मनी कंट्रोल: बैंक से जुड़े काम करने हैं खुद तो सेविंग अकाउंट्स के बारे में सबकुछ

चयनिका निगम

5th March 2021

बैंक के काम खुद करने की प्लानिंग करें तो सबसे पहले सेविंग अकाउंट के बारे में जान लें।

मनी कंट्रोल: बैंक से जुड़े काम करने हैं खुद तो सेविंग अकाउंट्स के बारे में सबकुछ

बैंक के काम अक्सर घर के पुरुष कर देते हैं अब तो आपको लगता है कि आप ये काम कर ही नहीं पाएंगी। ये काम मतलब बैंक के काम। जहां आपकी जमा-पूंजी इकट्ठा होती है। जहां मेहनत करके कमाए पैसों को इसलिए रखा जाता है क्योंकि आप उन्हीं पैसों से आपके बच्चे आगे की पढ़ाई करते हैं। आप घर बनवाती हैं और कई सारे सपने भी पूरे होते हैं। तो फिर क्यों सिर्फ घर के पुरुष बैंक के अकाउंट के बारे में जानें। आपको भी अकाउंट से जुड़ी बातें बता होनी चाहिए, आपको पता होना चाहिए कि सेविंग अकाउंट कितने तरह के होते हैं? चलिये आज आपको इसी के बारे में बताते हैं ताकि आप अपने लिए सूटेबल अकाउंट चुन पाएं। चलिए जान लें कौन-कौन से स्विंग अकाउंट हैं मौजूद-

जीरो बैलेंस वाला सेविंग अकाउंट-

इस अकाउंट को टू इन वन भी कहा जा सकता है। दरअसल इसमें सेविंग और करेंट दोनों ही अकाउंट की ख़ासियतें होती हैं। इसमें एक तय सीमा से ज्यादा पैसे नहीं निकाले जा सकते हैं। लेकिन मिनिमम बैलेंस वाली कोई दिक्कत इसमें नहीं होती है। 

महिला बचत खाता-

जैसा की नाम से ही पता चलता है ये खाता महिलाओं को ध्यान में रख कर ही बनाया गया है। इसमें कुछ ख़ासियतें ऐसी होती हैं जो महिलाओं की लाइफ को आसान बनाती हैं। जैसे डीमैट अकाउंट खोलने पर फ्री चार्ज और ऋण पर कम ब्याज। इसके अलावा शॉपिंग पर डिस्काउंट भी मिल जाता है। 

वरिष्ठ नागरिक बचत खाता-

इस खाते में 60 से ज्यादा उम्र के लोग अपना अकाउंट खोलते हैं। और उन्हें इसके लिए ब्याज की दरों का फायदा होता है। इसमें साधारण सेविंग अकाउंट के मुक़ाबले थोड़ा ज्यादा ब्याज मिलता है। ये अकाउंट वरिष्ठ नागरिकों की सेविंग स्कीम्स से भी लिंक होता है। इससे पेंशन अकाउंट भी लिंक होते हैं। 

नियमित सेविंग अकाउंट

ये एक साधारण सेविंग अकाउंट होता है, इसमें कुछ बेहद साधारण सी शर्तें रखी जाती हैं। इसमें कोई भी तय रकम जमा करनी ही नहीं होती है। बस आप इसमें पैसा सुरक्षित रख पाते हैं। लेकिन हां, इसमें मिनिमम बैलेंस होना जरूरी होता है। 

सैलरी सेविंग अकाउंट

ये अकाउंट कंपनी की ओर से कर्मचारियों के लिए खोला जाता है। इसमें कंपनी समय के हिसाब से सैलरी का पैसा डालती रहती है। इसमें मिनिमम बैलेंस रखना जरूरी नहीं होता है। 

बच्चों के लिए सेविंग अकाउंट-

बच्चों के लिए भी बैंकों में सेविंग अकाउंट होते हैं। इसकी खासियत ये भी होती है कि इसमें मिनिमम बैलेंस की जरूरत नहीं होती है। इस अकाउंट को बच्चों को उनकी आगे की पढ़ाई और भविष्य के लिए खोला जा सकता है। आप इसमें उनकी जरूरतों के हिसाब से हर महीने या जब आप चाहें पैसे जमा कर सकते हैं। ये अकाउंट कीसी गार्जियन के साथ ही खोला जा सकता है। एक निश्चित उम्र के बाद बच्चा इसे खुद ऑपरेट कर पाएगा। तब ये नॉर्मल अकाउंट आइसा हो जाता है। 

 

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