रम जाइए 'कच्छ के रण में'

श्वेता राकेश

22nd February 2021

गुजरात की लोक संस्कृति और परंपरा का मेल देखना हो तो आइए कच्छ के रण महोत्सव में, जहां का प्रमुख आकर्षण है 'ग्रेट रण ऑफ कच्छÓ, जिसका नाम सुनते ही ऊंट, रेगिस्तान, रेत और रंग-बिरंगी पोशाकों से सजे-धजे स्थानीय निवासी और पर्यटकों का ध्यान आता है जो इस उत्सव को महोत्सव में बदलते हैं और इसे विश्व प्रसिद्घ बनाते हैं।

रम जाइए 'कच्छ के रण में'

गुजरात का कच्छ इन दिनों फिर चर्चा में है और यह चर्चा है विश्व प्रसिद्घ रण महोत्सव की। गुजरात पर्यटन द्वारा प्रतिवर्ष साल के अंत में अर्थात् नवंबर से लेकर फरवरी तक तीन माह 'ग्रेट रण ऑफ कच्छ' का आयोजन किया जाता है। गुजरात की लोक परंपरा एवं रंग-बिरंगी संस्कृति को एक धागे में पिरोता है यह उत्सव। पूरे तीन माह यह उत्सव अपनी छटा बिखेरता है और देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है।

कच्छ का रण गुजरात राज्य में कच्छ जिले के उत्तर पूर्व में फैला हुआ एक विशाल क्षेत्र है, जो थार रेगिस्तान का ही एक भाग है। लेकिन यह रेगिस्तान रेत का नहीं, बल्कि नमक का रेगिस्तान है, एक सफेद रेगिस्तान। जी हां, गुजरात के कच्छ शहर में विश्व का सबसे बड़ा नमक का रेगिस्तान है, जो 'रण ऑफ कच्छ' के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्घ है। और यह नमक का रेगिस्तान ही कच्छ का प्रमुख आकर्षण है, जिसे देखने दुनिया भर से हजारों पर्यटक आते हैं। मॉनसून में कच्छ की खाड़ी का पानी इस रेगिस्तान में आ जाता है और यह 'रण' अर्थात् रेगिस्तान जुलाई से लेकर अक्टूबर-नवंबर तक एक समुद्र के सदृश दिखाई देता है। दिसंबर तक 'रण ऑफ कच्छ' सूखने लगता है, जिसके बाद यह रेगिस्तान एक सफेद रेगिस्तान में बदल जाता है और यही इसे प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनाती है। 'रण ऑफ कच्छ' की एक तरफ राजस्थान का प्रसिद्घ थार रेगिस्तान है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान का सिंध प्रांत आता है।

रण महोत्सव के प्रमुख आकर्षण

'ग्रेट रण ऑफ कच्छ' का प्रमुख आकर्षण है 'नमक का रेगिस्तान'। कच्छ का यह सफेद रण दुनिया भर में मशहूर है और गुजरात की यात्रा बिना कच्छ घूमे अधूरी मानी जाती है। नमक के रेगिस्तान को चांदनी रात में देखना और भी मनोरम एवं आकर्षक लगता है। चांद की रोशनी में यह रेगिस्तान बिलकुल सफेद दिखाई देता है। 

गुजरात के लोककलाकार अपने लोकगीतों एवं नृत्य से ऐसा समां बांधते हैं कि क्या देशी, विदेशी पर्यटक भी उन्हें देखने-सुनने से खुद को रोक नहीं पाते। इसके साथ ही गुजरात का पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी सैलानियों को खूब भाता है। कई वर्षों से इस उत्सव में कलाकार रेत पर अपनी कला प्रदर्शन करते हैं। भारत के गौरवशाली इतिहास की झलक रेत पर उकेरी जाती है, जिनमें कई कलाकार रामायण के पात्रों से लेकर स्वामी विवेकानंद की कच्छ यात्रा को अपनी कला के माध्यम से जीवंत करते हैं। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो सम्मेलन में जाने से पूर्व कच्छ की यात्रा की थी। इस कारण भी यह क्षेत्र काफी प्रसिद्घ है।

हस्तशिल्प कला भी इस उत्सव को खास बनाती है। कच्छ में हथकरघा के बने कपड़े, पारंपरिक बंधेज में लिपटी साड़ी और दुपट्टïे के कपड़े, कढ़ाई किए गए कपड़े भी सैलानी बहुत शौक से खरीदते हैं। साथ ही लकड़ी से बनी चीजें भी ध्यान आकर्षित करती हैं। गुजराती-राजस्थानी गहनों की भी खूब मांग होती है। कच्छ खरीदारी करने के लिहाज से अपेक्षाकृत कम मंहगी जगह है। तेल से बने आर्ट एंड क्राफ्ट की चीजें खरीद आप अपने घर को एक नया रूप दे सकते हैं। तेल से बनी रोगन आर्ट में अरंडी के बीज के तेल से बने पेंट का इस्तेमाल कपड़े पर पेंट करने के लिए किया जाता है। मिट्टी के बने कलात्मक घर, हस्तकला उद्योग भी कच्छ में फलते-फूलते हैं।

  • रेगिस्तान हो और ऊंट की सवारी ना हो, ये तो संभव नहीं। रंग-बिरंगे, सजे-धजे ऊंट कच्छ की यात्रा को और भी यादगार बनाते हैं।
  • कच्छ प्रवासी पक्षियों एवं जंगली गधों के लिए भी प्रसिद्घ है। कच्छ में ही कच्छ रेगिस्तान वन्य जीव अभ्यारण्य स्थित है। इसमें दुर्लभ जंगली जानवर, सांभर, जंगली सूअर, चिंकारा, लोमड़ी और राजहंस की भी दुर्लभ प्रजातियां दिखती है।
  • नमक के रेगिस्तान के अलावा कच्छ और उसके आसपास कई पर्यटन स्थल हैं जिनमें प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता एवं हड़प्पा संस्कृति के अवशेष को दर्शाती धोलावीरा, मांडवी बीच, कच्छ संग्रहालय, भुज के पास प्राग और आइना महल आदि मुख्य रूप से उल्लेखनीय हैं।

पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था

रण महोत्सव में आए पर्यटकों के ठहरने के लिए गुुजरात पर्यटन की तरफ से विशेष प्रबंध किए जाते हैं। भुज से 5 कि.मी. की दूरी पर रण के बीच धोरडो गांव में पर्यटकों के लिए खासतौर पर एक कैंप बसाया जाता है। यहां देशी-विदेशी सैलानियों को उनकी बजट के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है।

डीलक्स, रूम, सुइट, एसी, नॉन एसी कमरे, खाने-पीने और हर चीज की सुविधा दी जाती है। पर्यटक चाहें तो डेजर्ट पेट्रोल वाहन पर रेगिस्तान पर अकेले सवारी का आनंद ले सकते हैं। डेजर्ट सफारी भी काफी प्रसिद्घ है। इसके अतिरिक्त रेगिस्तान में रंग-बिरंगे, सजे-धजे ऊंट की पीठ पर बैठकर रेगिस्तान का नजारा लेना तो सर्वाधिक प्रसिद्घ है और पर्यटकों के बीच ऊंट की सवारी लोकप्रिय भी है। रण उत्सव में पर्यटकों को हमीर सेर लेक के किनारे आयोजित रण कार्निवल की सैर कराई जाती है, जिससे वे गुजरात की लोकसंस्कृति एवं परंपराओं से रू-ब-रू हो सकें।

पहचान-पत्र अनिवार्य

कच्छ रण महोत्सव में शामिल होने के लिए अपना पहचान-पत्र साथ लाना अनिवार्य है क्योंकि इसके बगैर मेले में प्रवेश नहीं मिल सकता। विदेशी सैलानियों के लिए पासपोर्ट रखना बेहद जरूरी है। तो यदि उत्सव में आएं तो पहचान पत्र के साथ ही आएं।

रण महोत्सव में आए हजारों देशी-विदेशी पर्यटकों से यह क्षेत्र जीवंत हो उठता है। गुजरात की रंग-बिरंगी संस्कृति, हस्तशिल्प कलाएं और परंपराएं 'ग्रेट रण ऑफ कच्छ' महोत्सव को और भी रंगीन बनाती हैं। लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं का बेजोड़ संगम है कच्छ। कच्छ के बिना वाकई गुजरात की यात्रा अधूरी है। शायद रण महोत्सव की भव्यता देख आप भी कह उठे, 'कुछ दिन तो गुजारो कच्छ में....'।  

यह भी पढ़ें -भारतीय संस्कृति में रची-बसी सरस्वती नदी

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