बच्चेदानी के बाहर जब टिशु बनने लगता है

मोनिका अग्रवाल

1st April 2021

आज के दौर में महिलाएं उस हर मुकाम को हांसिल करने में सक्षम हैं, जिनके लिए उन्हें कम समझा जाता था। आज महिलाओं की स्थिति बदल रही है, लेकिन इन सबके बीच जो बिगड़ रही है वो है उनकी सेहत।

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आज के दौर को अगर महिलाओं का दौर कहा जाए तो उसमें कोई भी गलती नहीं होगी। आज मल्टी टास्किंग महिलाएं अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बीच संतुलन बनाने में इतनी बिज़ी हो जाती हैं कि, वो अक्सर अपना और अपनी हेल्थ को अनदेखा करने लगती हैं। अपनी हेल्थ के प्रति लापरवाही एंडोमेट्रियोसिस यानि की प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानी के खतरे को जन्म देने लगती है। जो बेहद गम्भीर हो सकती है। अगर कोई महिला इस परेशानी से गुजर रही है तो उसके पीठ के नीचले हिस्से में काफी लम्बे समय तक डर बना रह सकता है। साथ ही सेक्स के बाद भी दर्द, ब्लीडिंग, डाईजेशन में समस्या जैसे समान्य लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है। इस डिज़ीज का निदान करना मुश्किल हो सकता है। कई महिलाएं ऐसी भी होती है जिन्हें कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन परेशानी हुबहु उसी तरह होती है। आज इस खास लेख के जरियेनोएडा स्थित मदर हुड हॉस्पिटल की वरिष्ठ सलाहकार प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मंजू गुप्ताक्या कुछ जानकारी दे रही हैं आइये जानते हैं।

1.महिलाएं बने जागरूक- एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी डिज़ीज है जो गर्भाशय के बाहर की ओर पनपती है। जिसमें फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय, योनी काफी बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। और इसके निदान में देरी हो तो, महिलाओं की जान तक जा सकती है।ऐसी स्थिति में आपकी मदद लेप्रोस्कोपी कर सकता है। लेकिन सही समय में इसका इस्तेमाल नहीं किया गया तो बाद में इसका कोई असर नहीं होता है। इससे बांझपन और गर्भाशय में सूजन जैसी समस्या तक हो सकती है। इसका उपचार किसी दवा या सर्जरी से ही सम्भव है।

2.महिला के जीवन के लिए बेहद खतरनाक- हम ऐसे देश का हिस्सा हैं, जहां  जब एक महिला को पीरियड्स होते हैं, तो उसमें उठने वाला दर्द वो समान्य मानती हैं , और उन्हें बर्दाश्त करके नजर अंदाज कर देती हैं। लेकिन यकीन मानिये ये स्थिति हेल्थ को और भी ज्यादा खराब कर देती है। शोध के मुताबिक ये स्थिति हर 10 में से एक महिला में देखी जा सकती है। देखा जाए तो एंडोमेट्रियोसिस का निदान चाकलेट सिस्ट के रूप में काफी प्रचलित है। ये कम से कम इतना समय समय लेता है जितने में स्थिति में सुधार हो सके।

3. कैसे पहचानें लक्षण- ज्यादातर महिलाओं को इस डिज़ीज से जुड़े लक्षणों की पहचान ही नहीं होती। ये दर्द की वजह से किसी भी महिला और उसकी सेक्स लाइफ को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में महिलाएं सेक्स से कतराने लगती हैं और उनके रिश्ते में दरार तक आ जाती है। जो जीवन के साथ साथ किसी भी महिला के व्यक्तित्व को बुरी तरह से प्रभावित करता है।

• इस डिसीज की शुरुआत में महिलाएं आत्मसम्मान में कमी के साथ अकेलापन महसूस करती हैं।

• एंडोमेट्रियोसिस से तनाव, टेंशन तक हो सकता है, जो बांझपन का कारण भी बन सकती है।

• लैप्रोस्कोपी के माध्यम से गम्भीर रूप  इस डिसीज से निजात पाया जा सकता है।

महिलाओं के अपने जीवन में क्या कुछ नहीं झेलना पड़ता। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में  पहले ही कई बीमारियाँ घेरने लगती हैं। वजह खुद पर ठीक से ध्यान ना देना है। एक छोटी सी लापरवाही किसी भी महिला की पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकती है। डॉक्टर की मानें तो जब आपको एंडोमेट्रियोसिस डिज़ीज को लेकर संदेह हो तो तुरंत बिना किसी देर के अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें। और उनसे उचित परमर्श लें। इससे आपकी जिंदगी संवरेगी।

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