बासंती मौसम में करें मुगल गार्डन की सैर

भावना श्रीवास्तव

22nd February 2021

बसंत आगमन पर चारों ओर फूलों की खुशबू व सौंदर्य फैल जाता है। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन पर भी बसंती रंग छा जाता है।

बासंती मौसम में करें मुगल गार्डन की सैर

बसंत के बहाने प्रकृति ने हर रंग के फूलों और खुशबुओं से अपना शृंगार किया है। पर यह सच है कि फूलों का सौन्दर्य बोध और उनका रंग संयोजन रहस्यमयता से परिपूर्ण है। बात फूलों की है तो उद्यान का जिक्र भी जरूर होता है। विभिन्न किस्मों के फूलों व उनकी महक से सजा ऐसा ही एक मनमोहक उद्यान है दिल्ली का मुगल गार्डन, जहां हर साल बसंत के आगमन पर एक अलग ही प्रकार के नैसर्गिक सौंदर्य के दर्शन होते है।

कब बना मुगल गार्डन?

100 साल पहले 1911 में जब अंग्रेजों ने अपनी राजधानी कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट की, तभी वायसराय के रहने के लिए प्रसिद्ध अंग्रेज आर्किटेक्ट एडवर्ड लुटियन्स ने रायसीना की पहाड़ी को काटकर वायसराय हाउस (राष्ट्रपति भवन का पुराना नाम) बनाया। उसमें फूलों का बाग भी बनाया गया, लेकिन तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हाॢडंग की पत्नी लेडी हार्डिंग को वह पसंद नहीं आया। उन्होंने भारतीय शैली, खासकर मुगल शैली में गार्डन बनाने की बात कही, तब लुटियन्स ने मुगल शैली में गार्डन बनाया। 1928 में यह बनकर तैयार हुआ और इसमें वायसराय और उनकी पत्नी ने कदम रखा। तभी से इसका नाम मुगल गार्डन पड़ गया।

क्या है खास?

लगभग 13 एकड़ परिसर में फैले इस गार्डन में मुगल और ब्रिटिश शैली का मिश्रण दिखाई देता है। यहां कई छोटे-बड़े बगीचे हैं जैसे पर्ल (मोती) गार्डन, बटरफ्लाय (तितली) गार्डन और सर्कुलर (वृत्ताकार) गार्डन। बटरफ्लाय गार्डन में फूलों के पौधों की बहुत सी पंक्तियां लगी हुई हैं। यह माना जाता है कि तितलियों को देखने के लिए यह जगह सर्वोत्तम है। मुगल गार्डन में अनेक प्रकार के फूल देखे जा सकते हैं, जिसमें गुलाब, गेंदा, स्वीट विलियम आदि शामिल हैं। इस बाग में फूलों के साथ-साथ जड़ी-बूटियां और औषधियां भी उगाई जाती हैं। यहां मदर टेरेसा, अर्जुन, भीम, राजा राम मोहन, जॉन एफ कैनेडी, क्वीन एलिजाबेथ, लिंकन, हैप्पीनेस, फर्स्ट प्राइज, जंतर-मंतर,  अमेरिकन हेरिटेज, आइसबर्ग जैसे अजीबो-गरीब फूलों के नाम सुने जा सकते हैं।

मुगल गार्डन की शान

मुगल गार्डन अपने किस्म का अकेला ऐसा उद्यान है, जहां विश्वभर के रंग-बिरंगे फूलों की छटा देखने को मिलती है। मैसूर के वृन्दावन गार्डन को छोड़कर शायद ही और कोई उद्यान इसके मुकाबले का होगा। यहां विविध प्रकार के फूलों की बहार है। बोने नट व ओकलाहोमा सहित अकेले गुलाब की ही 250 से भी अधिक किस्में हैं। ओकलाहोमा गुलाब के फूल का रंग लगभग काला है। नीले गुलाब की प्रजातियों में पैराडाइज, ब्लूमून और लेडी एक्स शामिल हैं। यहां हरे रंग के गुलाब की भी किस्में है। मॉलश्री, पुत्रजीव, जुनिपर, चाइना औरेंज जैसे वृक्षों से हमेशा हरा-भरा रहने वाले इस उद्यान में कई प्रकार के दुर्लभ फूलों की बहार देखने को मिलती है। यहां कैलेन्डुला एन्टिरहिनम, एलिसम, डिमोरफोथेका, एसोलझिया, लार्क्सपर, गजेनियां, गेरबेरा,  गोडेतिया, लाइनेरिया, मेसमब्राइन्थेमम, ब्रासिकम, मेतुसेरिया, वेरबेना, विओला,  पैन्सी, स्टॉक तथा डहलिया, कारनेशन और स्वीटपी जैसे सर्दियों में खिलने वाले फूलों की भी बहुतायत है। यहां के अन्य आकर्षण निम्नलिखित हैं।  

हर्बल गार्डन 

राष्ट्रपति भवन के अन्दर मुगल गार्डन में एक हर्बल गार्डन भी है, जहां देश-विदेश की कई प्रमुख औषधियों के पेड़ हैं। इन दुर्लभ औषधियों को यहां आसानी से देखा जा सकता है। यहां मौजूद सभी औषधियां काफी महत्त्वपूर्ण हैं, आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में इन औषधियों का खासा इस्तेमाल किया जाता है।

ट्यूलिप

जैसे फलों का राजा आम होता है, वैसे ही फूलों में भी राजा होता है। ठंड के फूलों का राजा ट्यूलिप को कहा जाता है। ट्यूलिप काफी खूबसूरत और मनमोहक होता है। इसे देखकर ऐसा लगता है, मानो यह आर्टिफिशियल फूल है। भारत के कश्मीर में और विदेशों में कई जगहों पर व्यापक पैमाने पर इसकी खेती की जाती है। ट्यूलिप की 109 प्रजातियां पाई जाती हैं। साउथ यूरोप, नॉर्थ अफ्रीका और ईरान से इस फूल की उत्पत्ति हुई थी। यह लाल, गुलाबी, पीला, नीला, बैंगनी जैसे कई रंगों में पाया जाता है।

गेंदा 

गेंदा के पेड़ काफी छोटे-छोटे होते हैं और इनमें छोटे और बड़े दोनों तरह के फूल उगते हैं। यह पीला, मैहरून, नारंगी जैसे कई रंगों में पाया जाता है। इसका इस्तेमाल साज-सजावट में और धार्मिक स्थानों पर अधिक किया जाता है।

वॉटर लिली

वॉटर लिली ताजे पानी में खिलते हैं। दुनिया भर में करीब 70 तरीके के वॉटर लिली पाए जाते हैं। इन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है। हार्डी और ट्रॉपिकल। हार्डी केवल दिन के समय में ही खिलता है, लेकिन ट्रॉपिकल दिन या रात में कभी भी खिल सकता है, पर खिलता केवल एक ही बार है। यह नीला भी होता है।

खुशबूदार आर्किड 

आर्किड के फूल कई तरह के होते हैं, जिनके खिलने की उम्र भी अलग-अलग होती है। कुछ एक माह तो कुछ तीन से चार माह तक खिले रह सकते हैं। इनकी खुशबू मनमोहक होती है। कुछ आर्किड्स की खुशबू चॉकलेट, नारियल की तरह होती है, तो कुछ फलों जैसी खुशबू देते हैं। मुगल गार्डन में ब्राजील के आर्किड हैं।

इसके अलावा फूलों की क्यारियों, घास के दरीचों, खूबसूरत फव्वारों और सीढ़ीदार रास्तों वाले बगीचे मुगलों से मिली विरासत का हिस्सा हैं। राष्ट्रपति भवन का प्रसिद्ध मुगल गार्डन भी अपनी इन्हीं विशेषताओं के लिए जाना जाता है। इस गार्डन को ऋतुराज बसंत के लिए अधिक आकर्षक बनाने का काम शरद ऋतु आते ही शुरू  हो जाता है, जब इसकी खूबसूरती अपने पूरे शबाब पर होती है। यहां गुलाब के फूलों को सुरक्षित रखने के लिए परदा गार्डन बनाया गया है।  

म्यूजिकल फव्वारे 

इस उद्यान के मध्य में स्थित फव्वारा इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। हाल ही में बनाए गए म्यूजिकल गार्डन में रोमांचक फव्वारों के ऐसे जोड़े हैं, जिनसे शहनाई का संगीत और वन्देमातरम की धुन निकलती है। इससे निकलने वाली धुन पर पर्यटकों का मन सहसा ही झूमने लगता है। शाम के समय विभिन्न रोशनियों के बीच इन फव्वारों का सौंदर्य देखते ही बनता है। 

कब और कैसे जाएं?

दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन फरवरी माह के मध्य से मार्च माह के मध्य तक खुला रहता है। हर साल देश के राष्ट्रपति एक निश्चित तिथि तय करके इसे आम नागरिकों व पर्यटकों के लिए खोल देते हैं। यह सोमवार के अलावा सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है। मेट्रो व बस से केंद्रीय सचिवालय या उद्योग भवन उतरकर मुगल गार्डन तक पहुंचा जा सकता है। यहां साधारणतया सुबह 9 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक प्रवेश किया जा सकता है। इसके खुलने की तिथि व समय के विषय में आम लोगों की सुविधा के लिए विभिन्न समाचार पत्रों और चैनलों में समय-समय पर सूचना प्रकाशित व प्रसारित करवाई जाती है।     

यह भी पढ़ें -मन और तन कीजिए स्वस्थ साउंड हीलिंग थेरेपी से

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