क्या है आर. ओ.वॉटर का सच?

गृहलक्ष्मी टीम

24th February 2021

शुद्घता व स्वच्छता के नाम पर आजकल बाजार में फिल्टर पानी बेचा जा रहा है, जो हमारे सेहत के लिए ठीक नहीं है। साथ ही यह पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या है। कैसे, जानें इस लेख से।

क्या है आर. ओ.वॉटर का सच?

रिवर्स आस्मोसिस यानी आर.ओ यानी (Reverse Osmoses)  यह जल को शुद्घ करने की एक प्रक्रिया है जिसमें जल की सारी अशुद्घियां दूर हो जाती हैं, पर साथ-साथ शरीर के लिए आवश्यक खनिज-लवण भी निकल जाते हैं।

कुएं का जल खारा या कठोर भी हो सकता है। इसके लगातार सेवन से पथरी होने का खतरा होता है। जल में कठोरता जल में घुले कणों (Total Desolved Solids-TDS) जैसे कैल्सियम व मैग्नीशियम के कार्बोनेट, बायकार्बोनेट, क्लोराईड व सल्फेट के कारण होती है। कठोर जल का टीडीएस 500 से 2000 तक भी हो सकता है जबकि पीने के पानी का टीडीएस 200 से 250 के बीच होना चाहिए। लेकिन आर.ओ वॉटर पानी में प्राकृतिक रूप से मौजूद शरीर के लिए आवश्यक खनिज तत्त्वों कैल्सियम व मैग्नीशियम 92-99' तक छान देता है। कैल्सियम की कमी से हड्डियां व दांत कमजोर हो जाते हैं और मांसपेशियों में ऐंठन होती है। मैग्नीशियम की कमी से गुर्दे प्रभावित होते हैं।

आर.ओ का अविष्कार 1950 में अमेरिका में मुख्य रूप से समुद्री खारे पानी को पीने योग्य बनाने के लिए हुआ था। 1977 में सबसे पहले फ्लोरीडा में समुद्री पानी पीने योग्य बनाकर नेवी के जवानों को उपलब्ध कराया गया था।

शुद्घ जल का पीएच न्युट्रल यानी 7 होता है। हमारी लार का पीएच 7.8 यानी 7 के ऊपर अल्कलाईन पीएच है। इसे न्यूट्रल करने के लिए हमारे शरीर की आंतरिक ऊर्जा खर्चा होती है, जिससे शरीर में स्थित कैल्सियम व मैग्नीशियम तत्त्वों की कमी हो जाती है।

आर.ओ का कम खनिज-लवण युक्त पानी पीने से पेशाब की मात्रा 20' बढ़ जाती है जिससे शरीर में स्थित सोडियम, पोटेशियम, कैल्सियम, क्लोराईड और मैग्नीशियम जैसे तत्त्व निकल जाते हैं जिससे किडनी पर अत्यधिक भार पड़ता है, बी.पी. बढ़ता है और हार्ट अटैक, किडनी का काम न करना, पेशाब संबंधी बीमारियों का खतरा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लगातार आर.ओ वॉटर का सेवन मौत का कारण भी बन सकता है। इसी कारण यूरोप व कई देशों में आर.ओ वॉटर पर पूर्णत: प्रतिबंध है।

एक लीटर आर.ओ वॉटर बनाने के लिए करीब दो लीटर पानी बर्बाद होता है यह फिल्टर प्लास्टिक का होता है, तेज प्रेशर से पानी के कारण प्लास्टिक का कुछ अंश पानी में घुलने की संभावना रहती है, जिससे कैंसर होने का खतरा होता है। सावधानी के तौर पर आप पानी को उबालकर पी सकते हैं। पानी उबालने से उसमें स्थित बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। अस्थायी कठोरता दूर हो जाती है। सेहत और सुरक्षा की दृष्टि से चाहे तो हम घर में एक वॉटर फिल्टर और अल्ट्रावायलेट लगा सकते हैं, ताकि हमें शुद्घ और बैक्टीरिया रहित पानी मिले। 

यह खनिज युक्त पानी भले ही सेहत के लिए उपयुक्त हो परंतु इसका लगातार सेवन हमारे सेहत के लिए खतरनाक है। इसलिए बोतलबंद पानी या आर.ओ वॉटर का सेवन न करें। इसकी जगह घड़े के पानी का इस्तेमाल करें या रात को तांबे के लोटे में रखा हुआ पानी सुबह पिएं। यह स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम है। 

'बिना औषधि स्वस्थ व निरोग जीवन जीने की कला' पुस्तक से साभार  

यह भी पढ़ें -कॉस्मेटिक बनाएं घर पर, सब कुछ हो नेचुरल

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