेशन है, जो 230 किलोमीटर दूर है। 

 

डेजर्ट का स्पेशल अहसास-

रेगिस्तान पहली बार में ऐसा शब्द लगता है, जो बहुत सुनसान और बेरुखा सा है। लेकिन रेगिस्तान में भी घूमने जाने का अपना अलग ही अहसास है, ये अहसास आपको सच बिलकुल अलग महसूस कराता है। देश के कुछ खास डेजर्ट के बारे में जान लीजिए-

गोल्डन सिटी जैसलमेर-

राजस्थान अपने डेजर्ट के लिए जाना जाता है। जैसलमेर ऐसे ही डेजर्ट में से एक है। जयपुर से पश्चिम की ओर 575 किलोमीटर दूर जैसलमेर बसा है। यहां की रेत कुछ-कुछ पीला रंग लिए हुए है। यहां का जैसलमेर किला भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है। ये शहर थार डेजर्ट के पास बना है। इस शहर को 1156 एडी में स्थापित किया गया था। जैसलमेर को गोल्डन सिटी इसलिए कहते हैं क्योंकि यहां हर जगह पीली रेत है। 

कैसे पहुंचें-

जोधपुर से जैसलमेर 4 से 5 घंटे की टैक्सी यात्रा करके पहुंचा जा सकता है। देश हर बड़े शहर से जोधपुर हवाई और रेल यात्रा के लिए जुड़ा है।

 

कच्छ के रण की रौनक है अलग-

भारत और पाकिस्तान की सीमा पर बना है कच्छ का रण। करीब 23,300 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला ये रण गुजरात में है। ये दुनिया का सबसे बड़ा नमक से बना रेगिस्तान है। कच्छ जिले में बना ये रण थार रेगिस्तान का ही हिस्सा है। अनोखी बात ये है कि साल के कुछ महीने ये रेगिस्तान नहीं समुद्र लगता है। जुलाई से नवंबर के करीब तक यहां कच्छ की खड़ी का पानी यहां आ जाता है। इसी अनोखे अनुभव को महसूस करने के लिए यहां रण महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

कैसे पहुंचें-

यहां आने के लिए हवाई यात्रा करनी है तो भुज एयरपोर्ट तक आना होगा। भुज से ये जगह सिर्फ 80 किलोमीटर दूर है। 

 

नुब्रा घाटी, लद्दाख-

बहुत गहरी ये नुब्रा घाटी चारों से सख्त मगर खूबसूरत पहाड़ों से घिरी है। इस घाटी के रेगिस्तान में आपको शुष्क रेट मिलेगी। साथ ही प्राचीन खंडहर और शांत बौद्ध मठ भी आपका ध्यान जरूर खींचेंगे। लेह से करीब 150 किलोमीटर दूर बनी ये घाटी दो नदियों रिओ श्योक और सियाचिन के संगम पर है। एक खास बात और है, यहां शिप ऑफ द डेजर्ट कहे जाने वाले ऊंट भी बिलकुल अलग तरह के दिखेंगे। यहां आपको बिलकुल अनोखे 2 कूबड़ों वाले बैक्ट्रियन ऊंट देखने का मौका मिलेगा। 

कैसे पहुंचें-

दिल्ली, मनाली और श्रीनगर से लेह के लिए सीधी बस और उड़ानें भी चलती हैं।

 

जंगल सफारी, लगेगी बहुत प्यारी-

जंगल सफारी घूमने का एक ऐसा तरीका है, जिसे अभी भी बहुत ज्यादा लोग नहीं चुनते हैं। दरअसल सफारी पर जाने के दौरान धैर्य खूब रखना होता है। क्योंकि ये जगह पूरी तरह से प्रकृति के करीब होती है इसलिए जिस जानवर को आप देखने गए होते हैं, जरूरी नहीं कि वो आपको दिख ही जाए। मगर वहां जाने का अनुभव बेहद अनोखा होता है। देश के कुछ बेहद चर्चित जंगल सफारी के बारे में जान लीजिए-

 

रणथंभौर नेशनल पार्क, राजस्थान-

राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क का नाम यहां मौजूद रणथंभौर किले के नाम पर पड़ा है। ये किला हजारों साल पुराना है और घने जंगलों से घिरा भी हुआ है। इस किले की रक्षा में ये जंगल कई दफा काम भी आ जाया करता था। जिस किले की वजह से इस जंगल का नाम पड़ा अब यात्रियों के लिए वो इतना अहम नहीं है। बल्कि अब ये घना जंगल देखने ही दूर-दराज से लोग आ जाते हैं। 282 वर्ग किलोमीटर में फैला ये एक टाइगर रिजर्व है। खास बात ये भी है कि 1973 में यहां कुल 37 बाघ ही बचे थे। जबकि अब यही संख्या 70 के आसपास है। 

कैसे पहुंचें-

यहां आने के लिए हवाई यात्रा करनी है तो जयपुर यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जो यहां से 180 किलोमीटर दूर है। जबकि नजदीकी रेलवे स्टेशन 11 किलोमीटर दूर सवाई माधोपुर है। 

 

कॉर्बेट नेशनल पार्क है बिलकुल अलग-

1936 में बनाया गया, ये देश का पहला नेशनल पार्क है। पहले इसका नाम हैली नेशनल पार्क था। इस बाद में संरक्षणवादी जिम कॉर्बेट के नाम से बदल दिया गया। यहां पर 600 तरह के तो सिर्फ पक्षी हैं। बाकी जानवरों की भी कई प्रजाति यहां मिल जाती है। लेकिन सबसे ज्यादा यहां लोग बाघ देखें आते हैं। नैनीताल से 118 किलोमीटर दूर बना ये नेशनल पार्क 521 वर्ग किलोमीटर में बना है। 

कैसे पहुंचें-

यहां आने के लिए दिल्ली से सड़क रास्ते आया जा सकता है। दिल्ली यहां से 240 किलोमीटर दूर है। जबकि नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर में है और नजदीकी रेलवे स्टेशन 5 किलोमीटर दूर रामनगर में है। 

 

भगवान राम से जुड़ा बांधवगढ़ नेशनल पार्क -

1968 में नेशनल पार्क बनाया गया बांधवगढ़ एक ऐसा पार्क है, जिसके आस-पास 32 पहाड़ियां हैं और इसका क्षेत्रफल 437 वर्ग किलोमीटर है। ये आपने आप में बड़ा लेकिन हरियाली से भरपूर नेशनल पार्क है। ये इतना बड़ा है कि आपको कई बाघ यूंही टहलते हुए मिल जाएंगे। आप जब भी जंगल जाएंगे तो हो सकता है हर राइड में यहां आपको बाघ के दर्शन हो जाएं। इस पार्क को बांधवगढ़ क्यों कहा जाता है? जवाब काफी रोचक है। क्योंकि राम जी ने लंका से लौटकर ये किला लक्ष्मण को दिया था। फिर उन्हें बांधवधीश की उपाधि भी दी थी। भाई को बंधु भी कहते हैं। इसलिए इन नामों से प्रेरणा लेकर ही इस जगह का नाम बांधवगढ़ रखा गया। 

कैसे पहुंचें-

यहां अगर सड़क रास्ते से आना चाहती हैं तो सबसे नजदीकी शहर जबलपुर है, जो यहां से 164 किलोमीटर दूर है। जबलपुर से बांधवगढ़ पहुंचने के लिए करीब 3 घंटे का समय लगता है। जबलपुर देश के सभी बड़े शहरों से रेल और हवाई मार्ग से जुड़ा है। खजुराहो से बांधवगढ़ के बीच की दूरी 237 किलोमीटर की है। 

 

बंगाल टाइगर का घर सुंदरवन-

पश्चिम बंगाल की शान बंगाल टाइगर का घर सुंदरवन है, जो दुनिया का सबसे बड़ा नदी डेल्टा है। इसका कुछ हिस्सा भारत में है तो कुछ हिस्सा बांग्लादेश में। ये जगह धीरे-धीरे सागर की ओर बढ़ रही है। अब ये कोलकाता तट से करीब 32 किलोमीटर दूर आ चुका है। ये 180000 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यात्रियों को बहुत आकर्षित करता है। इस जगह के नाम के पीचे सुंदरी पेड़ हैं। इन पेड़ों की वजह से ही इस जगह को सुंदर वन कहा जाता है। इस जगह पर वही पेड़ पनपते हैं, जो मीठे और खारे पानी के मिश्रण में रह सकते है। 

कैसे पहुंचें-

यहां से पास का एयरपोर्ट कोलकाता है, जो करीब 90 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन की बात करें तो गोधाखाली शहर का कैनिंग रेलवे स्टेशन सबसे पास है। 

 

काजीरंगा नेशनल पार्क है वर्ल्ड हेरिटेज साइट-

काजीरंगा नेशनल पार्क को 1985 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट बना दिया गया था। यहां एक सींग वाले गैंडों की सबसे अधिक आबादी पाई जाती है। यहां करीब 2400 से ज्यादा गैंडे हैं। यहां पर लोग बाघ देखने भी आते हैं, जिनकी संख्या यहां काफी है। माना जाता है यहां हर 5 वर्ग किलोमीटर में एक बाग पाया जाता है। इतना ही नहीं यहां 35 स्तनधारी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। 

 

कैसे पहुंचें-

96 किलोमीटर दूर जोरहाट शहर यहां से सबसे पास का हवाई अड्डा है। 80 किलोमीटर दूर है रेलवे स्टेशन फुरकिंग है। सड़क मार्ग से आने के लिए नेशनल हाइवे 37 से आ सकते हैं। 

 

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