मानुष गंध - गृहलक्ष्मी लघुकथा

लक्ष्मी शंकर वाजपेयी

8th March 2021

मैं अपनी धुन में सड़क पर चला जा रहा था तभी एक आवाज सुनाई दी-एक्सक्यूज मी, इस रोड का नाम क्या है? स्टेट बैंक की ब्रांच इसी रोड पर है?

मानुष गंध - गृहलक्ष्मी लघुकथा

जी, ये रोड तो मालवीय रोड है। पर बैंक का पता नहीं, नया हूं इस इलाके के लिए। और मैंने फ़ौरन एक दुकान वाले से पूछा था, स्टेट बैंक इसी रोड पर है?
तभी एक और आवाज़ आई- अंकल जी, आप परेशान मत हों। पापा को सब पता है। 20 साल से इसी बैंक में आ रहे हैं। पास में ही घर है। बस आज छह महीने बाद घर से बाहर निकले हैं। पहली बार किसी से बात की है।
कोई बहाना तो चाहिए था बात करने को...!!

 

 

 

 

 

 

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