नैरो माइंडेड - गृहलक्ष्मी कहानियां

प्रेमलता यदु

2nd March 2021

धानी के जेहन में आज एक बार फिर आत्महत्या का ख्याल आया।इन दो वर्षो में ना जाने कितनी दफे उसके मन में यह ख्याल आता रहता है। हर बार सुधीर से हुए झगड़े के पश्चात धानी को ऐेसा लगता मानो वह किसी जलते हुए अंगारे पर चल रही हो,उसे अपना जीवन बेमानी लगने लगता। धानी अपनी शादी नाम की संस्था को बचाए रखने के लिए ना जाने क्या-क्या जतन करती, लेकिन हर बार उसके सारे प्रयास विफल ही रहते।

नैरो माइंडेड  -  गृहलक्ष्मी कहानियां

        ‎डोरबेल बजने के साथ धानी अपने आप को सहज करती हुई दीवार पर लगी घड़ी की ओर देख तेजी से उठ खड़ी हुई ,सुबह के 8:00 बज चुके थे ।उसे और सुधीर को 9:30 बजे ऑफिस के लिए निकलना था ।धानी अपने बालों का जूड़ा बनाती हुई दरवाजे की ओर बढ़ी,अपने चहरे पर झूठी मुस्कान का मुखौटा लगा उस ने दरवाजा खोला तो सामने उसकी मेड कान्ता खड़ी थी।

       इन दो वर्षो में धानी को पता ही नही चला, वह ना जाने कब अपने चेहरे पर परिस्थिति अनुरूप मुखौटा पहनना सीख गई। 

     कान्ता के अन्दर आते ही धानी पल भर में अपने चहरे का भाव बदलती हुई गुस्से और रौब से बोली -

       "तू इतना लेट क्यों आई ।तुझे मालूम है ना हमें 9:30 बजे ऑफिस निकलना होता है। देख..... पूरा घर फैला हुआ है ।कल रात कुछ मेहमान आये थे "।

धानी, कान्ता को भ्रमित करती हुई बोली - 

       "मैं सुबह से सब समेट रही हूँ और तू अभी आ रही है ।अब.. तू यहाँ खड़ी मत रह,जा जल्दी से ब्रेकफास्ट रेडी कर फिर हमारे ऑफिस जाने के बाद सब समेटती रहना, और.... हाँ सुन, पहले हमारे लिए अच्छी सी चाय बना ला, सर फटा जा रहा है। कल रात सोने में लेट हो गए थे"।

       कान्ता कुछ कहे बगैर धानी और बिखरे  हॉल को देख कुछ समझने की कोशिश करती हुई किचन की ओर चाय बनाने के लिए मुड़ गई।‎

       बिखरा हुआ हॉल एस ट्रे और फ्लोर पर पड़े ढेर सारे सिगरेट के टुकड़े, वॉईन की बोतल और केवल एक गिलास कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे ।शायद कल रात घर पर कोई आया ही नही था ।बात कुछ और थी और धानी कुछ और ही कहानी बना रही थी ।

        ‎सुधीर और धानी दोनों ही मुखौटा बदलने में माहिर थे।पूरी रात की लड़ाई के बाद कान्ता जब टेबल पर चाय ला कर रखी तो दोनों साथ में चाय इस तरह पीने लगे जैसे दोनों के बीच कुछ हुआ ही ना हो।यह प्यार था , दिखावा था, समाजिक दबाव या घर के बाहर यदि बात गई तो लोग क्या कहेंगे का डर.....?

        जो भी हो दोनों इकट्ठा चाय पीने के पश्चात ऑफिस के लिए रेडी हो अपने -अपने ऑफिस की ओर चल पड़े।

         कार ड्राइव करते हुए धानी बुदबुदाई-

"अब वह सुधीर के साथ नहीं रहेगी, वह सेल्फ डिपेंड है।उसे किसी की जरूरत नहीं, वह सुधीर से डायवोर्स ले लेगी,फिर अगले ही पल धानी अपने आप को समझाते हुए बोली- "नहीं...नहीं.... वह ऐसा कुछ नहीं करेगी, यदि उसने ऐसा किया तो पापा यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे, उसकी छोटी बहन की शादी पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा और सब से मुख्य बात,वह सुधीर को अपने आप से ज्यादा प्यार करती है वह ऐसा नहीं कर सकती "।अचानक सिग्नल पर पहुँच ! रेड सिग्नल देख धानी जोर से ब्रेक लगाती हुई अपने चिंतन से बाहर आई।

         सिग्नल पार करने के पश्चात और थोड़ी दूर ड्राइव करने के बाद धानी पुनः अपने विचारों में खोने लगी। कल रात सुधीर की कही बातें वह भूल नहीं पा रही थी।वह सोचने लगी सुधीर हर बार कुछ ऐेसा कहता या करता है जिससे उसका दिल द्रवित हो उठता है।

       अब कल ही की बात है - धानी नहीं चाहती थी.सुधीर के संग वह आशीष की पत्नी शिखा की बर्थ डे पार्टी पर जाए लेकिन सुधीर जिद कर धानी को अपने साथ ले गया और पार्टी में पहुंचते ही सुधीर उसे छोड़ अपने दोस्तों में व्यस्त हो गया, साथ ही साथ सुधीर , शिखा के साथ क्लोज़ और फ्रेंडली भी होने लगा।धानी को सुधीर का शिखा के साथ यूं क्लोज़ और फ्रेंडली  होना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। वैसे तो उसे सुधीर का इस प्रकार किसी भी महिला के संग जरूरत से ज्यादा मिलनसार होना तनिक भी पसंद नही था।

       धानी यह सब देख अन्दर ही अन्दर पूरे पार्टी में कुढ़ती रही,लेकिन उसके चहरे में एक शिकन भी ना थी,कोई उसे देख इस बात का अन्दाज़ा ना लगा सका कि वह भीतर से इर्ष्या की आग में जल रही है ,क्योंकि धानी तो अपने चेहरे के भावों को छुपाने में अब माहिर थी ।वह पूरी पार्टी में इस प्रकार हँसती मुस्कुराती रही जैसे उसे सुधीर के इस व्यवहार से कोई फर्क ही नही पड़ता।

        पहले धानी के दोस्त उस के चहरे के भाव से उस के मन की दशा जान लेते थे,पर अब ऐसा नहीं था। उसके चहरे के भाव से उस के भावनाओं का पता लगाना अब मुश्किल था ।

         ‎पार्टी से आने के बाद इसी बात पर कल रात सुधीर और धानी के बीच पूरी रात लड़ाई चलती रही.धानी अपना गुस्सा हाल में रखे सामान और कुशन पर निकाल रोती हुई बेड रूम में चली गई और सुधीर हॉल में सारी रात सिगरेट पे सिगरेट और वाइन पीता रहा।

         सुधीर की कही बाते धानी के कानो में पारे की तरह धीरे धीरे घुलती हूई उसे असहनीय पीड़ा पहुँचा रही थी।-

  "धानी यू नीड टू ग्रो अप, को-एजुकेटेड और वर्किंग लेडी  हो कर भी तुम इतनी नैरो माइंडेड, मीन मेंटलिटी की कैसे हो सकती हो, यू आर सिक.......आई नीड अ स्पेस.....। सुधीर और धानी के बीच इन दो सालो में ना जाने इस प्रकार के कितने ही झगड़े होते रहे है ।

  धानी सुबह तक यह सोचती रही क्या वाकई वो-"नैरो माइंडेड, मीन मेंटलिटी,और सिक है.वो इन सवालों के जवाब अपने दादी, बड़ी मम्मी, चाची और माँ की कही बातो में तलाशने लगी.जो हर वक्त घर की सभी लड़कियों को हिदायत देती हुई ‌कहा करती थी -

  "पुरुष और स्त्री के बीच एक परदा और मर्यादा का होना बहुत जरूरी है । किसी भी पुरुष से बात करते वक्त एक सलीका,एक दूरी का  होना आवश्यक है।यहाँ तक कि उन्हें अपने ही घर में अपने पापा, ताऊ, चाचा और अपने हम उम्र भाइयों से भी एक दूरी रखने की समझाईश दी जाती थी ।

  मन में चल रहे उलझन की गुत्थी को सुलझाने और समझाने की कोशिश करती हुई धानी ऑफिस पहुँची।कार पार्किंग में कार पार्क करती हुई उस ने अपने चेहरे पर झूठी मुस्कान के साथ आनन्द के अभिवादन का जवाब दिया जो धानी को दूर से ही देख हाथ हिलाता हुआ बोला-"हाय...... धानी गुड मॉर्निंग "।

  आनन्द भी हमेशा धानी के साथ  नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश में लगा रहता है, लेकिन धानी उस के साथ केवल औपचारिक व्यवहार ही रखती आई थी।

       धानी अपनी डेस्क पर पहुँच अपने कामों में लग गई. . ऑफिस के कामों को निपटाती हूई धानी ने निश्चय किया कि आज वो सुधीर को यह बता के ही रहेगी कौन मीन मेंटलिटी, नैरो माइंडेड और सिक है।

      रात दस बजे जब धानी घर पहुँची, सुधीर बेसब्री से हॉल में टहलता हुआ धानी का इंतज़ार कर रहा था।धानी को ऑफिस से लेट आया देख सुधीर अपने चेहरे पर थोड़ी चिंता का बनावटी भाव लिए करीब करीब रौबिले स्वर में बोला-

       "आज तुम लेट कैसे हो गई।धानी सुधीर को कोई जवाब दिए बगैर अपना ऑफिस बैग सोफे पर रख डाइनिंग टेबल पर रखे जग से पानी निकाल पीती हुई बोली -" कान्ता डिनर बना गई क्या?"। सुधीर ने कोई जवाब नही दिया "।

      सुधीर ने दोबारा धानी से सवाल किया -"तुम ने बताया नहीं तुम आज लेट कैसे हो गई"। धानी मुस्कुराती हुई बोली -

  "ऑफिस के बाद आज मैं आनन्द के साथ कॉफी शाप चली गई थी जैसे तुम चले जाते हो कभी कभी अपनी कलिग सिन्धु के साथ।धानी के इतना कहते ही सुधीर का पुरूषत्व जाग उठा, उसके अहम को ठेस पहुंची और वह धानी पर चिल्लाता हुआ कहने लगा -

  " तुम्हें शर्म नही आती।घर के मान-सम्मान और अपने मर्यादा का भी तुम्हें ख्याल नहीं । इतनी रात तक गैर मर्द के साथ तुम बेशर्म की तरह घूम रही थी।

        धानी सुधीर की बातें सुन,अपनी होंठों पर मुस्कान लाती हुई बोली-"जस्ट चिल यार, तुम नैरो माइंडेड नही हो, फिर इतना गुस्सा क्यों ?कह धानी बेडरूम की ओर मुड़ गई। सुधीर निशब्द खड़ा धानी को देखता रहा और धानी मन ही मन यह सोचने लगी असल मायने में नैरो माइंडेड कौन है ? सच्चाई तो यह थी की वह अभी अपनी फ्रेंड रूही के घर से लौटी थी।आनन्द के साथ तो वह कॉफी शाप गई ही नही थी......।

 

 

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