दीपावली में रखें वास्तु का ख्याल

ज्योति सोही

18th February 2021

दीपावली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। दीपावली में वास्तु का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। घर की सफाई और साज सजावट के दौरान जरूर रखें वास्तु शास्त्र का ख्याल। आइए जानते हैं इस खास मौके पर दीपावली से जुड़े कुछ खास वास्तु सुझाव।

दीपावली में रखें वास्तु का ख्याल

दीपावली का त्योहार पांच दिनों तक चलता है। इसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। दीपावली के दिन मां लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि लक्ष्मी जी के आशीर्वाद से धन धान्य से परिपूर्ण हो सकते हैं। दीपावली पर की जाने वाली विशेष पूजा दरअसल मां लक्ष्मी को घर में स्वागत करने के लिए की जाती है। ऐसे में वास्तु की भी भूमिका है।

शुरूआत करते हैं घर के मुख्य द्वार से दीप पर्व के दौरान मुख्य द्वार पर रंगोली, साज-सज्जा के साथ ही दीपक जलाना शुभ ऊर्जाओं को आमंत्रण और उनके स्वागत की तरह होता है। ध्यान रखें कि मुख्य द्वार में कहीं छिद्र और दरार न हो और उसे खोलने एवं बंद करने में आवाज न आती हो। दरवाजे और खिड़कियों पर सरसों का तेल लगाकर उन पर स्वस्तिक चिह्न बनाएं और शुभ लाभ लिखें।

घर का बैठक

जहां घर के सभी सदस्य एक साथ बैठते हैं। वहां सुंगधित फूलों और भरपूर रोशनी का होना बेहद जरूरी है ताकि सकारात्मक ऊर्जा से घर भरपूर हो जाए।

रसोई घर

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की रसोई का वास्तु दोष रहित होना बेहद आवश्यक होता है क्योंकि इस क्षेत्र का संबंध सीधे तौर पर घर की महिला से होता है। इसलिए इस क्षेत्र को साफ-सुथरा बनाए रखें। दीपावली की सजावट करते समय किचन में चमकदार रंग की लाइटों का इस्तेमाल करें। 

शयनकक्ष

दीपावली की सजावट में अपने शयनकक्ष में नई पेंटिंग और तस्वीरों को लगाएं।  ध्यान रहे इन पेंटिंग का दृश्य सकारात्मक झलक देने वाला हो। डरावनी या जंगली जानवरों की पेंटिंग को घर के किसी भी स्थान पर ना लगाएं। 

दीपावली के दिन शयनकक्ष में भी छोटा बल्ब जरूर जलाए रखें क्योंकि अंधकार में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है। शयनकक्ष में इत्र का भी इस्तेमाल करें ताकि शयनकक्ष का वातावरण सकारात्मक बना रहे।

कांटेदार पौधे

घर के शयनकक्ष या बैठक में कांटेदार पौधों का इस्तेमाल बिलकुल ना करें।  दीपावली के वक्त बाजार में ऐसे कई शो-पीस मिलते हैं जो नुकीले होते हैं। इन्हें खरीदने से बचें। शयनकक्ष और लिविंग एरिया में ऐसी ही चीजों का इस्तेमाल करें जो देखने और इस्तेमाल करने में भी सकारात्मकता दे।

  • दीपावली के लिए भवन की साफ-सफाई और लिपाई-पुताई की परंपरा है, क्योंकि दरारें, टूट-फूट, सीलन के निशान और बदरंगी दीवारें शुभ ऊर्जा को ग्रहण करने में असमर्थ होती हैं।
  • पर्व-त्योहार में घर का वातावरण धूप-अगरबत्ती से सुगंधित करना चाहिए। अन्य दिनों में भी घर में किसी प्रकार की दुर्गंध न रहे।
  • लक्ष्मी को आमंत्रित करने से पहले पुराने और अनुपयोगी सामानों की विदाई आवश्यक है। कबाड़ से मुक्ति पाने का सीधा संबंध आर्थिक प्रगति से है।
  • वास्तु के अनुसार ईशान यानी उत्तर-पूर्व दिशा का पूजन कक्ष सर्वोत्तम होता है। दिवाली पूजन भी इसी कक्ष में या पूर्व-मध्य अथवा उत्तर-मध्य के किसी कक्ष में करना चाहिए। घर के मध्य भाग को ब्रह्म स्थान कहा जाता है। यहां भी पूजन कर सकते हैं। पूजा के समय पूर्व या पश्चिममुखी रहें।
  • घर में लक्ष्मी को आमंत्रित करने के साथ ही उन्हें सहेजकर रखने का जतन करना भी महत्त्वपूर्ण है। इसलिए नकदी और गहने-जेवरात की अलमारियां दक्षिण या पश्चिम की दीवारों पर हों और उत्तर या पूर्व की ओर खुले। ध्यान रहे, इन अलमारियों पर दर्पण न लगा हो।
  • यदि आपके घर के आगे या उत्तर दिशा की ओर गड्ढï है, तो उसे भरवाकर समतल करा दें। इससे वास्तु दोष दूर होगा।
  • जिन लोगों के घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा की ओर है, उन्हें मुख्य द्वार पर पिरामिड या लक्ष्मी गणेश की तस्वीर लगानी चाहिए।
  • दीपावली के मौके पर बहुत से लोग टीवी और फ्रिज की खरीदारी करते हैं। टीवी और फ्रिज को उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुख करके लगाएं।
  • घर के दरवाजे पर मां लक्ष्मी के पैर का चिह्न जरूर लगाना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पैर की दिशा अंदर की तरफ होनी चाहिए। घर के दरवाजे पर चांदी का स्वस्तिक लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
  • पानी में नमक मिलाएं और इसे घर के कोने-कोने में छिड़कें। वास्तु के अनुसार नमक घर की बुरी ऊर्जा को सोख लेता है।
  • घर में उत्तर दिशा को कुबेर स्थान कहते हैं। सुनिश्चित करें कि माता लक्ष्मी की मूर्ति यहां रखी जाए और गणेश जी की मूर्ति उनके दाहिने हो। इसके अलावा मूर्तियों को लाल रंग के कपड़े में सजाएं।
  • दीपावली से पहले घर में अष्ठमंगला का चिह्न जरूर लगाएं। अष्ठमंगला के ऊपर दरअसल कमल रखा जाता है और कमल पर मां लक्ष्मी विराजती हैं।

रंगोली का महत्व 

दीपावली में रंगोली बनाने की परंपरा काफी पुरानी है। दीपावली पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के दरवाजे पर अलग-अलग रंगों से रंगोली बनाई जाती है। वास्तु में भी रंगोली बनाने का अपना महत्त्व है। कहा जाता है कि दीपावली पर घर के दरवाजे पर रंगोली बनाने से घर में नकारात्मकता दूर होती है। दीपावली पर रंगोली बनाते समय खासकर रंगों और दिशा का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

  • बनी-बनाई रंगोली लाकर अगर दरवाजे पर लगा रहे हैं तो इसमें भगवान गणेश और लक्ष्मी की तस्वीर नहीं होनी चाहिए। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता।
  • फर्श पर जो रंगोली बना रहे हों, उसमें स्वस्तिक और ओम का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें।
  • रंगोली बनाते समय रंगों का भी खास ध्यान रखें। पूर्व दिशा में रंगोली बनाते समय लाल, हरा, गुलाबी रंगों का इस्तेमाल करें। रंगोली बनाते समय काले और नीले रंग का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
  • वास्तु के अनुसार रंगोली से सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है। दक्षिण दिशा में लहरिया डिजाइन की रंगोली बिल्कुल भी न बनाएं। दक्षिण दिशा में आयताकार रंगोली बनाने से लाभ होता है।

पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

  • पूजा के दिन सबसे पहले एक बड़ी और साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछा कर उसके ऊपर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां स्थापित रख दें। ध्यान रहे कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मीजी को गणेशजी के दाहिनी ओर विराजमान करें।
  • पूजन करने वाले सभी लोग मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें।
  • अब एक कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। कलश के ऊपर एक नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेट कर रखें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे।
  • यह कलश वरुण का प्रतीक होता है। कलश के पास दो बड़े दीपक रखें जिसमें एक घी का और दूसरा तेल का दीपक हो। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें और दूसरा मूर्तियों के चरणों में। एक दीपक गणेश जी के पास रखें।
  • मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह के प्रतीक बनाएं।
  • गणेशजी की ओर चावल की सोलह प्रतीक बनाएं जिन्हें मातृका का प्रतीक माना जाता है। नवग्रह और शोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।
  • अब इसके बीच में सुपारी रखें, छोटी चौकी के सामने तीन थाली और जल भरकर कलश रखें।

थालियों में पूजा की इन जरूरी चीजों को रखें जैसे- ग्यारह दीपक के अलावे खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान, फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर, कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।

अब पूरे विधि-विधान से महालक्ष्मी और गणेश कर पूजन करें। पूरे घर में कपूर व धूप जलाएं और गंगाजल छिड़के जिससे नकारात्मक शक्ति का नाश हो और मां लक्ष्मी और गणेश का वास को।  

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